सिंभावली में तीन संगठनों की संयुक्त पंचायत: 14 दिन में नकद भुगतान, वरना चीनी मिल में ताला

नया पेराई सत्र शुरू होने में अब गिने-चुने हफ्ते बचे हैं, लेकिन हापुड़ के हजारों गन्ना किसानों का पिछला हिसाब अभी तक अटका है। पर्ची कटे महीनों बीत गए, पर बकाया गन्ना मूल्य का पूरा पैसा खातों में नहीं पहुंचा। इसी गुस्से ने तीन अलग-अलग किसान संगठनों को एक मंच पर ला खड़ा किया है। सिंभावली की संयुक्त पंचायत में किसानों ने दो टूक कहा: बकाया तुरंत चुकाओ, और नए सत्र में 14 दिन के अंदर नकद भुगतान दो, वरना मिल में ताला जड़ने से हमें कोई नहीं रोक पाएगा।
सिंभावली गन्ना समिति में तीन संगठन एक मंच पर
हापुड़ जिले के सिंभावली स्थित गन्ना समिति कार्यालय पर हुई इस संयुक्त पंचायत में किसान मजदूर संगठन (पूरन), महात्मा टिकैत गुट और वीएम सिंह संगठन के नेता शामिल हुए। अमूमन अलग-अलग बैनर तले काम करने वाले ये संगठन इस बार एक ही मांग को लेकर एकजुट दिखे।
पंचायत के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर चौधरी ने समिति सचिव राकेश पटेल से सीधी वार्ता की। किसानों का कहना था कि बकाया भुगतान की समस्या हर साल दोहराई जाती है। समिति और मिल प्रशासन से नाराजगी जताते हुए नेताओं ने कहा कि इस बार आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।
गन्ना आयुक्त की प्रोसीडिंग में दर्ज होंगी दो मांगें
पंचायत में किसानों ने दो मांगें रखीं, जिन्हें गन्ना आयुक्त को भेजी जाने वाली वार्षिक प्रोसीडिंग रिपोर्ट में दर्ज कराने की बात कही गई।
पहली मांग सीधी है: पिछले पेराई सत्र का संपूर्ण बकाया गन्ना मूल्य तुरंत चुकाया जाए। किसानों का तर्क है कि नया सत्र शुरू होने से पहले पुराना हिसाब साफ होना ही चाहिए।
दूसरी मांग नए पेराई सत्र की भुगतान व्यवस्था को लेकर है। किसानों ने कहा कि नए सत्र में गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर नकद भुगतान हो। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो किसान मिल को गन्ने की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर देंगे।
समिति सचिव राकेश पटेल ने आश्वासन दिया कि इन दोनों मांगों को वार्षिक प्रोसीडिंग रिपोर्ट में शामिल करके उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
चेयरमैन पर लगे दोहरे रवैये के आरोप
पंचायत का सबसे तीखा मोड़ तब आया, जब जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गिल ने सिंभावली गन्ना समिति के चेयरमैन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चेयरमैन खुद अपना गन्ना दूसरी मिल को नकद में बेच रहे हैं, जबकि साधारण किसानों पर बकाया दबाकर बैठी सिंभावली मिल को ही गन्ना देने का दबाव बनाया जा रहा है। गिल के मुताबिक किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
इस आरोप पर समिति की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। किसान नेताओं का कहना है कि यह दोहरा व्यवहार बर्दाश्त नहीं होगा।
तालाबंदी की चेतावनी: “अब की बार व्यवस्था सुधरनी चाहिए”
पंचायत में किसान नेताओं ने प्रशासन को सीधी चेतावनी दी। उनका कहना है कि अगर इस बार भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुई, तो संयुक्त किसान मोर्चा हापुड़ और विभिन्न किसान संगठन मिलकर चीनी मिल की तालाबंदी करने के लिए बाध्य होंगे।
यह चेतावनी हवा में नहीं दी गई। हापुड़ में बकाया भुगतान का मुद्दा हफ्तों से गरमाया है, और किसानों का धैर्य टूटता दिख रहा है।
हापुड़ में पहले से जारी है यही दबाव
सिंभावली की यह पंचायत अचानक नहीं हुई। इससे पहले हापुड़ सहकारी गन्ना विकास समिति की वार्षिक निकाय बैठक में भी किसानों ने बकाया भुगतान को लेकर तीखी बहस की थी। उस बैठक में आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग सर्वसम्मति से उठाई गई थी। साथ ही सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिलों को पिछले सत्र का बकाया 15 प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने का निर्देश दिया गया था।
मवाना में भी किसान इसी ब्याज के लिए धरना दे चुके हैं। यानी पश्चिमी यूपी के कई जिलों में बकाया और ब्याज को लेकर एक जैसा आंदोलनात्मक माहौल बनता जा रहा है।
एक बात साफ कर दें: 500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव अभी घोषित नहीं हुआ है। यह हापुड़ गन्ना समिति की मांग है। पेराई सत्र 2026-27 के गन्ना मूल्य (एसएपी) की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
14 दिन का नियम किसान के लिए क्यों जरूरी है
गन्ना (नियंत्रण) आदेश के तहत चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करना होता है। देरी होने पर किसान नियमानुसार ब्याज के हकदार होते हैं। सिंभावली की पंचायत में इसी नियम को आधार बनाकर 14 दिन में नकद भुगतान की मांग उठाई गई है।
किसानों के लिए इस समय सबसे जरूरी काम अपने कागज संभालकर रखना है। अपनी गन्ना पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान के रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। अगर मिल ने समय पर भुगतान नहीं किया है, तो अपनी समिति से बकाए पर बनने वाले ब्याज का लिखित ब्यौरा जरूर मांगें।
मुख्य बातें
- हापुड़ के सिंभावली गन्ना समिति में तीन किसान संगठनों की संयुक्त पंचायत; पिछले सत्र का बकाया तुरंत चुकाने की मांग गन्ना आयुक्त की प्रोसीडिंग में दर्ज होगी।
- नए पेराई सत्र में गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर नकद भुगतान न होने पर किसान मिल को गन्ना आपूर्ति बंद करेंगे; व्यवस्था न सुधरने पर मिल की तालाबंदी की चेतावनी।
- समिति चेयरमैन पर दोहरे रवैये का आरोप: खुद दूसरी मिल को नकद में गन्ना बेचने का दावा; समिति की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं।
स्रोत: खबरवाला24, रॉयल बुलेटिन (अक्टूबर 2026)
