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655 गांवों का बकाया शून्य: हरदोई की 4 मिलों ने भुगतान निपटाया, 28 अक्टूबर से पेराई

✍️ Aamir Raza · 🗓 10 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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655 गांवों का बकाया शून्य: हरदोई की 4 मिलों ने भुगतान निपटाया, 28 अक्टूबर से पेराई

गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ी खबर कभी-कभी कोई नया दाम नहीं, बल्कि एक लाइन होती है: पुराना बकाया शून्य। हरदोई के किसानों के लिए यही लाइन इस अक्टूबर में आई है। जिले की चारों निजी चीनी मिलों ने पिछले पेराई सत्र का शत-प्रतिशत गन्ना भुगतान पूरा कर दिया है। ईटीवी भारत की 7 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार जिला गन्ना अधिकारी निधि गुप्ता ने इसकी पुष्टि की है और आगामी सत्र में भी 14 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आज भी मिलों के बकाए पर आरसी और धरने की खबरें आती हैं। ऐसे माहौल में हरदोई का हिसाब खास बन जाता है। गन्ना विकास विभाग के बयान के अनुसार पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश भर की 102 चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान किया था और कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किसानों के खातों में पहुंचाया गया था (लाइव हिंदुस्तान, सितंबर 2026)।

चारों मिलों का हिसाब: कुल 655 आरक्षित गांव

  • हरियावां चीनी मिल (डीसीएम श्रीराम समूह): बावन और हरियावां क्षेत्र के 180 आरक्षित गांवों का भुगतान पूरा।
  • लोनी चीनी मिल (डीसीएम श्रीराम समूह): शाहबाद और टोडरपुर क्षेत्र के 160 आरक्षित गांवों का बकाया क्लियर।
  • रूपापुर चीनी मिल (उत्तम चीनी मिल समूह): पाली, सवायजपुर और भरखनी क्षेत्र के 195 आरक्षित गांवों का भुगतान निपटाया।
  • बावन चीनी मिल: सदर क्षेत्र के 120 आरक्षित गांवों का शत-प्रतिशत भुगतान।

चारों का जोड़ 655 होता है। यानी जिले के 655 आरक्षित गांवों में किसी भी किसान का पिछले सत्र का गन्ना मूल्य अब बकाया नहीं रहा। पैसा सीधे डीबीटी के जरिए किसानों के खातों में पहुंच रहा है।

यह कैसे संभव हुआ: एस्क्रो खाते का 85 प्रतिशत नियम

गन्ना विभाग के निर्देशों के अनुसार चीनी और शीरे की बिक्री से मिलने वाली राशि का 85 प्रतिशत हिस्सा एस्क्रो बैंक खाते में टैग रखा जाता है। यह पैसा मिल अपने दूसरे खर्चों में नहीं लगा सकती। इसी टैग की गई राशि से डीबीटी के जरिए सीधे किसानों के खातों में भुगतान भेजा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार हरदोई का शत-प्रतिशत भुगतान इसी पारदर्शी व्यवस्था का नतीजा बताया गया है।

नियमानुसार गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए। 14 दिन से अधिक विलंब पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान नियमों में है, हालांकि जमीन पर यह ब्याज किसानों को मिलता नहीं दिखता। किसान नेता रेखा दीक्षित का कहना है कि भुगतान भले ही समय पर मिलने लगा हो, लेकिन बढ़ती लागत को देखते हुए सरकार को गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए। पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

28 अक्टूबर से 5 नवंबर: पेराई का कैलेंडर और डिजिटल कांटे की जांच

रिपोर्ट के अनुसार हरदोई की चीनी मिलें 28 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 के बीच नया पेराई सत्र शुरू करने की तैयारी में हैं। CaneUP पोर्टल के जरिए सट्टा-सर्वे का काम पूरा हो चुका है। पेराई सत्र शुरू होने से पहले सभी बाह्य क्रय केंद्रों के डिजिटल कांटों की जांच अनिवार्य कर दी गई है।

यह निर्देश छोटा नहीं है। हर सत्र में तौल में कटौती का आरोप उठता है और किसान घटतौली की शिकायतें दर्ज कराते हैं। सत्र शुरू होने से पहले ही कांटों की जांच का मतलब है कि प्रशासन इस बार तौल में पारदर्शिता पर पहले से सतर्क है। किसानों को सलाह है कि क्रय केंद्र पर तौल के समय कांटे की रीडिंग खुद देखें और पर्ची पर दर्ज वजन से मिलान करें।

पेराई से पहले किसानों की 4 जांचें

सट्टा-सर्वे जांच लें: CaneUP पोर्टल पर अपना सट्टा और सर्वे का विवरण अभी से जांच लें। नाम, रकबा और बैंक खाते का विवरण सही न हो तो पर्ची और भुगतान दोनों में दिक्कत आती है।

बैंक खाता और आधार सक्रिय रखें: भुगतान सीधे डीबीटी से आता है। खाता आधार से जुड़ा और सक्रिय होना जरूरी है। पिछले सत्र में कई किसानों का पैसा बैंक खाते की गड़बड़ी से अटका था।

पर्ची की योजना बनाएं: पेराई शुरू होने के साथ पर्ची वितरण शुरू होगा। पेड़ी गन्ने की कटाई और ढुलाई का समय पर्ची से जोड़कर रखें ताकि गन्ना खेत में सूखकर वजन न खोए।

कांटे पर नजर रखें: क्रय केंद्र पर तौल के समय मौजूद रहें। डिजिटल कांटे की रीडिंग पर्ची पर दर्ज वजन से मिलनी चाहिए। अंतर लगे तो तुरंत गन्ना समिति या जिला गन्ना कार्यालय को सूचित करें।

पश्चिमी यूपी की मिलें अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में ही पेराई शुरू करने की दिशा में बढ़ रही हैं (टाइम्स ऑफ इंडिया, 28 सितंबर 2026), इसलिए हरदोई के किसानों के पास तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं है। पिछले सत्र का बकाया शून्य होना भरोसे की नींव है, लेकिन नया सत्र उतना ही साफ रहे, इसके लिए किसान को भी अपनी तरफ से सतर्क रहना होगा।

मुख्य बातें

  • हरदोई की 4 चीनी मिलों ने 655 आरक्षित गांवों का पिछला गन्ना भुगतान पूरा किया, बकाया शून्य।
  • 28 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 के बीच नया पेराई सत्र शुरू होगा; बाह्य क्रय केंद्रों के डिजिटल कांटों की जांच अनिवार्य।
  • एस्क्रो खाते के 85 प्रतिशत नियम से डीबीटी के जरिए सीधा भुगतान; 14 दिन के भीतर भुगतान के कड़े निर्देश।

स्रोत: ईटीवी भारत (7 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (सितंबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया (28 सितंबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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