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हापुड़: गन्ना ₹500 मांगा, मुआवजा-सस्ता बीज भी — किसानों ने कलेक्ट्रेट घेरा

✍️ Aamir Raza · 🗓 18 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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हापुड़: गन्ना ₹500 मांगा, मुआवजा-सस्ता बीज भी — किसानों ने कलेक्ट्रेट घेरा

शुक्रवार की सुबह हापुड़ कलेक्ट्रेट के बाहर का नजारा कुछ और ही था। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सवार सैकड़ों किसान इकट्ठा हुए, पहले पंचायत हुई, फिर नारेबाजी के साथ धरना शुरू हो गया। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रदेशव्यापी आह्वान पर जुटे ये किसान सिर्फ गन्ने के भाव की मांग लेकर नहीं आए थे। उनके ज्ञापन में छह मांगें थीं, जिनमें फसल नुकसान का मुआवजा, सस्ता आलू बीज और समितियों पर खाद की उपलब्धता भी शामिल है।

धरने के बाद किसानों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन के जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर के नेतृत्व में यह प्रदर्शन हुआ, जबकि पंचायत की अध्यक्षता ओमपाल सिंह सरदार ने की। धरने में मोनू त्यागी, जितेंद्र नागर, राधेलाल त्यागी, दुर्गेश तोमर और सत्या गुर्जर समेत संगठन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

भाव और भुगतान सबसे ऊपर

ज्ञापन की पहली और सबसे बड़ी मांग गन्ने के मूल्य को लेकर है। किसानों ने आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। साथ में यह मांग भी उठी कि गन्ने का भुगतान किसानों को समय से मिले, ताकि पिछली बकाया जैसी स्थिति दोबारा न बने।

यह मांग ऐसे वक्त में उठी है जब 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में सरकार ने अगेती प्रजाति के लिए 400 रुपये और सामान्य प्रजाति के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल एसएपी तय किया था। किसान संगठनों का कहना है कि लागत के हिसाब से यह भाव कम पड़ता है, इसलिए इस बार 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की मांग उठ रही है। हापुड़ से पहले कई जिलों में इसी तरह के प्रदर्शन हो चुके हैं।

बारिश ने बिगाड़ा खेल, मुआवजे की मांग

दूसरी बड़ी मांग बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को लेकर है। ज्ञापन में कहा गया है कि हाल की बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से धान, उड़द, मूंग समेत कई फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों ने गांववार सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा देने की मांग की है।

एक अहम बिंदु यह भी है कि ठेका और बटाई पर खेती करने वाले किसानों को भी मुआवजा मिलना चाहिए। ऐसे किसानों के नाम जमीन के कागजों में दर्ज नहीं होते, इसलिए वे मुआवजे से वंचित रह जाते हैं। किसानों ने मांग की है कि इनके लिए संयुक्त सत्यापन की विशेष व्यवस्था बनाई जाए, ताकि असली खेती करने वाला कोई किसान मदद से बाहर न रह जाए।

आलू किसानों की दो मांगें, खाद की एक

हापुड़ के प्रदर्शन में आलू किसानों की समस्याएं भी जोर से उठीं। पहली मांग यह है कि आलू भंडारण (कोल्ड स्टोर) शुल्क में सरकार की ओर से दी जा रही सहायता का लाभ उन पात्र किसानों को भी दिया जाए, जिन्होंने शासनादेश जारी होने से पहले ही अपना आलू कोल्ड स्टोर से निकाल लिया था। दूसरी मांग आलू बीज की कीमत को लेकर है। उद्यान विभाग से मिलने वाला आलू बीज महंगा है, इसलिए किसानों ने मांग की है कि इसकी कीमत अधिकतम 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक सीमित रखी जाए।

खाद को लेकर भी किसानों ने साफ मांग रखी। समितियों और विक्रय केंद्रों पर यूरिया और डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि बुवाई के समय किसानों को खाद के लिए भटकना न पड़े। साथ में कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग भी की गई।

किसान नेताओं ने क्या कहा

जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना केवल एक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उनके मुताबिक प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवार इससे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। उनका कहना है कि डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन गन्ने के मूल्य में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि चीनी के बढ़ते बाजार मूल्य के साथ एथेनॉल, शीरा और अन्य उप-उत्पादों से होने वाली आय को ध्यान में रखते हुए गन्ने के मूल्य का निष्पक्ष निर्धारण होना चाहिए। पवन हूण गुर्जर ने चेतावनी दी कि अगर मांगों पर शीघ्र प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

मुख्य बातें

  • हापुड़ में भाकियू (अराजनैतिक) ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पर धरना दिया; छह मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा गया।
  • गन्ने का एसएपी 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, बेमौसम बारिश से हुए नुकसान का गांववार सर्वे कराकर मुआवजा देने, आलू बीज की कीमत अधिकतम 1500 रुपये प्रति क्विंटल रखने और समितियों पर यूरिया-डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता की मांग उठी।
  • पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है; किसान संगठन ने मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

स्रोत: अमर उजाला (17 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (17 अक्टूबर 2026), ट्रैक्टरजंक्शन (गन्ना मूल्य 2025-26)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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