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गन्ने की चोटी सूख रही है तो टॉप बोरर है: 5 पहचान और बचाव के 4 तरीके

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 28 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ने की चोटी सूख रही है तो टॉप बोरर है: 5 पहचान और बचाव के 4 तरीके

अक्टूबर के आखिरी दिनों में पेराई नजदीक होती है और किसान खेत का चक्कर ज्यादा लगाने लगता है। ऐसे ही एक चक्कर में दिखता है कि कुछ गन्नों की चोटी सूख गई है, ऊपर से पत्तियां झाड़ू सी फैली हैं और पौधा बाकी खेत से छोटा दिख रहा है। कई किसान इसे धूप या पानी की कमी समझकर छोड़ देते हैं, पर असल में यह टॉप बोरर का काम होता है। एक छोटी सी सुंडी गन्ने के बढ़ते सिरे को अंदर से खा जाती है और पौधा ऊपर से बढ़ना बंद कर देता है। समय पर पहचान हो जाए तो नुकसान रुकता है, देर हुई तो वही पौधा वजन और चीनी दोनों में पीछे रह जाता है।

टॉप बोरर क्या करता है

इस कीट का वैज्ञानिक नाम स्किरपोफागा एक्सरप्टैलिस है। मादा पतंगा सफेद होता है और पत्तियों की निचली सतह पर नस के पास अंडों के समूह देता है। अंडों से निकली सुंडी पहले पत्ती की नस में सुरंग बनाती है, फिर गन्ने के नरम बढ़ते सिरे तक पहुंच जाती है। वहीं से वह ऊपरी गांठों को खाती हुई नीचे उतरती है। सुंडी मलाई जैसे सफेद रंग की होती है, पीठ पर लाल धारी दिखती है। यह कीट फरवरी से नवंबर तक सक्रिय रहता है, साल में कई पीढ़ियां देता है और विशेषज्ञ तीसरी पीढ़ी को सबसे नुकसानदायक मानते हैं। पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ और सहारनपुर बेल्ट में यह कीट हर साल किसी न किसी खेत में जरूर दिखता है। पेड़ी फसल भी इसकी चपेट में आती है।

5 पहचान जो खेत में ही दिख जाती हैं

पत्तियों में छेदों की सीधी कतार। पत्ती खुलने पर उस पर समानांतर छेदों की लाइन दिखती है। सुंडी ने बंद पत्ती में छेद किया था, खुलने पर वह कतार बन गई।

पत्ती की नस पर भूरी सुरंग। पत्ती की बीच वाली नस पर सूखी भूरी लकीर या सुरंग दिखे तो समझिए सुंडी वहीं से होकर गुजरी है।

डेड हार्ट जो आसानी से न खिंचे। गन्ने का बीच वाला सूखा हिस्सा खींचने पर अगर आसानी से बाहर न आए तो यह टॉप बोरर की खास पहचान है। शुरुआती छेदक में सूखा हिस्सा आसानी से खिंच आता है।

झाड़ू जैसी चोटी। बढ़ने वाला सिरा मर जाता है तो नीचे की गांठों से कई छोटी शाखाएं फूट पड़ती हैं और ऊपर से पौधा झाड़ू जैसा दिखता है। इसे बंची टॉप कहते हैं।

पौधा रुक जाना और पतला पड़ना। ग्रस्त पौधा लंबाई में रुक जाता है, गन्ना पतला रहता है और वजन नहीं पकड़ता। पेराई पर ऐसे गन्ने का तौल भी कम बैठता है और चीनी भी कम निकलती है।

खेत में आज ही करने वाले 4 काम

कीट दिखते ही सबसे पहले ग्रस्त पौधों को जड़ के पास से काटकर नष्ट कर दीजिए। काटा हुआ हिस्सा खेत में मत छोड़िए, उसमें सुंडी और प्यूपा दोनों पलते हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग भी प्रभावित पौधों को जमीन के स्तर से काटकर नष्ट करने की सलाह देता है।

दूसरा काम अंडा समूह बीनने का है। हफ्ते में एक दो बार खेत में घूमकर पत्तियों की निचली सतह देखिए। अंडों का समूह दिखे तो पत्ती समेत तोड़कर नष्ट कर दीजिए।

तीसरा काम मिट्टी और फसल चक्र से जुड़ा है। हल्की मिट्टी चढ़ाकर पत्ती की पलवार बिछाना कीट के लिए मुश्किल पैदा करता है। गन्ने के साथ मक्का या ज्वार की सहफसल मत लगाइए, ये दोनों कीट के मेजबान पौधे हैं। जरूरत से ज्यादा यूरिया पौधे को नरम बनाता है, इसलिए खाद संतुलित मात्रा में ही डालिए।

चौथा काम बीज चुनाव का है। बीज के लिए सुंडी लगी चोटी वाला गन्ना कभी मत चुनिए। स्वस्थ, कीट मुक्त बीज से ही अगली फसल की शुरुआत साफ होती है।

जैविक रोकथाम: ट्राइकोग्रामा

ट्राइकोग्रामा एक छोटा परजीवी कीट है जो टॉप बोरर के अंडों में अपना अंडा देता है, जिससे सुंडी बनने से पहले ही अंडा बेकार हो जाता है। विशेषज्ञ साहित्य में ट्राइकोग्रामा किलोनिस 10,000 प्रति हेक्टेयर, 10 दिन के अंतर पर 2 से 3 बार छोड़ने की सलाह देता है। गन्ना विभाग ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम छोड़ने की भी सलाह देता है। परजीवी अपने जिले के गन्ना विकास कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से मिलेगा, वहीं से सही समय और तरीका भी पूछ लीजिए।

दवा कब, कौन सी, कैसे

स्प्रे तभी असर करता है जब अंडे फूट रहे हों या पतंगा उड़ रहा हो। एक बार सुंडी तने के अंदर घुस गई तो ऊपर से किया गया छिड़काव उस तक पहुंचता ही नहीं, इसलिए छिड़काव का फैसला निगरानी के बाद करिए, अंदाजे पर नहीं।

विशेषज्ञ साहित्य में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी की 375 मिली प्रति हेक्टेयर खुराक दर्ज है। दवा लेबल पर लिखी खुराक से ही छिड़काव करिए और अपने जिले के कृषि विभाग की सलाह लीजिए। पुरानी और प्रतिबंधित दवाओं के चक्कर में मत पड़िए। छिड़काव शाम के समय करिए, जब धूप ढल रही हो और पतंगा सक्रिय हो।

निगरानी न छूटे: फेरोमोन ट्रैप और हफ्ते की जांच

फेरोमोन ट्रैप खेत में पतंगे की आमद बताता है। ट्रैप में पतंगे बढ़ें तो समझिए अंडे देने का दौर शुरू हो गया है और अगले 7 से 10 दिन सबसे अहम हैं। हफ्ते में एक बार खेत का चक्कर लगाकर 10 से 15 जगहों पर पौधों की चोटी देखिए। जहां छेदों की कतार या सूखी चोटी दिखे, वहीं से कार्रवाई शुरू करिए। कीट का खेल तेजी का है। जो किसान हफ्ते भर बाद खेत देखता है, वह अक्सर तीसरी पीढ़ी के सामने खड़ा मिलता है।

मुख्य बातें

  • टॉप बोरर की सबसे पक्की पहचान पत्तियों में छेदों की कतार, आसानी से न खिंचने वाला डेड हार्ट और झाड़ू जैसी चोटी है।
  • ग्रस्त पौधा जड़ के पास से काटकर नष्ट करें, अंडा समूह बीनें और गन्ने के साथ मक्का या ज्वार की सहफसल न लगाएं।
  • ट्राइकोग्रामा परजीवी 10 दिन के अंतर पर छोड़ें और दवा का छिड़काव अंडे फूटने के समय लेबल खुराक से करें, क्योंकि तने के अंदर घुसी सुंडी पर स्प्रे असर नहीं करता।

स्रोत: उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की कीट सलाह (चिनीमंडी, 2026), प्लांटिक्स व्हाइट टॉप बोरर गाइड, गन्ना कीट प्रबंधन विशेषज्ञ साहित्य (आईसीएआर-आईआईएसआर)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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