हापुड़ में किसानों की हुंकार: गन्ना भाव ₹600 तय करो, नहीं तो गांव-गांव फैलेगा आंदोलन

पेराई सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन हापुड़ के गन्ना किसानों का सबसे बड़ा सवाल अब भी हवा में लटका है। इस बार गन्ने का भाव क्या मिलेगा? नया चीनी सत्र 1 अक्टूबर से शुरू हो गया है, पर उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए नया राज्य परामर्श मूल्य (SAP) अभी घोषित नहीं किया। इसी अनिश्चितता के बीच 23 सितंबर को हापुड़ जिला कलेक्ट्रेट परिसर किसानों के नारों से गूंज उठा। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी वहां जमा हुए और गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग रखी। प्रदर्शन के आखिर में किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो यही आंदोलन गांव-गांव फैलकर “किसान क्रांति” का रूप ले लेगा।
कलेक्ट्रेट परिसर में क्या हुआ
बुधवार, 23 सितंबर को भाकियू (अराजनैतिक) के आह्वान पर हापुड़ जिला कलेक्ट्रेट परिसर में किसानों की भारी भीड़ जुटी। नारेबाजी के बीच किसान नेताओं ने कहा कि भाव और भुगतान, दोनों मोर्चों पर किसान थक चुका है। प्रदर्शनकारियों ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग दोहराई और चीनी मिलों से बकाया गन्ना भुगतान तय समय सीमा के भीतर कराने की बात कही। नामांतरण यानी दाखिल-खारिज 35 दिनों में पूरा करने, भूमि अभिलेखों की गलतियां ठीक करने और वाहनों से कथित अवैध वसूली पर रोक लगाकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी उठी।
₹600 की मांग: फासला कितना बड़ा है
किसानों की ₹600 की मांग को मौजूदा दरों के तराजू पर तौलना जरूरी है। केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत की बुनियादी रिकवरी पर लागू होता है और 1 अक्टूबर से प्रभावी है। वहीं 2025-26 में उत्तर प्रदेश का घोषित SAP अगेती किस्म के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था। किसानों का तर्क है कि FRP तो सिर्फ न्यूनतम मूल्य है, यूपी में मिलें हमेशा SAP के हिसाब से ज्यादा भाव देती रही हैं।
इस मांग के पीछे लागत का दबाव भी है। खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और मजदूरी, खेती की हर मद का दाम चढ़ा है। किसान नेताओं ने कलेक्ट्रेट में कहा कि आज की लागत पर गन्ने की खेती को घाटे से बचाने के लिए ₹600 प्रति क्विंटल से कम पर बात नहीं बनेगी। मौजूदा दरों से हिसाब लगाएं तो मांग और हकीकत के बीच करीब ₹200 प्रति क्विंटल का फासला है। 2026-27 का यूपी SAP अभी घोषित नहीं हुआ है, और इसी फैसले पर पूरे पश्चिम यूपी की नजर टिकी है।
भुगतान की देरी: किसानों की असली जेब कट रही है
हापुड़ में भुगतान का मुद्दा नया नहीं है। भाकियू नेताओं ने जिला प्रशासन से कहा कि बकाया गन्ना मूल्य तय समय सीमा के भीतर दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसान बताते हैं कि गन्ना मिल को चले जाता है, पर पैसा महीनों तक नहीं आता। इसी देरी से घर का खर्च और अगली फसल की बुवाई, दोनों पर असर पड़ता है।
राजस्व विभाग की शिकायतें भी पुरजोर तरीके से उठीं। खतौनी में हिस्सेदारी की गलतियां सुधरवाने के लिए किसानों को महीनों तहसील के चक्कर काटने पड़ते हैं, और जब तक कागज ठीक नहीं होता, तब तक बैंक ऋण, मुआवजा और योजनाओं का लाभ, तीनों अटक जाते हैं। इसलिए 35 दिन में नामांतरण की मांग किसान अपनी जेब से जोड़कर देखते हैं।
“किसान क्रांति” की चेतावनी का मतलब
कलेक्ट्रेट में जमा किसानों के तेवर देखकर साफ था कि यह सिर्फ ज्ञापन देने वाला धरना नहीं था। किसान नेताओं ने कहा कि मांगें जल्दी पूरी नहीं हुईं तो संगठन गांव-गांव जनसंपर्क अभियान शुरू करेगा। चेतावनी में “किसान क्रांति” जैसा शब्द इस्तेमाल हुआ, और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन पर डाल दी गई।
यह गुस्सा सिर्फ हापुड़ तक सीमित नहीं दिख रहा। करीब तीन हफ्ते पहले मुजफ्फरनगर की महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आने वाले पेराई सत्र के लिए ₹500 प्रति क्विंटल भाव की मांग रखते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी। अलग-अलग किसान मंच ₹500 से ₹600 तक की मांग उठा रहे हैं, और इस बार किसानों ने सत्र शुरू होने से पहले ही दबाव बना दिया है।
अब किसान के काम की बात
जो किसान अपनी जेब का हिसाब लगा रहे हैं, उनके लिए तीन काम अभी सबसे जरूरी हैं। पहला, SAP 2026-27 की घोषणा पर नजर रखें, क्योंकि इस सत्र में आपको वही दर मिलेगी जो सरकार घोषित करेगी। ₹600 अभी सिर्फ मांग है, घोषणा नहीं। दूसरा, पर्ची और भुगतान की स्थिति ई-गन्ना ऐप या गन्ना समिति पर नियमित जांचते रहें। तीसरा, बकाया अटका हो तो समिति में लिखित शिकायत दर्ज कराएं और गन्ना विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
मुख्य बातें
- 23 सितंबर को हापुड़ कलेक्ट्रेट में भाकियू (अराजनैतिक) के किसानों ने गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने और बकाया भुगतान समय पर कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
- प्रदर्शन में 35 दिन में नामांतरण यानी दाखिल-खारिज, खतौनी की गलतियां ठीक करने और वाहनों से कथित अवैध वसूली रोकने की मांग भी उठी; मांगें न मानीं तो “किसान क्रांति” जैसा बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई।
- केंद्र ने 2026-27 का FRP ₹365 प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी, 1 अक्टूबर से लागू) तय किया है, जबकि 2025-26 में यूपी का SAP ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था; 2026-27 का नया SAP अभी घोषित नहीं हुआ है।
स्रोत: चिनीमंडी (हापुड़ प्रदर्शन, सितंबर 2026), खबरवाला24 (हापुड़, सितंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (FRP 2026-27, 1 अक्टूबर 2026), इकोनॉमिक टाइम्स (राकेश टिकैत, सितंबर 2026)
