सैकड़ों ट्रैक्टर लेकर किसान पहुंचे गढ़ तहसील: बकाया गन्ना भुगतान की मांग

बुधवार 7 अक्टूबर की सुबह गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के आसपास के गांवों से किसान अपने-अपने ट्रैक्टर लेकर निकलने लगे। देखते ही देखते सैकड़ों ट्रैक्टरों का लंबा काफिला बन गया। जब किसानों ने तहसील की ओर रुख किया, तो मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और जाम की स्थिति बन गई। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले किसान गढ़मुक्तेश्वर तहसील पहुंचे, प्रशासनिक परिसर का घेराव किया और जमकर प्रदर्शन किया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तहसील परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा।
भाकियू टिकैत के मंडल अध्यक्ष दिनेश खेड़ा के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता तहसील परिसर में एकत्र हुए। पूरा तहसील परिसर दिनभर धरने और नारेबाजी से गूंजता रहा। ट्रैक्टरों से आए किसानों की वजह से तहसील मार्ग पर भी जाम जैसी स्थिति बनी रही।
दो चीनी मिलों पर बकाया भुगतान का आरोप
धरने पर बैठे किसान नेताओं ने सबसे तीखा मुद्दा गन्ने के बकाया भुगतान को बताया। आरोप है कि सिंभावली और ब्रजनाथपुर शुगर मिल किसानों को उनके गन्ने का बकाया भुगतान नहीं कर रही हैं। इस वजह से किसान आर्थिक तंगी में जूझ रहे हैं।
किसान नेताओं ने चीनी मिलों पर बकाये गन्ना मूल्य का ब्याज सहित जल्द से जल्द भुगतान कराने की मांग उठाई। साथ ही नए पेराई सत्र के लिए गन्ने का भाव बढ़ाने की पुरजोर मांग की गई। धरने पर कहा गया कि समय पर पैसा न मिलने से किसान कर्ज के बोझ तले दब रहा है, जबकि मिलें सुस्त पड़ी हैं।
बिजली विभाग पर उत्पीड़न का आरोप
गन्ना भुगतान के साथ-साथ बिजली विभाग भी किसानों के निशाने पर रहा। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि नए बिजली मीटर ज्यादा खराब स्थिति में हैं और चेकिंग व ओवरलोडिंग की आड़ में अवैध वसूली चल रही है। मांग उठी कि ऐसी वसूली पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाए। भाकियू पदाधिकारियों ने कहा कि चेकिंग की आड़ में ग्रामीण इलाकों में किसानों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए।
ऊर्जा निगम से जुड़ी समस्याओं को लेकर विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलवाया गया। भाकियू कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि किसानों के ट्रैक्टरों का समय निकलने के बाद भी उन्हें रोका जा रहा है, इस पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए।
बेसहारा पशु, बेमौसम बारिश और जर्जर सड़क
प्रदर्शन में किसानों ने खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे आवारा पशुओं और बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग रखी। निराश्रित पशुओं को पकड़वाने की बात भी उठी। इसके साथ ही हाल में हुई बेमौसम बारिश और बाढ़ से तबाह हुई फसलों का तुरंत उचित मुआवजा जारी करने की मांग की गई।
भाकियू के मंडल प्रवक्ता खुर्शीद जूनियर ने कहा कि गढ़-मेरठ मार्ग की हालत पूरी तरह जर्जर हो रही है। गांव की खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
एसडीएम को ज्ञापन, बड़े आंदोलन की चेतावनी
कई घंटों तक चले धरने के बाद भाकियू के प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) अशोक कुमार को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद एसडीएम के आश्वासन पर धरना समाप्त कर दिया गया।
धरने में दिनेश खेड़ा ने चेतावनी दी कि किसानों की समस्याओं का शीघ्र निपटारा न होने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसान नेताओं ने साफ कहा कि अगर प्रशासन ने उनकी जायज मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया, तो इस जनआंदोलन को जिला मुख्यालय से लेकर प्रदेश स्तर तक तेज किया जाएगा।
धरने में फैजान अली, हरेंद्र प्रधान, सुरेंद्र चौहान, मजीद चौधरी, नौशाद अली, इमरान अली, हुसैन अहमद, संजय चौहान और नंद किशोर त्यागी समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
यह धरना एक बात साफ करता है। पेराई सत्र शुरू होने से पहले मिलों पर बकाया भुगतान का दबाव बढ़ रहा है। तहसील स्तर पर ज्ञापन दर्ज हो जाने से मिलों की लापरवाही अब प्रशासनिक रिकॉर्ड में है। अगर आपका गन्ना सिंभावली या ब्रजनाथपुर मिल को गया है और भुगतान अटका है, तो समिति या एसडीएम कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत रिकॉर्ड में होनी चाहिए, वरना दबाव सिर्फ नारों में रह जाता है।
मुख्य बातें
- गढ़मुक्तेश्वर तहसील में भाकियू (टिकैत) ने सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ मार्च निकालकर धरना दिया।
- सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिलों से ब्याज सहित बकाया गन्ना भुगतान और नए सत्र में भाव बढ़ाने की मांग।
- एसडीएम अशोक कुमार को ज्ञापन सौंपा गया; जल्द निपटारा न होने पर प्रदेश स्तर के आंदोलन की चेतावनी।
स्रोत: दैनिक जागरण (8 अक्टूबर 2026), ख़बरवाला 24
