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गन्ना भाव: हुब्बल्ली आंदोलन वापस, 10 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक, UP भी शामिल

✍️ Aamir Raza · 🗓 30 Sep 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ना भाव: हुब्बल्ली आंदोलन वापस, 10 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक, UP भी शामिल

मंगलवार सुबह 11 बजे कर्नाटक के हुब्बल्ली का रानी चन्नम्मा सर्कल हजारों किसानों से भर गया। कर्नाटक के साथ महाराष्ट्र के किसान भी पहुंचे थे। हाथों में गन्ने की डंडियां, मांग एक ही। गन्ने का दाम बढ़ाया जाए। शाम होते-होते किसानों ने आंदोलन वापस ले लिया। वजह यह रही कि केंद्र ने 10 अक्टूबर तक दिल्ली में बड़ी बैठक का भरोसा दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश के किसान नेताओं को भी बुलाया गया है।

किसानों की मांगे क्या थीं

प्रदर्शन की अगुवाई कर्नाटक राज्य रैयत संघ और हसिरु सेने ने की। महाराष्ट्र से शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी भी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे।

किसानों ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का FRP 5,500 रुपये प्रति टन तय करने की मांग रखी। साथ में चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो करने की मांग भी उठी। किसानों का कहना है कि चीनी का MSP 2019 से स्थिर पड़ा है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने, इथेनॉल के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी और बकाया गन्ना भुगतान तुरंत निपटाने की मांग भी रखी गई।

समझौता कैसे हुआ

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी ने किसानों को वीडियो संदेश में प्रदर्शन वापस लेकर दिल्ली आने और अधिकारियों के साथ बात करने की अपील की। जोशी ने कहा कि सरकार किसानों की बात सुनने के लिए तैयार है और समस्याओं का सम्मान के साथ समाधान निकाला जाएगा।

दिनभर विधायक महेश तेंगिनकई और एमआर पाटिल, धारवाड़ की डिप्टी कमिश्नर स्नेहल आर और पुलिस कमिश्नर भूषण बोरासे किसान नेताओं से बातचीत करते रहे। जोशी खुद ऑनलाइन इस वार्ता में जुड़े। किसानों को बताया गया कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव के कारण आचार संहिता लागू है, इसलिए हुब्बल्ली में बैठक नहीं हो सकती।

इसके बाद दोनों विधायकों ने किसानों को मनाया कि 10 अक्टूबर को 30 किसानों का प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली ले जाया जाएगा और दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के साथ बातचीत होगी। यात्रा का पूरा खर्च विधायक उठाएंगे। इस भरोसे के बाद किसान नेहरू स्टेडियम की ओर बढ़े और फिर अपने-अपने घर लौट गए। करीब 8 घंटे चले इस प्रदर्शन के बाद शहर में जाम जैसे हालात सामान्य हुए।

एक अहम फैसला यह भी हुआ कि 15 अक्टूबर को चीनी मिलें खोलने का आदेश फिलहाल रोक दिया जाएगा। किसान नेता शशिकांत गुरुजी ने साफ कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज होगा, और बड़ी संख्या में किसान जोशी के हुब्बल्ली आवास के बाहर भी प्रदर्शन कर सकते हैं।

जोशी ने क्या दलील दी

मंत्री जोशी के मुताबिक केंद्र हर साल FRP बढ़ाता रहा है। उनका दावा है कि फरवरी 2026 में किसान नेताओं से मुलाकात के बाद मई 2026 में FRP बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया था। जोशी ने कहा कि FRP का फैसला कीमत निर्धारण समिति और राज्य के गन्ना आयुक्त की सिफारिशों को देखकर होता है, और इस साल भी किसानों के लिए उचित मूल्य तय किया जाएगा।

UP के किसानों पर इसका असर

यहां UP का सीधा कनेक्शन है। पहला, दिल्ली जाने वाले 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कर्नाटक और महाराष्ट्र के साथ उत्तर प्रदेश के किसान नेता भी शामिल होंगे। दूसरा, FRP पूरे देश का केंद्रीय मूल्य है। FRP बढ़ा तो राज्य SAP तय करते समय उसे ध्यान में रखते हैं। यानी केंद्र में जो फैसला होगा, उसका असर UP के पेराई सत्र पर भी पड़ेगा।

एक बात साफ कर दें। 2025-26 सीजन में UP का SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) था। पेराई सत्र 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है। FRP फिलहाल 365 रुपये प्रति क्विंटल है और UP के किसान उससे ऊपर SAP पाते रहे हैं।

UP में भी दाम को लेकर दबाव बढ़ रहा है। 22 सितंबर को बिजनौर में किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह के नेतृत्व में हजारों किसानों की महापंचायत हुई थी, जहां दाम बढ़ाने, मिलें जल्दी चलाने और बकाया पर ब्याज की मांग उठी। पश्चिमी UP की मिलें इस बार करीब 10 दिन पहले, यानी 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी UP में हैं।

आगे क्या देखें

अब नजर 10 अक्टूबर की दिल्ली बैठक पर रहेगी। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा। UP के किसानों के लिए यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि पेराई सत्र सिर पर है और मिलों के खुलने से पहले दाम का फैसला किसान की जेब तय करेगा।

किसान अभी यह काम जरूर कर लें। अपने गन्ना सर्वे का रिकॉर्ड जांच लें, रकबा और किस्म की जानकारी सही कराएं और बैंक खाता सक्रिय रखकर पहचान पत्र से लिंक कराएं। भुगतान में देरी की बड़ी वजह अक्सर यही छोटी गलतियां होती हैं। किसी समस्या पर विभाग का टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 चौबीसों घंटे उपलब्ध है।

मुख्य बातें

  • हुब्बल्ली में 29 सितंबर को हुआ गन्ना किसानों का 8 घंटे का प्रदर्शन वापस; 10 अक्टूबर तक दिल्ली में किसान प्रतिनिधिमंडल की बैठक का भरोसा।
  • किसानों की मांग: FRP 5,500 रुपये प्रति टन और चीनी MSP 31 से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो।
  • दिल्ली बैठक में UP के किसान नेता भी शामिल होंगे; FRP बढ़ने का असर UP के आगामी SAP पर पड़ेगा।

स्रोत: The New Indian Express (30 सितंबर 2026), The Hindu, Deccan Herald

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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