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छाता धरने में 50वें दिन बड़ा उलटफेर: मुकदमा वापस, गन्ना मंत्री को अलविदा

✍️ Aamir Raza · 🗓 01 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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छाता धरने में 50वें दिन बड़ा उलटफेर: मुकदमा वापस, गन्ना मंत्री को अलविदा

मथुरा जिले के छाता में चीनी मिल दोबारा चलाने की मांग पर बैठा किसानों का धरना अब सिर्फ मिल का मुद्दा नहीं रहा। धरने के 50वें दिन जो कुछ मंच पर हुआ, उसने इस आंदोलन को साफ सियासी रंग दे दिया है। मुकदमा दर्ज कराने वाले गिर्राज वाल्मीकि खुद धरनास्थल पहुंचे, हाथ जोड़कर माफी मांगी और मुकदमा वापस लेने का ऐलान किया। इसके बाद उन्होंने गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण से खुलकर नाता तोड़ा और उनके ही भतीजे नरदेव चौधरी के समर्थन में उतर गए।

मंच से माफी, फिर मंत्री पर निशाना

गिर्राज वाल्मीकि मंगलवार दोपहर अचानक धरनास्थल पहुंचे। मंच पर खड़े होकर उन्होंने कहा कि रिपोर्ट लिखाने के लिए वे माफी मांगते हैं और अब मुकदमा वापस ले लेंगे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि वे हनुमान जी के भक्त हैं और रिपोर्ट लिखाने के बाद से उनकी अंतरात्मा गवाही नहीं दे रही थी। उनके शब्दों में, उन्हें लगा कि उनसे बड़ा अपराध हो गया है।

वाल्मीकि ने अपने संबोधन में एक और बात जोड़ी, जिसने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने दावा किया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भाजपा हाईकमान के बड़े नेताओं के लगातार फोन आ रहे थे। नेताओं का कहना था, “गिर्राज, तुमने यह बहुत गलत काम कर दिया है।” धरने पर मौजूद किसानों और मजदूरों ने उनका स्नेह से स्वागत किया, जिससे वे काफी भावुक नजर आए।

इसके बाद उन्होंने गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण का नाम लेकर कहा, “माननीय मंत्री जी, आज के बाद मैं आपको सदा के लिए अलविदा कहता हूं।”

मंत्री के भतीजे नरदेव के समर्थन में उतरे

सबसे चौंकाने वाली बात मंत्री के भतीजे और प्रतिनिधि नरदेव चौधरी को लेकर कही गई। गिर्राज ने मंच से नरदेव का समर्थन करते हुए कहा कि वे बड़ी मेहनत और ईमानदारी से काम कर रहे हैं। जनता उन्हें आगे मंत्री और विधायक के रूप में देखना चाहती है, लेकिन “आपके ही मंत्री आपको विधायक नहीं बनने देंगे।” उन्होंने नरदेव से अपील भी की कि वे खुद धरने पर आएं। उनका कहना था कि यह भोली-भाली जनता उन्हें विधायक बना देगी। साफ है कि धरने के मंच से अब मंत्री के अपने घर के अंदर की दरार भी खुलकर सामने आ गई है।

20 सितंबर को कैसे शुरू हुआ था टकराव

इस पूरे विवाद की शुरुआत 20 सितंबर को हुई थी। धरनास्थल पर एक महिला नुन्ना ने गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण को निशाने पर लेते हुए वाल्मीकि समाज पर अमर्यादित टिप्पणी की थी। इस पर सफाई मजदूर संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष और कोसीकलां निवासी गिर्राज वाल्मीकि ने नुन्ना समेत चार आंदोलनकारियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखाई, साथ में 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया।

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने बलपूर्वक आंदोलनकारियों को धरनास्थल से हटा दिया था। लेकिन अगले ही दिन ग्रामीण दोगुनी संख्या में फिर डट गए। उस समय गिर्राज ने कहा था कि टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई न हुई तो वे आत्मदाह कर लेंगे। आत्मदाह की धमकी देने वाला शख्स अब उसी मंच पर खड़ा होकर आंदोलन का साथ दे रहा है।

18 साल से बंद मिल की लड़ाई

छाता चीनी मिल करीब 18 वर्षों से बंद है। हर चुनाव में यह मुद्दा बनती है, पर मिल कभी शुरू नहीं हो पाई। 13 अगस्त को मिल के गेट पर किसानों ने धरना शुरू किया था, जिसका नेतृत्व सेना के पूर्व सूबेदार ललित कर्मयोगी कर रहे हैं। यह आंदोलन हरियाणा के पलवल और होडल तक पहुंच गया है, वहां से भी किसान समर्थन में आ रहे हैं।

15 सितंबर को कैबिनेट ने छाता परिसर में तीन चरण वाली परियोजना के पहले चरण में एथेनॉल प्लांट को मंजूरी दे दी। मंत्री का कहना है कि यह प्रदेश का पहला ऐसा प्लांट होगा, जहां एथेनॉल बनेगा, चीनी का उत्पादन होगा और बायोमास से बिजली भी पैदा होगी। अक्टूबर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों शिलान्यास की घोषणा भी हो चुकी है।

लेकिन किसानों की मांग जस की तस है। उनका कहना है कि उन्हें एथेनॉल प्लांट नहीं, चीनी मिल चाहिए। धरने पर डटे किसानों का साफ कहना है कि जब तक मिल की चिमनियों से धुआं नहीं निकलेगा, धरना नहीं हटेगा।

किसानों के लिए इस मोड़ का क्या मतलब

इस घटनाक्रम का किसानों पर दोहरा असर पड़ेगा। पहला, मुकदमे का डर अब खत्म होता दिख रहा है। पुलिसिया दबाव के बाद आंदोलन में जो घबराहट पैदा हुई थी, वह रिपोर्ट वापसी की घोषणा से कम होगी। दूसरा, यह मोड़ दिखाता है कि समाज और आंदोलन के बीच बनी खाई पाटी जा सकती है, क्योंकि वही शख्स अब आंदोलन के साथ खड़ा है।

लेकिन एक बात साफ रहे। मुकदमे की वापसी से आंदोलन की असली मांग पूरी नहीं होती। मांग एक ही है, बंद पड़ी चीनी मिल दोबारा चालू हो। सरकार की ओर से एथेनॉल प्लांट के शिलान्यास की बात हो रही है, पर किसानों का सवाल वहीं है, मिल में चीनी बनेगी या नहीं? धरना अपने 51वें दिन में प्रवेश कर चुका है और आने वाले दिनों में शिलान्यास की तारीख पर सबकी नजर रहेगी।

मुख्य बातें

  • छाता चीनी मिल धरने के 50वें दिन गिर्राज वाल्मीकि ने आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की घोषणा की और माफी मांगी।
  • उन्होंने गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण से नाता तोड़कर उनके भतीजे नरदेव चौधरी के समर्थन का ऐलान किया, जिससे आंदोलन को सियासी रंग मिल गया।
  • किसानों की मांग जस की तस है, एथेनॉल प्लांट नहीं, बंद पड़ी 18 साल पुरानी चीनी मिल दोबारा चालू हो।

स्रोत: दैनिक जागरण (29 सितंबर 2026), द स्टेट्समैन, दैनिक जागरण (28 सितंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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