खेती गाइड

कटाई के बाद सूखी पत्ती मत जलाओ: 35-40% पानी बचाता है ट्रैश मल्चिंग

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 04 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

Google पर हमें फ़ॉलो करें
कटाई के बाद सूखी पत्ती मत जलाओ: 35-40% पानी बचाता है ट्रैश मल्चिंग

गन्ना कटकर मिल चला गया। खेत में रह गईं सूखी पत्तियों के ढेर, और किसान के हाथ में माचिस। यह नज़ारा यूपी के लगभग हर गन्ना बेल्ट में कटाई के मौसम में दिखता है। आग लगाना आसान लगता है, लेकिन इस एक आग में किसान अपनी जेब से पैसे जलाकर खड़ा हो जाता है। वही सूखी पत्ती, अगर खेत में बिछा दी जाए, तो मुफ्त की खाद, पानी की बचत और खरपतवार की दवाई बन जाती है। इस तरीके को ट्रैश मल्चिंग कहते हैं।

आग में क्या-क्या जल जाता है

गन्ना आयुक्त के विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रति एकड़ खेत में पड़ी सूखी पत्तियों को जलाने पर करीब 400 किलोग्राम लाभकारी कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर जैसे पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं। आग से मिट्टी का तापमान बढ़ता है, जैसे ईंट भट्ठे की ईंट जलती है। राइजोबियम, अजेटोबैक्टर, ट्राइकोडर्मा जैसे लाभकारी जीवाणु और केंचुए आग की चपेट में आकर मर जाते हैं। शोध समीक्षाओं के अनुसार, जलाने की स्थिति में ट्रैश का 70% से ज्यादा कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्व वातावरण में उड़ जाते हैं। इतना नुकसान सिर्फ धुएं के बदले कोई किसान क्यों उठाए?

पानी की बचत का पूरा गणित

सबसे बड़ा फायदा पानी का है। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) के अध्ययन में पाया गया कि ट्रैश को खेत में बिछाए रखने से पानी की 35 से 40 प्रतिशत तक बचत होती है। बिछी हुई पत्ती की चादर धूप को सीधे मिट्टी तक नहीं पहुंचने देती, जिससे वाष्पीकरण घटता है और नमी जड़ों तक टिकी रहती है। ICAR की Indian Farming (जुलाई 2026) में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मल्चिंग वाले खेतों में सिंचाई की ज़रूरत 15 से 25 प्रतिशत तक कम हो जाती है। एक प्रयोग में पाया गया कि मल्चिंग वाले खेत की ऊपरी मिट्टी का तापमान 25 से 27 डिग्री के बीच टिका रहा, जबकि बिना मल्चिंग वाले खेत में यह 27 से 34 डिग्री तक चढ़ गया। ठंडी मिट्टी में जड़ें ज्यादा सक्रिय रहती हैं, और गर्मियों की लू में फसल को सहारा मिलता है।

पत्ती में छिपी खाद की खान

गन्ना भारी खुराक वाली फसल है। 100 टन गन्ने की उपज वाले खेत से करीब 10 से 15 टन सूखी पत्ती निकलती है। इस ट्रैश में 68% कार्बनिक पदार्थ, 0.42% नाइट्रोजन, 0.15% फास्फोरस और 0.57% पोटाश होता है। खास बात यह है कि पत्ती में पोटाश की मात्रा सबसे ज्यादा होती है, और पोटाश ही वह तत्व है जिसकी कमी से गन्ना बारीक और हल्का रह जाता है। पत्ती धीरे-धीरे सड़कर यही पोषक तत्व मिट्टी को लौटा देती है। किसान को समझना चाहिए कि यह मुफ्त की खाद है, जिसे वह सालों से माचिस से उड़ा रहा था।

खरपतवार खुद दब जाते हैं

बिछी हुई पत्ती की परत मिट्टी तक रोशनी नहीं पहुंचने देती। बीज अंकुरित होते हैं, पर रोशनी न मिलने से खरपतवार दब जाते हैं। क्रमिक फसल चक्रों में मल्चिंग अपनाने वाले खेतों में खरपतवार का दबाव धीरे-धीरे घटता देखा गया है। इसका सीधा मतलब है निराई-गुड़ाई पर कम मज़दूरी और खरपतवारनाशी पर कम खर्च। जो किसान पेड़ी गन्ने का प्रबंधन कर रहे हैं, उनके लिए यह दोहरा फायदा है।

ट्रैश मल्चिंग के 3 आसान तरीके

पहला तरीका सबसे सस्ता है: कटाई के बाद सूखी पत्तियों को दो पंक्तियों के बीच की जगह में हाथ से बिछा दें। पत्ती की 8 से 10 सेंटीमीटर मोटी परत काफी होती है। दूसरा तरीका मशीन वाला है। ट्रैश मल्चर नाम की मशीन पत्तियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में बिछा देती है। छोटे टुकड़े जल्दी सड़ते हैं, शोध के अनुसार काटी हुई पत्ती का सड़ने का दर 67% तक बढ़ जाता है। तीसरा तरीका है डीकंपोजर का छिड़काव। बिछाई हुई पत्ती पर ट्राइकोडर्मा या वेस्ट डीकंपोजर का घोल छिड़कने से सड़न तेज होती है और पत्ती जल्दी खाद में बदलती है।

मशीन महंगी लगे तो समिति से लें

ट्रैश मल्चर की कीमत ढाई लाख रुपये से ऊपर होती है, जो छोटे किसान के बूते से बाहर है। इसलिए घबराने की ज़रूरत नहीं। गन्ना विभाग ने सहकारी गन्ना समितियों में फार्म मशीनरी बैंक बनवाए हैं, जहां ट्रैश मल्चर और रैटून मैनेजमेंट डिवाइस किराए पर मिलते हैं। प्रति घंटे का किराया तय होता है, और कई समितियों को दो-दो ट्रैश मल्चर दिए गए हैं। अपने क्षेत्र की समिति से संपर्क करके मशीन बुक कराएं। पेड़ी की शुरुआत में यह मशीन एक ही बार में पत्ती काटने, बिछाने और ठूंठ की छंटाई का काम कर देती है।

कुछ सावधानियां भी जान लें

पत्ती बिछाते समय ध्यान रखें कि परत इतनी मोटी न हो कि नई कोंपलें दब जाएं। पेड़ी में ट्रैश बिछाने से पहले पुराने ठूंठों की छंटाई कराना अच्छा रहता है, ताकि नए अंकुर आसानी से निकलें। सूखे मौसम में बिछाई पत्ती पर हल्की सिंचाई या डीकंपोजर का छिड़काव सड़न को तेज करता है। एक और बात: पत्ती जलाना कानूनी अपराध है और इस पर जुर्माने का प्रावधान है। मल्चिंग अपनाकर आप कानून के झंझट से भी बचते हैं।

मुख्य बातें

  • सूखी पत्ती जलाने से प्रति एकड़ करीब 400 किलो पोषक तत्व नष्ट होते हैं; मल्चिंग से ये मिट्टी को लौटते हैं।
  • ट्रैश मल्चिंग से 35-40% पानी की बचत और 15-25% कम सिंचाई की ज़रूरत (IISR व ICAR अध्ययन)।
  • ट्रैश मल्चर समितियों के फार्म मशीनरी बैंक से प्रति घंटे किराए पर उपलब्ध है; पत्ती बिछाकर डीकंपोजर छिड़कें।

स्रोत: ChiniMandi (उ.प्र. गन्ना आयुक्त विभागीय जानकारी), ICAR Indian Farming जुलाई 2026, Krishi Jagran Hindi, IISR/STAI अनुसंधान।

#गन्ना #ट्रैश मल्चिंग #पानी बचत #पेड़ी प्रबंधन #मिट्टी स्वास्थ्य #गन्ना खेती

Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

और पढ़ें

गन्ने की पर्ची से पेमेंट तक: 1 डायरी में पूरा हिसाब, बकाया कभी नहीं छूटेगा खेती गाइड गन्ने की पर्ची से पेमेंट तक: 1 डायरी में पूरा हिसाब, बकाया कभी नहीं छूटेगा परची गुम, तौल का शक, पेमेंट का हिसाब नहीं। गन्ना किसान की सबसे बड़ी दिक्कत खेत में नहीं, कागज में होती है। एक साधारण डायरी में सट्टा, पर्ची, तौल, खर्च और पेमेंट का रिकॉर्ड रखने का पूरा तरीका इस गाइड में। सूखे पत्ते में एक चिंगारी काफी है: खड़ी गन्ना फसल को आग से बचाने के 7 काम खेती गाइड सूखे पत्ते में एक चिंगारी काफी है: खड़ी गन्ना फसल को आग से बचाने के 7 काम पका गन्ना और सूखे पत्ते आग को मिनटों में फैला देते हैं। खेत के चारों ओर फायर लाइन, मशीन की सफाई, पानी का इंतजाम और आग लगने पर पहले 10 मिनट की सही कार्रवाई की पूरी गाइड। गन्ने के बीच मेंथा: 90 दिन में दूसरी कमाई, 1 एकड़ से 125-200 किलो तेल खेती गाइड गन्ने के बीच मेंथा: 90 दिन में दूसरी कमाई, 1 एकड़ से 125-200 किलो तेल बसंतकालीन गन्ने की पंक्तियों के बीच मेंथा लगाने से उसी खेत से दूसरी कमाई होती है। मार्च में रोपाई, जून में कटाई, और भाप आसवन से तेल। कोसी और सीम-क्रांति किस्म, पानी का हिसाब और बेचने का सही तरीका इस गाइड में।