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गोरखपुर के किसान क्रशर को ₹250 में बेच रहे गन्ना, मिल भाव से ₹175 प्रति क्विंटल का नुकसान

✍️ Aamir Raza · 🗓 28 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गोरखपुर के किसान क्रशर को ₹250 में बेच रहे गन्ना, मिल भाव से ₹175 प्रति क्विंटल का नुकसान

निचलौल की तराई बेल्ट में इस समय गन्ना किसान के सामने एक सीधा सा हिसाब है, और वही हिसाब उसे सबसे ज्यादा चुभ रहा है। हाथ में तुरंत नकद चाहिए तो क्रशर वाला ₹250 से ₹280 प्रति क्विंटल दे रहा है। मिल का इंतजार करे तो ₹425 प्रति क्विंटल मिल सकता है, पर मिल कब चलेगी, इसका भरोसा नहीं। फर्क प्रति क्विंटल ₹175 तक बैठता है। एक ट्रॉली में 100 क्विंटल गन्ना मान लें तो नुकसान ₹14,500 से ₹17,500 तक पहुंच जाता है।

यही वजह है कि गोरखपुर क्षेत्र के कई किसान जानते हुए भी गन्ना क्रशर को बेच रहे हैं। पैसा तुरंत मिल जाता है, भले ही भाव आधे से भी कम पड़ जाए।

गड़ौरा मिल का मामला कोर्ट में, किसान बीच में फंसा

गड़ौरा चीनी मिल का संचालन अभी भी अदालत में लंबित मामले के कारण अनिश्चित बना हुआ है। क्षेत्र का गन्ना पहले ही पास की मिलों को आवंटित किया जा चुका है, लेकिन किसानों की चिंता यह है कि उनकी पूरी फसल की बिक्री कैसे और कब होगी। क्षेत्र में कई जगह पेराई शुरू हो चुकी है, फिर भी गड़ौरा क्षेत्र के किसानों के मन में यही सवाल घूम रहा है कि उनका गन्ना किस केंद्र पर, किस तारीख को बिकेगा।

हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। मिल चलने में देरी, भुगतान में देरी, और ऊपर से खेती की बढ़ती लागत। महंगाई के बीच बीज, खाद और मजदूरी का खर्च बढ़ा है, और आय का एकमात्र सहारा गन्ना ही है। जब उसी की बिक्री अटक जाए तो घर का बजट भी अटक जाता है।

त्योहार और शादी का खर्च, इसलिए तुरंत नकद की मजबूरी

किसानों ने खुद बताया है कि उन्हें त्योहारों के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और शादी-ब्याह के लिए तुरंत पैसे की जरूरत है। अहिरौली के किसान बिंदेश कुशवाहा का कहना है कि मिल संचालन की अनिश्चितता और भुगतान में देरी के कारण हर साल किसानों को परेशानी होती है। भाव कम होने के बावजूद क्रशर से पैसा समय पर मिल जाता है, इसलिए मजबूरी में वहीं बेचना पड़ता है।

बाझा के विनोद यादव के बेटे की शादी मार्च में तय है। उनका कहना है कि मिल को गन्ना बेचने पर भी भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे शादी की खरीदारी और दूसरी तैयारियां अटक सकती हैं। शीतलपुर की रवींद्र देवी की परेशानी अलग है। बाढ़ से उनकी फसल पहले ही नुकसान झेल चुकी है। बचा हुआ गन्ना बेचना भी मुश्किल हो रहा है, और मिल के शुरू होने का इंतजार करने पर घर का खर्च और गेहूं की बुवाई दोनों पिछड़ जाएंगे। क्रशर को बेचने पर पैसा भी मिल जाता है और खेती का काम भी आगे बढ़ता है।

11 क्रय केंद्र बन रहे हैं, खरीद अगले महीने से

राहत की एक खबर भी है। वरिष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक तेज प्रताप सिंह ने बताया है कि क्षेत्र का गन्ना पास की चार मिलों को आवंटित किया गया है, ताकि किसान अपनी उपज बेच सकें। क्षेत्र में 11 गन्ना क्रय केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। बहुआर, बैठवलिया, बडेया, मिश्रवलिया, जैसी और पिपरा काजी सहित कई जगहों पर केंद्र बनाने की प्रक्रिया चल रही है। मिलों के दोबारा खुलने पर अगले महीने से गन्ना खरीद शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।

किसानों के लिए इसका मतलब यह है कि क्रशर को पूरी फसल बेचने से पहले अपने नजदीकी केंद्र की स्थिति जरूर पता कर लें। केंद्र खुलने की तारीख, पर्ची और तौल की जानकारी पहले से लेने पर आखिरी समय की हड़बड़ी से बचा जा सकता है।

क्रशर को बेचें या मिल का इंतजार करें

यह फैसला हर किसान की अपनी जरूरत पर निर्भर करता है, लेकिन हिसाब साफ रखना जरूरी है। अगर तुरंत नकद की सख्त जरूरत है तो थोड़ा गन्ना क्रशर को बेचना समझ में आता है। पूरी फसल क्रशर को दे देना भारी पड़ सकता है, क्योंकि प्रति क्विंटल ₹145 से ₹175 का नुकसान सीधे जेब से जाता है।

दूसरी बात, गेहूं की बुवाई का समय भी ध्यान में रखें। खेत खाली होने में देरी हुई तो रबी की फसल भी पिछड़ेगी। इसलिए वही मात्रा क्रशर को दें जितनी तुरंत जरूरत हो, बाकी गन्ना क्रय केंद्र के लिए बचा कर रखें। क्रशर को बेचते समय तौल की पर्ची जरूर लें, ताकि बाद में वजन को लेकर कोई विवाद न हो।

एक सवाल यह भी उठा है कि क्रशर के संचालन की निगरानी नियमों के अनुसार हो रही है या नहीं। किसानों की मांग है कि क्रशर संचालन पर नजर रखी जाए, ताकि मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना भाव न वसूला जाए।

आगे क्या देखना है

अगले कुछ दिन गड़ौरा क्षेत्र के किसानों के लिए अहम हैं। अदालत के मामले की अगली स्थिति, 11 क्रय केंद्रों के खुलने की तारीख और मिलों के दोबारा खुलने का कार्यक्रम, ये तीनों बातें तय करेंगी कि किसान को क्रशर की ओर जाना पड़ेगा या मिल का रास्ता खुलेगा। केंद्रों की सूची जारी होते ही किसान अपने गांव के नजदीकी केंद्र पर पर्ची और तौल की जानकारी ले सकते हैं।

मुख्य बातें

  • गोरखपुर-निचलौल क्षेत्र में क्रशर ₹250-280 प्रति क्विंटल दे रहे हैं, जबकि मिल का भाव ₹425 है, यानी प्रति क्विंटल ₹175 तक का नुकसान।
  • गड़ौरा मिल का मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए किसान त्योहार, शादी और घरेलू जरूरतों के लिए तुरंत नकद के लिए क्रशर की ओर जा रहे हैं।
  • क्षेत्र में 11 गन्ना क्रय केंद्र बन रहे हैं और अगले महीने से खरीद शुरू होने की उम्मीद है, इसलिए पूरी फसल क्रशर को बेचने से पहले केंद्र की स्थिति जरूर जांचें।

स्रोत: चिनीमंडी (26 अक्टूबर 2026), अमर उजाला की रिपोर्ट के हवाले से; गन्ना विभाग के अधिकारी का बयान।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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