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लाखों की मशीन खरीदे बिना गन्ना खेती: ₹750/घंटा किराए के यंत्र, स्प्रेयर आधे दाम पर

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 02 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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लाखों की मशीन खरीदे बिना गन्ना खेती: ₹750/घंटा किराए के यंत्र, स्प्रेयर आधे दाम पर

बिजनौर के धामपुर में एक किसान की छह बीघा जमीन में गन्ना लगा है। बुवाई पर ट्रैक्टर चाहिए था, मिट्टी पलट हल चाहिए था, पेड़ी पर रोटावेटर। पड़ोसी के पास सब था, मगर किराया सुनकर किसान ने हाथ जोड़ दिए। उसके मन में एक ही बात आई, काश ये सब यंत्र बिना खरीदे भी काम आ जाएं।

ऐसा रास्ता पहले से मौजूद है। बस बहुत से किसान इससे अनजान हैं।

रास्ता 1: गन्ना समिति का मशीनरी बैंक (किराये पर यंत्र)

गन्ना विकास विभाग ने चीनी मिल क्षेत्रों में फार्म मशीनरी बैंक बनवाए हैं। ये मशीनें आपकी अपनी गन्ना समिति पर रखी होती हैं और किसी भी सदस्य किसान को सस्ते किराये पर मिलती हैं।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार धामपुर गन्ना समिति के मशीनरी बैंक में ट्रैक्टर, एमवी प्लाऊ, मिट्टी पलट हल, रोटावेटर, हैरो, मल्चर, सबसोल्जर और रिंग पिट समेत करीब 20 यंत्र हैं। ट्रैक्टर से जुताई का किराया प्रति घंटा 750 रुपये तय है। हैरानी की बात ये कि समिति से जुड़े करीब 70 हजार गन्ना किसानों में से इस सुविधा का लाभ अब तक केवल 146 किसान ही उठा पाए। सुविधा है, मगर जानकारी की कमी है। बैंक के इंचार्ज का कहना है कि किसानों ने रोटावेटर से जुताई की आदत डाल ली है, जो गलत है। गहरी जुताई के बाद बुवाई करने से कम लागत में अच्छी पैदावार होती है।

सीधा मतलब: अपनी गन्ना समिति के सचिव से यंत्रों की सूची और किराया पूछिए। जो पूछते हैं, वही फायदा उठाते हैं।

रास्ता 2: आधे दाम पर स्प्रेयर (15,000 किसानों के लिए योजना)

खाद और दवा के छिड़काव में नैनो उर्वरक का चलन बढ़ रहा है। नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी, सागरिका जैसे उत्पाद पारंपरिक खाद से सस्ते पड़ते हैं, लेकिन इन्हें छिड़कने के लिए अच्छा स्प्रेयर जरूरी है।

चिनीमंडी की खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने 15,000 गन्ना किसानों को स्प्रेयर 50 प्रतिशत अनुदान पर देने की योजना बनाई है। इसमें 5,000 पावर स्प्रेयर और 10,000 बैटरी चालित स्प्रेयर शामिल हैं। किसान को सिर्फ आधी कीमत देनी होगी। वितरण गन्ना समितियों के जरिये होगा, और हर चीनी मिल क्षेत्र में पांच-पांच प्रदर्शन प्लॉट लगाए जाएंगे।

रास्ता 3: ड्रिप सिंचाई (पानी आधा, उपज 20-25% ज्यादा)

गन्ना पानी की फसल है और ट्यूबवेल का बिल हर साल बढ़ता जा रहा है। ड्रिप में पानी सीधे जड़ों तक बूंद-बूंद पहुंचता है।

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में ड्रिप योजना मिशन मोड में चल रही है। वर्ष 2025-26 के लिए 25,000 हेक्टेयर में ड्रिप लगाने का लक्ष्य है। लघु और सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत तक, अन्य किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा।

फायदे ठोस हैं। पानी की 50 प्रतिशत तक बचत, उत्पादन में 20-25 प्रतिशत तक वृद्धि, खेत में खरपतवार कम, और क्षारयुक्त व असमतल भूमि में भी गन्ने की खेती संभव। ड्रिप की 20 प्रतिशत लागत पर गन्ना विभाग ब्याज-मुक्त ऋण भी देता है, जिसकी अदायगी गन्ना मूल्य भुगतान से हो जाती है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में गन्ना आयुक्त ने बताया कि ये योजना प्रदेश के सभी 45 गन्ना उत्पादक जिलों के 20-25 हजार किसानों तक पहुंचेगी।

रास्ता 4: अपनी मशीन पर सब्सिडी (जानकार किसान का फायदा)

कई किसान ट्रैक्टर के साथ और यंत्र जोड़ना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश कृषि पोर्टल पर गन्ना कटर, प्लांटर, रीपर, सीड ड्रिल जैसे यंत्रों पर 40 प्रतिशत या 20,000 रुपये तक अनुदान मिलता है।

आज तक की रिपोर्ट (सितंबर 2026) में मेरठ के किसान नंदकिशोर का उदाहरण छपा है। उन्होंने फार्म मशीनरी बैंक परियोजना के तहत करीब 42 लाख रुपये की मशीनरी ली। 75 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर और उसके साथ बेलर, सुपर सीडर, गेहूं कटाई की मशीन। 30 लाख की योजना में उन्हें करीब 80 प्रतिशत तक सब्सिडी मिली और लगभग 24 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।

नंदकिशोर के पास छह एकड़ जमीन है, जिसमें आलू और गन्ना बोते हैं। वे मशीनों को दूसरे किसानों के खेतों में किराये पर चलाते हैं, जिससे सालाना 4-5 लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी होती है। मशीन एक बार की लागत है, किराये की आमदनी हर साल की है।

गन्ने के लिए सबसे काम के यंत्र: कब, क्या

खेत की तैयारी में मिट्टी पलट हल और सबसोल्जर जमीन की कठोर परत तोड़ते हैं, जिससे गन्ने की जड़ें नीचे जा पाती हैं। बुवाई में सेट प्लांटर बीज गन्ने के टुकड़े सही दूरी पर डालता है। पेड़ी फसल में स्टबल शेवर और ट्रैश मल्चर काम आते हैं। मल्चर गन्ने के पत्तों को काटकर खेत में मिला देता है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। खरपतवार के लिए पावर वीडर मजदूरी का बड़ा खर्च बचाता है। इनमें से ज्यादातर यंत्र मशीनरी बैंक में किराये पर मिल जाते हैं।

मशीन लेने से पहले 4 सवाल

पहला: क्या यही यंत्र मेरे जिले की गन्ना समिति में किराये पर मिल रहा है? अगर हां, तो खरीदना जल्दबाजी है।

दूसरा: योजना में अनुदान की शर्तें क्या हैं? हर योजना में किसान की श्रेणी, रकबा और कागजात की शर्तें अलग होती हैं। समिति या कृषि अधिकारी से लिखित में लें।

तीसरा: यंत्र की देखभाल और पुर्जे कहां मिलेंगे? सस्ता यंत्र महंगा तब पड़ता है जब सर्विस दूर हो।

चौथा: क्या मैं इस यंत्र को पड़ोसियों को किराये पर दे सकता हूं? नंदकिशोर की तरह ये आय का जरिया बन सकता है।

मशीन आधुनिक खेती का दरवाजा है। किराया, आधे दाम का स्प्रेयर, ड्रिप का अनुदान और अपनी मशीन पर सब्सिडी — जो किसान इन चारों रास्तों को जानता है, वही अपनी जेब के हिसाब से सही फैसला लेता है।

मुख्य बातें

  • गन्ना समितियों के फार्म मशीनरी बैंक में ट्रैक्टर समेत करीब 20 यंत्र किराये पर मिलते हैं; धामपुर में ट्रैक्टर जुताई का किराया प्रति घंटा 750 रुपये है, फिर भी जागरूकता की कमी से बहुत कम किसान लाभ उठा रहे हैं।
  • 15,000 गन्ना किसानों को 5,000 पावर और 10,000 बैटरी स्प्रेयर 50 प्रतिशत अनुदान पर मिलेंगे; ड्रिप सिंचाई में लघु-सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत और अन्य को 80 प्रतिशत तक अनुदान है।
  • मशीन खरीदने से पहले समिति से किराया पूछें, योजना की शर्तें लिखित में लें और यंत्र को किराये पर चलाकर अतिरिक्त आमदनी का रास्ता भी देखें।

स्रोत: अमर उजाला, आज तक, चिनीमंडी, ईटीवी भारत

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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