₹62.23 की मांग: मिलों के शीरे का भाव बढ़ा तो गन्ना भुगतान तेज होगा?

पेराई शुरू हो चुकी है और किसानों के मन में एक ही सवाल है — मिलों से भुगतान कब और कितना मिलेगा। सोमवार को मिलों के संगठन ISMA ने सरकार से एक ऐसी मांग रखी जो इसी सवाल से जुड़ी है: शीरे से बनने वाले इथेनॉल का भाव बढ़ाया जाए, क्योंकि मिलों की कमाई का यही रास्ता अब मुख्य रह गया है। (बिज़नेस टुडे, 19 अक्टूबर 2026; द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026)
यह समझना जरूरी है: मिलें जितनी मजबूत होंगी, पर्ची-तौल के बाद बकाया उतनी ही जल्दी चुकेंगी। इसलिए यह सिर्फ उद्योग की मांग नहीं, किसान की जेब से जुड़ा मामला है।
57.97 से 62.23: मांग के पीछे का हिसाब
मिलों के संगठन ISMA ने मांग की है कि सी-हेवी शीरे से बनने वाले इथेनॉल की खरीद कीमत 57.97 रुपये से बढ़ाकर 62.23 रुपये प्रति लीटर की जाए — 4.26 रुपये यानी करीब 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी। (बिज़नेस टुडे; द प्रिंट)
बल्लानी के मुताबिक, जब कच्चा माल और लागत दोनों बढ़ गए हैं तो इथेनॉल की कीमत का स्थिर रहना मिलों के लिए नुकसान का सौदा है। संगठन ने दो और मांगें रखी हैं — तेल कंपनियां सी-हेवी शीरे के इथेनॉल की पूरी मात्रा खरीदें, और एफआरपी से जुड़ा एक पारदर्शी मूल्य फार्मूला लागू हो ताकि गन्ने का भाव बढ़ने पर इथेनॉल का भाव अपने आप समायोजित हो। (बिज़नेस टुडे; द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026)
टेंडर का खेल: 16 अक्टूबर से शुरू हुई कहानी
16 अक्टूबर को भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने 2026-27 आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1100 करोड़ लीटर इथेनॉल का टेंडर जारी किया। यह इथेनॉल नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत मिलावट (E20) के लिए चाहिए। (द प्रिंट; एनर्जी इकॉनॉमिक टाइम्स, 20 अक्टूबर 2026)
इस टेंडर में सरकार ने निर्देश दिया कि गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी मोलासेस से बनने वाला इथेनॉल नहीं खरीदा जाएगा। चीनी से बनने वाले इथेनॉल पर रोक लगा दी गई है, ताकि घरेलू चीनी की उपलब्धता बनी रहे — सी-हेवी शीरे का इथेनॉल ही एकमात्र गन्ना-आधारित विकल्प टेंडर में बचा है। ISMA ने इस रोक का स्वागत किया है, लेकिन उसका कहना है कि नीति में मिलों के हित का भी ध्यान रखना होगा — और 62.23 रुपये की मांग उसी का हिस्सा है। (द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026)
किसान की भाषा में समझिए: सी-हेवी शीरा क्या है
गन्ने से चीनी निकालने के बाद बचा शीरा तीन श्रेणियों का होता है — ए-हेवी, बी-हेवी और सी-हेवी। सी-हेवी शीरे से इथेनॉल बनाने में चीनी की रिकवरी प्रभावित नहीं होती, यानी चीनी का उत्पादन भी सुरक्षित रहता है और मिलें शीरे से अतिरिक्त कमाई भी कर लेती हैं। (द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026)
चीनी से बने इथेनॉल पर रोक के बाद सी-हेवी शीरा ही मिलों के लिए इथेनॉल आपूर्ति का मुख्य रास्ता बचा है। इसका भाव 62.23 रुपये होने पर मिलों की डिस्टिलरी आय बढ़ेगी, तो किसानों का बकाया चुकाने के लिए उनके पास नकदी भी बढ़ेगी।
एफआरपी से भाव जोड़ने की बात क्यों अहम है
2026-27 के लिए केंद्र ने गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय किया है — पिछले सत्र के 355 रुपये से 10 रुपये अधिक। (बिज़नेस स्टैंडर्ड; द हिंदू बिज़नेसलाइन)
ISMA चाहता है कि इथेनॉल की खरीद कीमत एफआरपी से जोड़ी जाए। गन्ने का भाव बढ़ने पर मिलों की लागत अपने आप बढ़ जाती है, लेकिन इथेनॉल का भाव हर साल सरकार के फैसले पर टिका रहे तो मिलें हर बार अनिश्चितता में रहेंगी। फार्मूला तय हो जाए तो एफआरपी बढ़ने पर इथेनॉल का भाव खुद-ब-खुद समायोजित हो जाए। (द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026)
डेडिकेटेड प्लांटों पर ISMA की चेतावनी
टेंडर में दीर्घकालीन खरीद समझौतों वाले डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांटों को तरजीह दी गई है। ISMA का कहना है कि मौजूदा सत्र के लिए यह ठीक है, लेकिन आने वाले वर्षों में भी तरजीह बनी रही तो उद्योग की सेहत बिगड़ेगी। (बिज़नेस टुडे; लाइवमिंट, 19 अक्टूबर 2026)
बल्लानी की चेतावनी है कि गन्ना चक्रीय फसल है — अधिक उत्पादन वाले वर्षों में अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल में मोड़ना जरूरी है। डेडिकेटेड प्लांटों की तरजीह अगर मिलों की पहुंच सीमित करेगी, तो मिलों की स्थिति बिगड़ेगी और समय पर भुगतान की क्षमता घटेगी। (बिज़नेस टुडे; लाइवमिंट)
यूपी के लिए यह बात खास मायने रखती है, क्योंकि देश की 122 चीनी मिलों में से बड़ी संख्या यहीं चलती है।
आगे क्या: अभी मांग है, फैसला नहीं
62.23 रुपये की बढ़ोतरी अभी सिर्फ ISMA की मांग है — सरकार का फैसला आना बाकी है। किसान अपनी पर्ची और तौल का रिकॉर्ड संभालकर रखें, बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखें, और गन्ना आयुक्त की वेबसाइट पर भुगतान की स्थिति जांचते रहें। अगर मिलों की आय बढ़ती है तो बकाया भुगतान में तेजी की उम्मीद वाजिब होगी — लेकिन जब तक मांग पर मुहर नहीं लगती, अपने प्रयासों में ढील न बरतें।
मुख्य बातें
- ISMA ने सी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल का भाव 57.97 से बढ़ाकर 62.23 रुपये प्रति लीटर करने की मांग की है — करीब 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी। (बिज़नेस टुडे, 19 अक्टूबर 2026)
- संगठन चाहता है कि इथेनॉल का भाव एफआरपी से जोड़ा जाए, ताकि गन्ने का भाव बढ़ने पर इथेनॉल का भाव अपने आप समायोजित हो। (द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026)
- डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांटों को तरजीह देने पर ISMA ने चेतावनी दी है — इससे भविष्य में मिलों की कमाई घटेगी और किसानों के समय पर भुगतान पर असर पड़ेगा। (लाइवमिंट, 19 अक्टूबर 2026)
स्रोत: बिज़नेस टुडे (19 अक्टूबर 2026), द प्रिंट (19 अक्टूबर 2026), लाइवमिंट (19 अक्टूबर 2026)
