सूखा पड़ जाए तो भी गन्ना नहीं मरेगा: 8 उपाय जो कम सिंचाई में फसल बचाएंगे

मानसून की पहली बारिश देर से आई, दूसरी आकर रुक गई। ट्यूबवेल चल रहा है, पर बिजली या डीजल का बिल देखकर उंगली रुकती है। ऐसा हाल हर साल किसी न किसी गन्ना बेल्ट के किसान का होता है। गन्ना पानी की प्यास वाली फसल ज़रूर है, लेकिन कमज़ोर नहीं। सही समय पर सही कदम उठाए जाएं, तो एक-दो सूखे दौरे फसल को खत्म नहीं कर पाते। नीचे दिए 8 उपाय भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (लखनऊ) और उ.प्र. गन्ना विकास विभाग की सलाह पर आधारित हैं. हर उपाय के साथ वह तरीका दिया गया है, जिससे फायदा सीधे खेत में दिखे।
1. किस्म बुवाई से पहले सोचकर चुनें
सूखा-प्रभावित या कम बारिश वाले इलाकों में किस्म का चुनाव ही आधी लड़ाई है। गन्ना विभाग की सलाह है कि ऐसे क्षेत्रों में सूखा सहने वाली किस्में ही बोएं, जैसे को.लख. 94184, को.लख. 12209 और को.शा. 08279। ये नमी की कमी के दौर में भी खड़ी रहती हैं और जल्दी उबरती हैं। अगर आपका क्षेत्र कम वर्षा वाला है, तो समिति से बीज लेते समय इन नामों की मांग साफ शब्दों में करें। किस्म का फैसला 3-4 पेड़ी चक्र तक असर डालता है।
2. पत्तियों का बिछावन पंक्तियों के बीच डालें
सबसे सस्ता और तुरंत असर वाला उपाय। खड़ी फसल की सूखी पत्तियां उतारकर दो पंक्तियों के बीच की जगह में बिछा दें। यह बिछावन मिट्टी की नमी को धूप और हवा से बचाता है, जिससे बार-बार सिंचाई की ज़रूरत नहीं पड़ती। खरपतवार भी दबता है, तो निराई पर मज़दूरी बचती है। ट्रैश मल्चिंग पर विस्तार से यहां पढ़ें। जिस किसान के पास ट्यूबवेल दूर है या बिजली का समय अनिश्चित, उसके लिए यह मुफ्त का पानी-बीमा है।
3. टपक या फव्वारा सिंचाई अपनाएं
पानी की किल्लत वाले दौर में सिंचाई की विधि बदलना सबसे बड़ा गेमचेंजर है। टपक (ड्रिप) सिंचाई में पानी सीधे जड़ के पास बूंद-बूंद पहुंचता है, जिससे पारंपरिक विधि की तुलना में पानी की बचत के साथ उपज भी अधिक मिलती है. यह बात गन्ना विभाग की आधिकारिक सलाह में भी दर्ज है। शुरुआत में लागत लगती है, लेकिन कई साल चलने वाले सिस्टम और अनुदान से खर्च निकल आता है। खेत के एक हिस्से में ड्रिप लगाकर शुरू करें और फर्क खुद देखें।
4. पत्तियां मुरझाएं तो पोटाश का 5% घोल छिड़कें
सूखे का सबसे बड़ा नुक़सान तब होता है जब पत्तियों के मुरझाने को हल्के में लिया जाता है। विभागीय सलाह कहती है: अगर सूखे की अवस्था में पत्तियां मुरझाने लगें, तो जीवन-रक्षक सिंचाई करने से पहले पोटाश उर्वरक (MoP) का पानी में 5% घोल फसल पर छिड़कें। यानी 100 लीटर पानी में 5 किलो पोटाश घोलें। यह छिड़काव पौधे की नमी-तनाव झेलने की ताक़त बढ़ाता है। स्प्रेयर पहले से तैयार रखें, ताकि मुरझान दिखते ही छिड़काव में देर न हो।
5. यूरिया 2.5% और पोटाश 2.5% का पत्तियों पर छिड़काव
ICAR-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की आपात योजना के अनुसार, सूखे दौर में बढ़वार बनाए रखने के लिए यूरिया का 2.5% घोल अकेले, या यूरिया 2.5% + पोटाश 2.5% मिलाकर पत्तियों पर छिड़काव करें। मिट्टी में खाद का असर दिखने में समय लेता है, पर पत्तियों पर छिड़काव का असर जल्दी दिखता है. शाम को छिड़काव करें, जब धूप तीखी न हो।
6. सूखे दौर में एथ्रेल का छिड़काव
एक और आईएसआरआई-सुझाया उपाय: सूखे दौर में एथ्रेल की 12 मिलीलीटर मात्रा 100 लीटर पानी में घोलकर पत्तियों पर छिड़कें। यह पौधे पर नमी-तनाव के बुरे असर को कम करता है। ध्यान रखें, यह बढ़वार-नियंत्रक रसायन है, इसलिए मात्रा से ज़्यादा न डालें और कृषि विज्ञान केंद्र से एक बार सलाह ज़रूर लें।
7. मिट्टी चढ़ाना न छोड़ें (शरद बुवाई में खास तौर पर)
शरदकालीन बुवाई वाले खेतों में पंक्तियों पर मिट्टी चढ़ाना (अर्थिंग-अप) बहुत ज़रूरी है। इससे व्यर्थ की कल्ले निकलना रुकता है और बारिश का पानी जड़ों तक रुककर पहुंचता है। बारिश के मौसम से पहले पंक्तियों पर मिट्टी चढ़ा दें. यही छोटा काम सूखे के महीनों में बड़ी राहत देता है।
8. कीट-रोग की निगरानी कड़ी करें
सूखा अकेला नहीं आता. कमज़ोर फसल पर कीट ज़्यादा चिपटते हैं। सूखे दौर में टॉप बोरर, ब्लैक बग (पेड़ी में) और इंटरनोड बोरर पर खास नज़र रखें। एक और ख़तरा: सूखा और बारिश के रुक-रुककर आने-जाने वाले दौर में पोक्का बोइंग रोग का प्रकोप बढ़ता है। पत्तियों में असामान्य मोड़न या सड़न दिखे तो तुरंत अनुशंसित फफूंदनाशी का प्रयोग करें। खेत का नियमित चक्कर ही सबसे सस्ती बीमा पॉलिसी है।
मुट्ठी-परीक्षण: नमी जांचने का देसी तरीका
सिंचाई का फैसला अंदाज़े से न करें। खेत से 15-20 सेंटीमीटर गहराई की मिट्टी लेकर मुट्ठी में दबाएं। अगर मिट्टी की गोली बन जाए और उंगली से दबाने पर आसानी से न टूटे, तो नमी काफी है। गोली न बने और मिट्टी बिखर जाए, तो सिंचाई का समय आ गया है। यह परीक्षण बेवजह की सिंचाई रोकता है और पानी के साथ बिजली का खर्च भी बचाता है।
कटाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद करें
एक गलती जो किसान अक्सर करते हैं: कटाई के बिल्कुल पहले तक सिंचाई। नियम याद रखें: कटाई से करीब 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें। इससे चीनी प्रतिशत बेहतर रहता है और तौल पर रिकवरी का फायदा किसान को ही मिलता है।
मुख्य बातें
- सूखा-प्रभावित इलाकों में को.लख. 94184, को.लख. 12209, को.शा. 08279 जैसी सूखा-सहिष्णु किस्में बोएं. किस्म का फैसला 3-4 पेड़ी चक्र तक असर डालता है।
- पत्तियां मुरझाएं तो पहले पोटाश (MoP) का 5% घोल छिड़कें, फिर जीवन-रक्षक सिंचाई करें; साथ में यूरिया 2.5% + पोटाश 2.5% का पत्तियों पर छिड़काव फसल को जल्दी उठाता है।
- ट्रैश मल्चिंग, टपक सिंचाई और शरद बुवाई में मिट्टी चढ़ाना. ये तीनों पानी बचाने के सबसे भरोसेमंद तरीके हैं।
स्रोत: ChiniMandi (उ.प्र. गन्ना आयुक्त द्वारा भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की सलाह पर जारी फसल सुरक्षा एडवाइजरी), ICAR-ISRI Drought Contingency Plan for Sugarcane Crop।
