गन्ना ट्रॉली रवाना करने से पहले 6 जाँच, वरना रास्ता ही कटौती करा देगा

सुबह के वक्त खेत के किनारे ट्रॉली खड़ी हो, मजदूर गन्ने के गट्ठर उठा रहे हों और ड्राइवर बार-बार घड़ी देख रहा हो, यह नजारा पेराई सीजन में हर गाँव में दिखता है। परची हाथ में है, केंद्र का समय तय है और मन में एक ही चिंता रहती है कि गन्ना सही सलामत पहुँच जाए और तौल में कोई अड़चन न आए। अक्सर नुकसान खेत में नहीं होता। नुकसान रास्ते में होता है, भराई में होता है, या फिर केंद्र पर एक छोटी सी लापरवाही से होता है। इसीलिए ट्रॉली रवाना करने से पहले छह जाँच कर लेना, एक ट्रॉली का नहीं, पूरे सीजन का फायदा बचा लेता है।
परची हाथ में आते ही तीन चीजें मिला लें
ट्रॉली भरने से पहले परची को एक बार ध्यान से पढ़ लें। उस पर दर्ज किस्म, केंद्र का नाम और तारीख, तीनों का मिलान अपने गन्ने से कर लें। अगर परची पर किस्म कुछ और लिखी है और खेत में कुछ और कटा है, तो केंद्र पर बहस तय है। गन्ना विभाग ने साफ किया है कि किसान की लिखित सहमति के बिना मिल परची पर दर्ज किस्म को बदलकर तौल नहीं कर सकती। यानी अगर कोई किस्म बदलने की बात कहे, तो पहले पूरी बात समझें और लिखित सहमति के बिना आगे न बढ़ें। शिकायत के लिए विभाग का टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 है, इसे मोबाइल में सेव करके रखना समझदारी है।
परची की एक फोटो भी खींचकर रख लें। कागज गीला हो या खो जाए, फोटो काम आएगी।
भराई में जल्दबाजी सबसे महंगी पड़ती है
ट्रॉली भरते वक्त सबसे आम गलती यह होती है कि ऊपर तक गन्ना ठूँस दिया जाता है ताकि एक ही फेरे में ज्यादा माल चला जाए। ऊपर से ऊँची उठी भराई रास्ते में हिलती है, मोड़ पर गन्ना गिरता है और कई बार ट्रॉली का संतुलन ही बिगड़ जाता है। सही तरीका यह है कि गन्ना सीधा और एक दिशा में रखा जाए, नीचे मोटे और भारी गट्ठर हों और ऊपर हल्का माल हो। भराई पूरी होने पर रस्सी से कसकर बाँधना न भूलें। ढीली रस्सी का मतलब है रास्ते भर गन्ना सरकना और केंद्र पहुँचते-पहुँचते माल का बिखरना।
ओवरलोडिंग से बचना भी इसी जाँच का हिस्सा है। पीलीभीत जैसे जिलों में ओवरलोड गन्ना वाहनों पर कार्रवाई की खबरें आती रही हैं। ट्रॉली की क्षमता से ज्यादा माल लादना न सिर्फ चालान का जोखिम है, बल्कि टायर फटने और पलटने का खतरा भी बढ़ाता है। एक फेरा ज्यादा लग जाए, यह घाटा एक हादसे या चालान के घाटे से हमेशा छोटा होता है।
ट्रॉली की पाँच मिनट की जाँच
रवाना होने से पहले पाँच मिनट ट्रॉली को दे दें। टायरों में हवा देखें, दोनों तरफ के टायर बराबर फूले हों। बेयरिंग में आवाज तो नहीं आ रही, यह खाली ट्रॉली को थोड़ा हिलाकर भी पता चल जाता है। ब्रेक और लाइट काम कर रहे हों, यह रात के सफर में सबसे ज्यादा काम आता है। रस्सी और बाँधने के फंदे मजबूत हों, कटी-फटी रस्सी रास्ते में धोखा देती है। ट्रैक्टर का हुक और पिन भी देख लें, ढीला पिन मोड़ पर ट्रॉली को अलग कर सकता है।
कोहरे और रात में रिफ्लेक्टर ही पहचान है
सर्दी के सीजन में सुबह और रात को कोहरा छा जाता है। गन्ना लदी ट्रॉली पर जब गन्ना ऊपर तक उठा होता है, तो पीछे की लाइट और रिफ्लेक्टर ढक जाते हैं। पीछे से आ रहा तेज वाहन ट्रॉली को दूर से देख ही नहीं पाता। इसीलिए गन्ना एवं चीनी आयुक्त की ओर से ढुलाई वाहनों पर लाल और पीली रिफ्लेक्टर पट्टी लगाना जरूरी किया गया है। पट्टी ऐसी जगह लगाएँ जहाँ गन्ना लदने के बाद भी वह दिखती रहे, सिर्फ बंपर पर लगी पट्टी गन्ने के पीछे छिप जाती है।
केंद्र पर तौल के वक्त आँख खुली रखें
केंद्र पहुँचकर जल्दबाजी में तौल पर्ची लेकर निकल जाना भी एक गलती है। तौल के वक्त पर्ची पर अपना नाम, किस्म और वजन, तीनों पढ़कर मिला लें। वजन में शक हो तो उसी वक्त केंद्र प्रभारी से बात करें, बाद में शिकायत करना मुश्किल हो जाता है। तौल पर्ची को संभालकर रखें, क्योंकि भुगतान का हिसाब इसी से जुड़ता है। घर आकर पर्ची की फोटो भी रख लें और एक डायरी में तारीख के साथ वजन नोट कर लें। सीजन के आखिर में यही डायरी बताती है कि कितना गन्ना किस केंद्र पर तुला और कितना भुगतान बाकी है।
प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं और पेराई सीजन में हजारों ट्रॉलियाँ एक साथ सड़कों पर होती हैं, इसलिए केंद्र पर भीड़ में भी अपनी पर्ची और वजन की जाँच में जल्दबाजी न करें।
कटा गन्ना ज्यादा देर मत रोको
गन्ना कटने के बाद धूप में पड़ा रहे तो सूखने लगता है और वजन घटता है। इसीलिए कटाई और ढुलाई का तालमेल पहले से बैठा लें। जिस दिन कटाई हो, उसी दिन या ज्यादा से ज्यादा अगले दिन ट्रॉली केंद्र तक पहुँच जाए, यही सही क्रम है। खेत में कटा गन्ना दो-तीन दिन पड़ा रहे, तो वजन का नुकसान सीधे किसान की जेब से जाता है। अगर किसी वजह से ढुलाई रुक जाए, तो गन्ने को छाँव में ढककर रखें और सूखे पत्तों से ऊपर से ढक दें।
परची का मिलान, सही भराई, ट्रॉली की जाँच, रिफ्लेक्टर पट्टी, तौल पर ध्यान और समय पर ढुलाई, ये छह काम कर लिए तो ट्रॉली का हर फेरा बेफिक्री से पूरा होगा।
मुख्य बातें
- परची पर किस्म, केंद्र और तारीख का मिलान करें, किस्म बदलने के लिए लिखित सहमति जरूरी है, हेल्पलाइन 1800-121-3203 है।
- ओवरलोड से बचें, गन्ना एक दिशा में रखकर रस्सी से कसकर बाँधें और रवाना होने से पहले टायर, ब्रेक, लाइट व हुक जाँच लें।
- गन्ना लदने के बाद भी दिखती रहे, ऐसी जगह लाल-पीली रिफ्लेक्टर पट्टी लगाएँ और केंद्र पर तौल पर्ची पर नाम, किस्म व वजन पढ़कर ही आगे बढ़ें।
स्रोत: गन्ना एवं चीनी आयुक्त के ढुलाई वाहन सुरक्षा निर्देश और परची किस्म बदलाव पर लिखित सहमति के आदेश की समाचार रिपोर्ट (ट्रैक्टर जंक्शन), ओवरलोड गन्ना वाहनों पर कार्रवाई की समाचार रिपोर्ट (दैनिक भास्कर)।
