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गन्ना ट्रॉली में एक टन ज़्यादा लोड पड़ा तो ₹20,000 जुर्माना, जानें बचने के 5 नियम

✍️ Aamir Raza · 🗓 26 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ना ट्रॉली में एक टन ज़्यादा लोड पड़ा तो ₹20,000 जुर्माना, जानें बचने के 5 नियम

पेराई सत्र चल रहा है और खेत से मिल तक गन्ना ढोने वाली ट्रॉलियों की कतारें सड़कों पर दिखने लगी हैं। ऐसे में एक सवाल हर किसान के मन में आता है। ट्रॉली में थोड़ा ज्यादा गन्ना भर लिया तो क्या होगा? जवाब सीधा है, और महंगा भी। कानून में ओवरलोडिंग पर ₹20,000 का जुर्माना तय है, और हर अतिरिक्त टन पर ₹2,000 अलग से लगते हैं। यानी दो टन ज्यादा लोड पकड़ा गया तो जुर्माना ₹24,000 तक पहुंच जाता है।

यह रकम किसी अनुमान पर नहीं, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 की धारा 194 पर आधारित है। इसमें यह भी साफ लिखा है कि जुर्माना भर देने से ही गाड़ी नहीं छूटती। अतिरिक्त लोड उतारने के बाद ही वाहन को आगे बढ़ने दिया जाता है। जो चालक वजन कराने से मना करे या तौल से पहले लोड उतार दे, उस पर ₹40,000 तक का जुर्माना लग सकता है।

यूपी गन्ना विभाग के अपने ट्रांसपोर्ट नियम

कानून के अलावा यूपी के गन्ना विभाग ने भी ढुलाई को लेकर अलग निर्देश दिए हैं। राज्य के 45 गन्ना उत्पादक जिलों के उप गन्ना आयुक्तों, जिला गन्ना अधिकारियों और मिल प्रबंधनों को कहा गया है कि क्रय केंद्रों पर गन्ना चढ़ाने या उतारने के लिए किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाए। अगर कोई केंद्र इस काम के पैसे मांगे तो यह नियम के खिलाफ है।

सुरक्षा के लिए दूसरा निर्देश सर्दियों के कोहरे को ध्यान में रखकर दिया गया। गन्ना ढोने वाले सभी ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों पर पीली और लाल फ्लोरोसेंट पट्टी लगाना अनिवार्य किया गया, ताकि धुंध में भी वाहन दूर से दिखे। पीलीभीत में एलएच शुगर मिल ने दो दिन के भीतर 4,500 से ज्यादा ट्रॉलियों और 70 क्रय केंद्रों के वाहनों पर यह निशान लगवाए थे। सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने बताया था कि केंद्रों और मिल परिसर में नियमित जांच होती है, और गन्ना वाहनों के पीछे लगे लाल झंडे भी हादसे रोकने में मदद करते हैं।

कुशीनगर का हालिया उदाहरण बताता है कि जांच सिर्फ कागज पर नहीं होती। वहां ओवरलोड वाहनों पर 20 चालान काटे गए और ₹4.89 लाख का जुर्माना वसूला गया।

ट्रैक्टर-ट्रॉली वाला पेंच भी समझ लें

कई किसान यह मानकर चलते हैं कि ट्रैक्टर-ट्रॉली पर कोई नियम लागू नहीं होता। यह आधी सच्चाई है। अपनी फसल को बाजार या मिल तक ले जाना कृषि काम माना जाता है और आमतौर पर इसकी इजाजत रहती है। दिक्कत तब शुरू होती है जब ट्रैक्टर-ट्रॉली से ईंट, बालू या बजरी जैसे गैर-कृषि सामान ढोया जाए।

ऐसे व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए अलग व्यावसायिक रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, व्यावसायिक बीमा और सड़क कर जरूरी होते हैं। बिना इनके पकड़े जाने पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लग सकता है, और गंभीर मामलों में वाहन जब्त भी हो सकता है। ओवरलोडिंग या बिना फिटनेस और परमिट के चलने पर ₹50,000 से ₹60,000 तक के जुर्माने की भी खबरें रही हैं। इसलिए गन्ना सत्र में ट्रॉली को सिर्फ गन्ने के काम में रखना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

किसान के लिए 5 काम की बातें

ट्रॉली भरने से पहले रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र पर दर्ज वजन सीमा देख लें। ट्रॉली की क्षमता अंदाजे से नहीं, कागज से तय होती है। सीमा से ऊपर का हर टन सीधा जुर्माने में बदलता है।

गन्ना लादते वक्त वजन दोनों तरफ बराबर रखें। एक तरफ ज्यादा भार होने पर मोड़ पर गाड़ी संभालना मुश्किल हो जाता है और टायर फटने का खतरा बढ़ता है।

ट्रॉली पर पीली-लाल फ्लोरोसेंट पट्टी और पीछे लाल झंडा जरूर लगवाएं। कोहरे वाली सुबहों में यही छोटा सा निशान पीछे से आ रहे वाहन को वक्त पर रोक देता है।

पर्ची और तौल की रसीद संभालकर रखें। केंद्र पर लोडिंग या अनलोडिंग का पैसा मांगा जाए तो मना करें और गन्ना विभाग के टोल-फ्री किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं। यह नंबर विभाग की ओर से जारी है।

रात या घने कोहरे में गन्ना ढुलाई टाल सकें तो टाल दें। जल्दबाजी में एक फेरा ज्यादा लगाने के चक्कर में चालान, हादसा या गन्ने की कटौती, तीनों का नुकसान एक साथ हो सकता है।

किसान पर इसका सीधा असर क्या पड़ेगा

ओवरलोडिंग का नुकसान सिर्फ जुर्माने तक नहीं रुकता। पकड़े जाने पर गाड़ी रुकती है, अतिरिक्त गन्ना उतारना पड़ता है और मिल पहुंचने में देरी होती है। देर से पहुंचा गन्ना सूखता है, वजन घटता है और भुगतान भी उसी हिसाब से कम होता है। उल्टा, नियम के हिसाब से लदी ट्रॉली बिना रुकावट मिल पहुंचती है और पर्ची से लेकर भुगतान तक का हिसाब साफ रहता है।

पेराई सत्र में सड़क पर गन्ना वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा रहती है, इसलिए जांच भी इसी दौरान सख्त रहती है। वजन सीमा, पट्टी और कागज, ये तीन चीजें दुरुस्त रखीं तो चालान का डर खत्म हो जाता है और गन्ने की कमाई जुर्माने में नहीं बहती।

मुख्य बातें

  • ओवरलोडिंग पर ₹20,000 जुर्माना और हर अतिरिक्त टन पर ₹2,000 अतिरिक्त, अतिरिक्त लोड उतारे बिना वाहन आगे नहीं बढ़ेगा।
  • यूपी गन्ना विभाग के नियमों के तहत क्रय केंद्र पर लोडिंग-अनलोडिंग मुफ्त है और गन्ना वाहनों पर पीली-लाल फ्लोरोसेंट पट्टी अनिवार्य है।
  • ट्रैक्टर-ट्रॉली से गैर-कृषि सामान ढोना व्यावसायिक इस्तेमाल माना जाता है, जिसमें ₹1 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।

स्रोत: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 की धारा 194, द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के हवाले से चिनीमंडी, न्यूज़18

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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