गोला में गन्ना भुगतान पर बवाल: 15 अक्टूबर तक ब्याज समेत पैसा चाहिए, नहीं तो मिल नहीं चलेगी

“इस बार पेराई शुरू होने से पहले पैसा मिलेगा या फिर पिछली बार की तरह इंतजार करना पड़ेगा?” लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में यही सवाल लेकर किसान सहकारी गन्ना विकास समिति की सामान्य निकाय बैठक में पहुंचे थे, और यही सवाल कुछ ही देर में हंगामे में बदल गया।
रविवार को हुई इस बैठक में किसानों और समिति के डेलीगेटों ने साफ कर दिया कि बकाया गन्ना भुगतान के बिना इस बार मिल का पहिया नहीं घूमेगा। बजाज चीनी मिल से 15 अक्टूबर तक ब्याज समेत पूरा भुगतान कराने की मांग रखी गई, और भुगतान न होने पर आगामी पेराई सत्र शुरू नहीं होने देने की चेतावनी भी दी गई।
बैठक शुरू होने से पहले ही गरम हुआ माहौल
बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष बीना सिंह ने की और संचालन सचिव बलवंत चौधरी ने किया। लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही पांच डेलीगेट — अनिल कुमार, जगदीश प्रसाद, विनोद कुमार, भूपराम और प्रेम सागर — ने सचिव को एक लिखित प्रस्ताव थमा दिया।
प्रस्ताव में किसानों की शिकायत थी कि बजाज चीनी मिल से गन्ने का भुगतान पाने के लिए किसान लगातार परेशान हैं, फिर भी सामान्य निकाय की बैठक के एजेंडे में भुगतान का मुद्दा ही नहीं रखा गया। डेलीगेटों ने मांग की कि 15 अक्टूबर तक ब्याज समेत भुगतान का प्रस्ताव पारित किया जाए, और भुगतान न होने पर पेराई सत्र रोकने के प्रस्ताव की प्रति गन्ना आयुक्त को भेजी जाए।
तीन मांगें जो किसानों ने मंच से रखीं
राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने बैठक में किसानों का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि समिति अध्यक्ष बीना सिंह ने खुद सचिव को पत्र लिखकर गन्ना भुगतान पर देय ब्याज का हिसाब मांगा था। इसके बावजूद बैठक के एजेंडे में किसानों के भुगतान का विषय न रखना किसानों के साथ अन्याय है।
किसानों की मुख्य मांगें ये रहीं:
- 15 अक्टूबर तक ब्याज समेत भुगतान: पिछले पेराई सत्र का बकाया गन्ना मूल्य ब्याज सहित चुकाया जाए।
- शपथपत्र: आगामी पेराई सत्र के गन्ने का भुगतान 14 दिन के भीतर करने का मिल शपथपत्र दे।
- सत्र रोकने की चेतावनी: बकाया भुगतान किए बिना मिल का चक्का नहीं घूमने दिया जाएगा।
संगठन के जिलाध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि बजाज चीनी मिल पहले पिछले सत्र का पूरा भुगतान करे, तभी मिल का संचालन शुरू होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि भारी बारिश और तेज हवाओं से गन्ना और धान की फसल खेतों में गिर गई है, ऐसे समय में किसानों को फसल संभालने के लिए नकद पैसों की सख्त जरूरत है।
मंच पर मिल के अधिकारी, फिर भी बहस
बैठक का सबसे तीखा पल तब आया जब बजाज चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक के मंच पर मौजूद होने के बावजूद पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने भुगतान पर सवाल उठाए। इसी बात पर उनकी विधायक अमन गिरि से बहस हो गई। विधायक ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसानों का कहना है कि बैठकों के आश्वासन अब तक भुगतान में नहीं बदले।
ब्याज की ये लड़ाई अगस्त से भड़क रही है
गोला की यह बैठक अचानक नहीं भड़की है। अगस्त से ही लखीमपुर खीरी में ब्याज का मुद्दा गरम है। 29 अगस्त को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था, जिसमें बकाया भुगतान पर बने ब्याज का अलग-अलग हिसाब मांगा गया।
अमर उजाला की 30 अगस्त की खबर के मुताबिक संगठन के जिलाध्यक्ष अंजनी कुमार दीक्षित ने बताया था कि 16 जुलाई 2026 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान किसानों की ओर से दलील दी गई थी कि किसान गन्ने की खेती के लिए समितियों और बैंकों से कर्ज लेते हैं, उस पर ब्याज और पेनाल्टी चुकाते हैं। ऐसे में मिलों की ओर से भुगतान में देरी पर मिलने वाला ब्याज माफ नहीं होना चाहिए। उच्च न्यायालय ने गन्ना पेराई सत्र 1996-97 से 2025-26 तक के भुगतान पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज के संबंध में गन्ना आयुक्त को आदेश भी दिया है।
किसान के लिए काम की बात
- रिकॉर्ड संभाल कर रखें: अपनी पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान की रसीदें जरूर रखें। ब्याज का दावा इन्हीं कागजों के आधार पर बनता है।
- सट्टा मिलान: गन्ना समिति के सट्टा प्रदर्शन मेले में अपने सट्टे का मिलान जरूर कराएं, ताकि भुगतान में गलती न हो।
- शिकायत कहां करें: जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क किया जा सकता है।
- समिति बैठकों में सक्रिय रहें: भुगतान का मुद्दा एजेंडे में शामिल कराने की मांग जारी रखें, क्योंकि गोला में यही मुद्दा उठाने पर डेडलाइन मिली है।
मुख्य बातें
- गोला गोकर्णनाथ की गन्ना समिति बैठक में बकाया भुगतान पर हंगामा, डेलीगेटों ने एजेंडे से मुद्दा गायब होने पर लिखित प्रस्ताव सौंपा।
- बजाज चीनी मिल से 15 अक्टूबर तक ब्याज समेत भुगतान की मांग, साथ ही अगले सत्र में 14 दिन में भुगतान का शपथपत्र।
- भुगतान न हुआ तो पेराई सत्र 2026-27 शुरू नहीं होने देने की चेतावनी, प्रस्ताव गन्ना आयुक्त को भेजने की मांग।
स्रोत: हिंदुस्तान (लखीमपुर खीरी संस्करण, 27 सितंबर 2026); अमर उजाला (लखीमपुर खीरी, 30 अगस्त 2026)
