हरियाणा में गन्ना यंत्रों पर अनुदान, आवेदन की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर

हरियाणा के गन्ना किसानों के पास अब सिर्फ पांच दिन बचे हैं। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने गन्ना खेती के यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2026 तय की है। जो किसान इस सीजन में नया यंत्र खरीदने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह तारीख ही सबसे बड़ा फैसला है। देर हुई तो मौका अगले चक्र तक टल जाएगा।
एक बात शुरू में ही साफ कर देना जरूरी है। यह योजना हरियाणा के किसानों के लिए है। उत्तर प्रदेश का किसान इस पोर्टल पर आवेदन नहीं कर सकता। फिर भी यह खबर UP के किसान के लिए बेकार नहीं है। वजह सीधी है। गन्ने की खेती में मजदूर की कमी, कटाई का खर्च और यंत्रों की जरूरत दोनों राज्यों में एक जैसी है। पड़ोसी राज्य में क्या मिल रहा है, यह जानकर UP का किसान अपने यहां भी उसी तरह की मांग मजबूत आवाज में उठा सकता है।
योजना क्या है और कौन चला रहा है
यह पहल हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की 2026-27 की यंत्रीकरण योजना के तहत चल रही है। इसे गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन से जोड़ा गया है। मकसद गन्ने की खेती को आधुनिक यंत्रों से आसान और ज्यादा उत्पादक बनाना है। विभाग ने किसानों से कहा है कि वे आखिरी दिन का इंतजार न करें और समय रहते ऑनलाइन आवेदन कर दें।
आवेदन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट agriharyana.gov.in के जरिए करना है। आवेदन से पहले पोर्टल पर योजना के ताजा दिशा-निर्देश और पात्रता शर्तें जरूर पढ़ लेनी चाहिए, क्योंकि यंत्रवार शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं।
किन यंत्रों पर अनुदान मिलेगा
विभाग की सूची में गन्ने की खेती के लगभग हर चरण का यंत्र शामिल है। बीज उपचार के लिए 30 से 120 लीटर क्षमता वाले पावर चालित सेट ट्रीटमेंट यंत्र, 5 एचपी से कम और 7.5 बीएचपी तक के पावर वीडर, और पेड़ी फसल की देखभाल के लिए रैटून मैनेजर इस सूची में हैं।
खेत की तैयारी के लिए वाइड-रो रिजर और रिजर, चार फुट वाले रोटावेटर, सब-सॉइलर और चिजलर भी शामिल किए गए हैं। छिड़काव के लिए ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर, और कटाई व बुवाई से जुड़े काम के लिए गन्ना कटर, स्ट्रिपर, प्लांटर और मिनी ट्रैक्टर भी योजना में रखे गए हैं। मतलब यह कि बुवाई से लेकर कटाई तक के काम में किसान को यंत्र का सहारा मिल सके, यही इस सूची की सोच है।
अनुदान की रकम पर साफ बात
यहां एक ईमानदार बात जान लेना जरूरी है। ताजा सूचना में हर यंत्र पर अनुदान की रकम अलग से नहीं बताई गई है। न ही पात्रता की पूरी शर्तें उस सूचना में विस्तार से दी गई हैं। इसलिए किसी यंत्र पर कितने प्रतिशत या कितने रुपये की छूट मिलेगी, इसका दावा अभी नहीं किया जा सकता। सही रकम और शर्त पोर्टल पर योजना के दिशा-निर्देशों में ही देखनी होगी।
इसी मिशन का एक और लाभ, अलग से समझें
गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन के तहत एक दूसरा लाभ भी सामने आया है, जिसे यंत्र अनुदान से अलग समझना चाहिए। चार फुट की चौड़ी कतार में गन्ना लगाने वाले किसानों को मिलने वाला प्रोत्साहन 3,000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति एकड़ कर दिया गया है। सिंगल-बड विधि से बुवाई पर भी इतना ही प्रोत्साहन तय हुआ है।
रिपोर्टों के अनुसार इस प्रोत्साहन के लिए पोर्टल पर 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। खेत के भौतिक सत्यापन के बाद रकम फरवरी 2027 के अंत तक जारी होने की बात कही गई है।
मजदूर की कमी ही असली वजह है
गन्ने की खेती में सबसे ज्यादा मजदूर बुवाई के बाद कटाई और छिलाई में लगता है। हाल के वर्षों में मजदूर मिलना मुश्किल हुआ है और मजदूरी बढ़ी है। इसीलिए विशेषज्ञ लंबे समय से कह रहे हैं कि हार्वेस्टर और दूसरे यंत्रों से किसान की निर्भरता घटेगी और काम समय पर होगा। हरियाणा में 21 अक्टूबर 2026 को हुई एक किसान गोष्ठी में भी यही बात उठी थी कि आधुनिक यंत्रों से खेती आसान होगी और श्रम संकट से राहत मिलेगी।
UP का किसान अब क्या करे
पहला काम यह है कि अपने जिले के कृषि अधिकारी से पूछा जाए कि UP में इस समय खेती के यंत्रों पर कौन सी योजना खुली है और उसकी आखिरी तारीख क्या है। हरियाणा की खबर को आधार बनाकर यह सवाल पूछना आसान हो जाता है कि पड़ोसी राज्य में गन्ना यंत्रों पर मदद मिल रही है तो यहां क्या व्यवस्था है। खरीद से पहले यंत्र की जरूरत, सर्विस व्यवस्था और स्पेयर पार्ट की उपलब्धता परख लें, और बिल-कागज संभालकर रखें।
मुख्य बातें
- हरियाणा में गन्ना यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2026 है, आवेदन agriharyana.gov.in पर ऑनलाइन होगा।
- यंत्रों की सूची में सेट ट्रीटमेंट यंत्र, पावर वीडर, रैटून मैनेजर, रोटावेटर, स्प्रेयर, कटर, प्लांटर और मिनी ट्रैक्टर शामिल हैं।
- हर यंत्र पर अनुदान की रकम ताजा सूचना में नहीं बताई गई है, इसलिए सही रकम पोर्टल के दिशा-निर्देशों से ही देखें। यह योजना हरियाणा के किसानों के लिए है, UP के किसान अपने जिले के कृषि विभाग से अपने यहां की योजना पूछें।
स्रोत: National Times Media, ChiniMandi, 5 Dariya News
