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गोंडा DM का अल्टीमेटम: सिर्फ 51.86% भुगतान, बाढ़ पीड़ित किसान पहले

✍️ Aamir Raza · 🗓 09 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गोंडा DM का अल्टीमेटम: सिर्फ 51.86% भुगतान, बाढ़ पीड़ित किसान पहले

51.86 प्रतिशत।

गोंडा की कुंदरुखी चीनी मिल ने अपने गन्ना किसानों को अब तक सिर्फ इतना ही भुगतान किया है। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में जब यह आंकड़ा सामने आया तो जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने साफ शब्दों में नाराजगी जताई। खबर के मुताबिक उन्होंने मिल प्रबंधन को भुगतान में तेजी लाने के निर्देश दिए और कहा कि बाढ़ और चक्रवात से प्रभावित किसानों को प्राथमिकता के आधार पर पैसा मिलना चाहिए।

यह सिर्फ एक बैठक भर नहीं है। कुंदरुखी मिल गन्ना भुगतान के मामले में पहले से सरकार की राडार पर है। किसान हित में यह खबर क्यों मायने रखती है, समझते हैं।

बैठक में क्या-क्या हुआ

बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रमोद झा, सहायक चीनी आयुक्त कुशलपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी सुनील कुमार सिंह और जिले की कई चीनी मिलों के अधिकारी मौजूद रहे।

डीएम ने साफ किया कि पेराई शुरू होने से पहले सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त होनी चाहिए, किसानों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। तीन बड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई, गन्ना मूल्य भुगतान, किसानों की शिकायतों का निपटारा और गन्ना परिवहन की सुरक्षा।

भुगतान में देरी पर डीएम ने चेतावनी दी कि संबंधित चीनी मिलों के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। किसान को उसकी उपज का पैसा समय पर मिले और शिकायतें लंबित न रहें, यही प्रशासन की प्राथमिकता बताई गई।

अब हर मिल में बनेगा कंट्रोल रूम

किसानों के लिए इस बैठक की सबसे ठोस खबर यही है। डीएम ने जिले की सभी चीनी मिलों में कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, जहां समस्याओं का तुरंत समाधान होगा। कंट्रोल रूम में कर्मचारियों की आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी लगेगी और शिकायत दर्ज करने के लिए रजिस्टर बनेगा, जिसमें यह ब्योरा रहेगा कि शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई।

इसका सीधा मतलब यह है कि अब किसान को गन्ना आपूर्ति, पर्ची या भुगतान की समस्या लेकर भटकना नहीं पड़ेगा। पर्ची और भुगतान के कागज संभाल कर रखिए, जरूरत पड़ने पर यही आपके सबसे बड़े हथियार होंगे।

ढुलाई के वाहनों के लिए सख्त नियम

गन्ना ढोने वाले वाहनों को लेकर भी अहम निर्देश दिए गए। डीएम ने कहा कि परिवहन के दौरान हादसों का खतरा कम करने के लिए हर वाहन पर 2.5 गुना 5 मीटर का लाल कपड़ा लगाया जाए, साथ ही रिफ्लेक्टर क्रॉस और जीपीएस लगाना भी जरूरी होगा। रात में वाहनों की पहचान और दृश्यता बेहतर होगी।

जो किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्राली से गन्ना ढोते हैं, उनके लिए यह चेतावनी जैसा है। सीजन शुरू होने से पहले ट्राली की हालत देख लीजिए और लाल कपड़े-रिफ्लेक्टर का इंतजाम कर लीजिए, वरना रास्ते में रोक-टोक हो सकती है। चीनी मिलों को परिवहन मार्गों का निरीक्षण करके खराब सड़कों की समय रहते मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

गन्ने की प्रजाति की सही पहचान के लिए चेकिंग कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए हैं। डीएम ने किसानों से अपील की है कि मिल की ओर से जारी पर्ची में दर्ज प्रजाति के अनुसार ही गन्ने की आपूर्ति करें। पर्ची में एक प्रजाति और ट्राली में दूसरी मिली तो विवाद होगा।

कब शुरू होगी पेराई

बैठक में आगामी पेराई सत्र की संभावित तारीखें भी बताई गईं। मैजापुर चीनी मिल में 11 नवंबर, कुंदरुखी चीनी मिल में 15 नवंबर और मनकापुर चीनी मिल में 18 नवंबर 2026 से पेराई सत्र शुरू होने की संभावना है। गोंडा बेल्ट के किसानों के लिए 15 नवंबर की तारीख नोट करने लायक है, कटाई का प्लान और पर्ची का हिसाब इसी को ध्यान में रखकर बनाइए।

कुंदरुखी मिल पहले से निशाने पर

जो किसान सोच रहे हैं कि यह सिर्फ एक बैठक है, उन्हें बैकग्राउंड जानना चाहिए। गन्ना आयुक्त की ओर से समय पर भुगतान न करने वाली छह चीनी मिलों के खिलाफ वसूली प्रमाण-पत्र जारी किए गए थे। इनमें कुंदरुखी मिल के साथ पीलीभीत की बरखेड़ा, शाहजहांपुर की मकसूदापुर, बरेली की बहेड़ी और नवाबगंज तथा बागपत की मलकपुर मिल शामिल थीं।

वसूली प्रमाण-पत्र का मतलब यह है कि संबंधित जिले का प्रशासन बकाया राशि को भू-राजस्व की भांति वसूल कर किसानों को भुगतान सुनिश्चित कराएगा। यानी अब यह सिर्फ मिल की मर्जी का सवाल नहीं रहा। इससे पहले भी कुंदरुखी मिल के यूनिट हेड समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ भुगतान में देरी को लेकर मुकदमा दर्ज हो चुका है, जिसकी खबर दैनिक जागरण में प्रकाशित हुई थी।

किसान के लिए इसका मतलब

प्रशासन इस बार भुगतान को लेकर नरम नहीं है। वसूली प्रमाण-पत्र पहले से जारी हैं, अब डीएम स्तर पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी भी आ गई है। कुंदरुखी क्षेत्र के किसान अपना पुराना बकाया रिकॉर्ड तैयार रखें, पर्ची की प्रतियां, भुगतान की रसीदें और समिति के कागज।

भुगतान अटका हो तो अब मिल के कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर भी संपर्क किया जा सकता है। शिकायत रजिस्टर में दर्ज बात का रिकॉर्ड रहेगा, इसलिए मुंह-जुबानी बातचीत पर भरोसा न करें, लिखित शिकायत का हक मांगें।

मुख्य बातें

  • गोंडा DM प्रियंका निरंजन ने कुंदरुखी मिल के सिर्फ 51.86% गन्ना भुगतान पर नाराजगी जताई, बाढ़-चक्रवात प्रभावित किसानों को प्राथमिकता से भुगतान के निर्देश।
  • हर चीनी मिल में कंट्रोल रूम बनेगा, आठ घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी, शिकायत रजिस्टर में कार्रवाई का ब्योरा दर्ज होगा।
  • कुंदरुखी समेत छह मिलों पर वसूली प्रमाण-पत्र पहले से जारी; 15 नवंबर 2026 से कुंदरुखी में पेराई की संभावना, ढुलाई वाहनों पर लाल कपड़ा, रिफ्लेक्टर और GPS अनिवार्य।

स्रोत: चेतना मंच (9 अक्टूबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (5 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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