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160 करोड़ बकाया के बाद हापुड़ के 10 गांवों की नई मांग: इस मिल से हटाओ, उस मिल से जोड़ो

✍️ Aamir Raza · 🗓 25 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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160 करोड़ बकाया के बाद हापुड़ के 10 गांवों की नई मांग: इस मिल से हटाओ, उस मिल से जोड़ो

दत्तियाना के एक किसान के खेत में गन्ना खड़ा है और हाथ में पर्ची भी है। फिर भी उसके मन में एक ही सवाल घूम रहा है। इस बार गन्ना किस मिल को जाएगा, और उसका पैसा कब मिलेगा। हापुड़ के दस गांवों के किसानों का यही सवाल अब एक औपचारिक मांग बन चुका है। इन गांवों के किसानों ने सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिल से अपने गन्ना क्रय केंद्र हटाकर दूसरी मिलों से जोड़ने के प्रस्ताव गन्ना समितियों को सौंप दिए हैं।

यह मांग किसी एक दिन की नाराजगी नहीं है। इसके पीछे भुगतान का लंबा हिसाब है। खबर के अनुसार इन दोनों मिलों पर किसानों का करीब 160 करोड़ रुपये का भुगतान अब भी बकाया है, और मिल कर्मचारियों का करोड़ों रुपये का वेतन भी अटका हुआ है।

दस गांवों ने क्या मांगा है

गांवों की ओर से दिए गए प्रस्तावों में कहा गया है कि उनके गांवों में दूसरी मिलों के क्रय केंद्र स्थापित किए जाएं। प्रस्ताव समिति सचिवों तक पहुंच चुके हैं, जो इन्हें तैयार करके मुख्य सचिव के यहां अपील करेंगे।

शनिवार को किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल एडीएम संदीप कुमार से भी मिला। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष पवन हूण के नेतृत्व में गए इस प्रतिनिधिमंडल ने दत्तियाना समेत अन्य गांवों के केंद्र दूसरी मिलों से जोड़ने की मांग रखी। अब सोमवार, 26 अक्टूबर को किसान गन्ना आयुक्त से मिलेंगे।

जिला गन्ना अधिकारी अंगद सिंह ने पुष्टि की है कि दस गांवों से प्रस्ताव मिले हैं और समिति सचिव इन्हें तैयार कर रहे हैं।

7.5 किलोमीटर का नियम क्यों आड़े आ रहा है

इस पूरी लड़ाई में सबसे बड़ा पेंच एक नियम है। गन्ना विभाग के अनुसार ये गांव सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल के साढ़े सात किलोमीटर के दायरे में आते हैं। पहले भी जब इन गांवों के प्रस्ताव गन्ना आयुक्त के सामने रखे गए थे, तो इसी दायरे का हवाला देकर उन्हें रद्द कर दिया गया था।

किसानों का तर्क है कि दूरी का नियम किसानों के हित से ऊपर नहीं हो सकता। अगर नजदीकी मिल भुगतान ही नहीं कर रही, तो किसान को बेहतर भुगतान वाली मिल से जोड़ना ही सही रास्ता है। इसीलिए इस बार प्रस्ताव सीधे मुख्य सचिव के यहां अपील के रास्ते भेजे जा रहे हैं।

आंकड़ों में समझिए पूरा मामला

गन्ना भुगतान में लगातार लापरवाही पर गन्ना आयुक्त के आदेश से सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से पहले ही 184 गन्ना खरीद केंद्र हटा लिए गए हैं। ये केंद्र मेरठ, गाजियाबाद और बुलंदशहर की नंगलामल, चंदनपुर, साबितगढ़, मवाना, असमौली, चॉगीपुर, अनामिका, वीनस, अगवानपुर, टिकौला और दौराला मिल को दे दिए गए हैं। इसके बाद सिंभावली पर सिर्फ छह और ब्रजनाथपुर पर महज चार गांव रह गए हैं, जिससे पेराई सत्र पर संकट गहरा गया है।

अब जिन केंद्रों को बदलने की मांग है, उनमें सिंभावली से जुड़े गंदूनंगला/नगलाबढ़, दत्तियाना (288 हेक्टेयर, 2.44 लाख क्विंटल), दरियापुर/कुराना, ढाना (366 हेक्टेयर, 3.10 लाख क्विंटल), खैय्या और माधापुर प्रथम शामिल हैं। ब्रजनाथपुर से जुड़े केंद्रों में मिल द्वार, भटैल, हसनपुर कांकर, मीरपुर कलां और काठीखेड़ा हैं। अकेला मिल द्वार केंद्र ही 3217 हेक्टेयर और 27.26 लाख क्विंटल गन्ने से जुड़ा है।

सितंबर की बैठक में क्या तय हुआ था

इस मांग की जमीन सितंबर में ही तैयार हो गई थी। हापुड़ गन्ना समिति की वार्षिक बैठक में किसानों ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग उठाई थी। उसी बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित हुआ था कि देर से भुगतान करने वाली मिलों के केंद्र काटकर 14 दिन में भुगतान करने वाली मिलों को दे दिए जाएं, और सिंभावली व ब्रजनाथपुर मिल को 2025-26 का बकाया 15 प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने का अल्टीमेटम दिया गया था।

किसान के लिए इसका सीधा मतलब क्या है

अगर आप इन गांवों से हैं, तो सबसे पहले अपनी गन्ना समिति के सचिव से संपर्क में रहें और प्रस्ताव की लिखित जानकारी लें। पर्ची और सट्टे के कागजात संभालकर रखें। केंद्र बदलने पर नए मिल के साथ हिसाब इन्हीं कागजों से मिलेगा।

एक बात और समझनी जरूरी है। केंद्र बदलने का अंतिम आदेश गन्ना आयुक्त या मुख्य सचिव के स्तर से ही जारी होगा। समिति में प्रस्ताव देना पहला कदम है, अंतिम फैसला नहीं।

भुगतान की शिकायत के लिए किसान गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर संपर्क कर सकते हैं। एसएमएस जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है। ये नंबर आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित हैं।

आगे क्या होगा

अब निगाहें सोमवार को गन्ना आयुक्त से किसानों की भेंट और मुख्य सचिव के यहां दायर होने वाली अपील पर हैं। अगर अपील स्वीकार होती है, तो दस गांवों के किसान इसी पेराई सत्र से समय पर भुगतान करने वाली मिलों को गन्ना दे सकेंगे। अगर खारिज होती है, तो किसानों के सामने आंदोलन का रास्ता बचता है।

यह मामला अब सिर्फ दस गांवों का नहीं रहा। यह इस बात का टेस्ट केस है कि भुगतान में लापरवाही करने वाली मिल से केंद्र छुड़ाकर बेहतर मिल से जोड़ा जा सकता है या नहीं।

मुख्य बातें

  • हापुड़ के दस गांवों ने सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से केंद्र बदलने के प्रस्ताव गन्ना समितियों को सौंपे हैं, अब मुख्य सचिव से अपील होगी।
  • गन्ना आयुक्त के आदेश से दोनों मिलों से 184 केंद्र पहले ही छीने जा चुके हैं, और करीब 160 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया बताया जा रहा है।
  • साढ़े सात किलोमीटर की परिधि का नियम पहले प्रस्तावों की राह में अड़चन बना था, इसलिए इस बार अपील सीधे मुख्य सचिव के स्तर पर हो रही है।

स्रोत: अमर उजाला (हापुड़, 25 अक्टूबर 2026) और खबरवाला 24 (हापुड़ गन्ना समिति बैठक, सितंबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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