7 क्विंटल गन्ना गायब था! तौल पर्ची पढ़ने की ये तरकीब घटतौली पकड़ेगी

अमेठी के जगदीशपुर इलाके में एक क्रय केंद्र पर किसान प्रदीप सिंह दो ट्रॉली गन्ना लेकर पहुंचे थे। पहली ट्रॉली का वजन पर्ची में 39.65 क्विंटल दर्ज हुआ, दूसरी का 32.65 क्विंटल। दोनों ट्रॉली लगभग बराबर भरी थीं, फिर भी फर्क पूरे 7 क्विंटल का था। शक हुआ तो प्रदीप सिंह ने दूसरी ट्रॉली निजी धर्मकांटे पर दोबारा तौलवाई। वहां वजन निकला 39.65 क्विंटल। जांच में पता चला कि केंद्र के कांटे के नीचे जग लगाया गया था, यानी तौल में जानबूझकर हेरफेर हो रहा था। तौल प्रभारी हटाए गए और शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची। (अमर उजाला (17 फरवरी 2026))
प्रदीप सिंह का दावा था कि इस अनुपात से अब तक किसानों का करीब साढ़े छह लाख रुपये का नुकसान हो चुका था। यह कहानी एक बात साफ करती है कि घटतौली का खेल अक्सर उसी पर्ची पर पकड़ा जा सकता है, जिसे किसान जेब में रखकर घर लौट आता है। फर्क सिर्फ इतना है कि पर्ची पढ़ना आना चाहिए।
पर्ची कागज नहीं, आपकी कानूनी रसीद है
गन्ना तौलने के बाद मिलने वाली पर्ची पर सबसे अहम लाइन है तौल की तारीख और समय। गन्ना नियंत्रण आदेश, 1966 के तहत मिल को इसी तारीख से 14 दिन के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान करना होता है। देरी हुई तो 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान है। इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2021 के अपने फैसले में पुख्ता किया था। (चिनीमंडी, जुलाई 2026; दैनिक जागरण, 28 अगस्त 2025)
मतलब साफ है: पर्ची की तारीख आपकी भुगतान-घड़ी है। अगर पर्ची पर तारीख गलत दर्ज हो या खाली छूटी हो, तो भुगतान की देरी पर दावा करना मुश्किल हो जाएगा। पर्ची लेते ही तारीख जरूर जांच लें। पर्ची नंबर भी नोट कर लें, क्योंकि शिकायत दर्ज कराते समय यही नंबर मांगा जाता है।
वजन की तीन लाइनें: गणित खुद मिलाइए
हर पर्ची पर वजन तीन हिस्सों में दर्ज होता है। पहला है सकल वजन, यानी गन्ना भरी ट्रॉली का कुल वजन। दूसरा है खाली वजन, यानी गन्ना उतारने के बाद खाली ट्रॉली का वजन। तीसरा है शुद्ध वजन, यानी असली गन्ने का वजन, जो सकल में से खाली घटाकर निकलता है। भुगतान हमेशा इसी शुद्ध वजन पर होता है।
ट्रिक यहीं काम करती है। पर्ची में दर्ज सकल वजन से खाली वजन घटाकर खुद देखिए कि शुद्ध वजन मेल खाता है या नहीं। अगर गड़बड़ी है तो सवाल उठाइए। अमेठी के मामले में दूसरी ट्रॉली का वजन 32.65 क्विंटल दर्ज हुआ था, जबकि असल था 39.65। किसान को शक इसलिए हुआ क्योंकि दोनों ट्रॉली बराबर भरी थीं। बराबर भरी ट्रॉलियों में बड़ा अंतर ही घटतौली का पहला संकेत है।
नाम, सट्टा और केंद्र की लाइन क्यों जांचें
पर्ची पर आपका नाम, पिता का नाम, गांव और सट्टा या यूनिक कोड लिखा होता है। भुगतान इसी पहचान के आधार पर आपके खाते में जाता है, इसलिए नाम या सट्टा संख्या में गलती मिली तो उसी समय क्रय केंद्र प्रभारी से ठीक करवाएं। गन्ना विभाग अब तौल में पारदर्शिता के लिए यूनिक कोड सिस्टम पर काम कर रहा है और पर्ची की जानकारी एसएमएस से भी भेजी जाती है।
साथ ही पर्ची पर क्रय केंद्र और मिल का नाम लिखा होना चाहिए। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं और ज्यादातर किसान मिल के गेट के बजाय नजदीकी बाहरी क्रय केंद्र पर गन्ना डालते हैं, इसलिए केंद्र का नाम सही न होने पर बाद में शिकायत दर्ज कराने में दिक्कत होती है।
घटतौली रोकने के लिए सरकार का क्या बंदोबस्त है
गन्ना घटतौली की शिकायतों पर गन्ना आयुक्त के निर्देश से उप चीनी आयुक्त ने क्रय केंद्रों पर विशेष अभियान चलाया है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट (13 नवंबर 2025) के मुताबिक हर मिल पर 10 टन क्षमता का मैनुअल कांटा और सत्यापित इलेक्ट्रॉनिक वेब्रिज लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। घटतौली पकड़े जाने पर तौल लिपिक का लाइसेंस निलंबित किया जाएगा और तौल लिपिकों की नियुक्ति व स्थानांतरण ऑनलाइन पोर्टल के जरिये होगा।
तौल के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ की शिकायतों पर भी सख्ती हुई है। गन्ना आयुक्त ने मिलों के गेट और बाहरी क्रय केंद्रों पर लगे तौलन यंत्रों के सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर की जांच के निर्देश दिए हैं। बिजनौर जिले में मिल गेट की तरह बाहरी क्रय केंद्रों पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाने की कार्ययोजना बनाई गई है। (अमर उजाला, 13 दिसंबर 2025)
गड़बड़ी लगे तो कहां शिकायत करें
- गन्ना आयुक्त कंट्रोल रूम: टोल-फ्री 1800-121-3203। क्रय केंद्रों पर घटतौली या अव्यवस्था की शिकायत सीधे दर्ज कराएं।
- पर्ची-संबंधी जानकारी हेतु: टोल-फ्री 1800-103-5283। पर्ची पर लिखा सही न लगने पर इसी नंबर से जानकारी ली जा सकती है।
- सरकारी एसएमएस शॉर्टकोड: 51969। तौल और भुगतान की जानकारी एसएमएस से मिलती है।
शिकायत करते समय पर्ची नंबर, केंद्र का नाम, तौल की तारीख और दर्ज वजन जरूर बताएं। अमेठी के केस से साफ है कि शक होने पर निजी धर्मकांटे पर दोबारा तौल कराना भी एक काम का तरीका है, लेकिन असल ताकत उसी पर्ची में है जो आपके हाथ में है।
मुख्य बातें
- पर्ची की तारीख से ही 14 दिन की भुगतान-घड़ी शुरू होती है; देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का नियम है।
- सकल वजन से खाली वजन घटाकर खुद शुद्ध वजन मिलाएं। फर्क घटतौली का पहला संकेत है।
- नाम, सट्टा/यूनिक कोड और केंद्र-मिल का नाम पर्ची लेते ही जांचें; गलती उसी समय सुधरवाएं।
स्रोत: अमर उजाला (17 फरवरी 2026), हिंदुस्तान (13 नवंबर 2025), चिनीमंडी (जुलाई 2026)
