सोलर पंप लेते समय ये 5 गलतियां करोगे तो अनुदान का फायदा आधा रह जाएगा

बिजनौर के एक किसान ने पिछले सीजन में PM-KUSUM से सोलर पंप लिया। अनुदान भी मिला, पंप भी लगा। फिर भी छह महीने बाद वही किसान पुराने डीजल सेट पर वापस था। वजह? पंप उसकी बोरिंग के हिसाब का ही नहीं था। पैसा लगा, अनुदान मिला, फिर भी फायदा अधूरा।
यह कहानी अकेली नहीं है। PM-KUSUM में यूपी के किसानों को सोलर पंप पर लाखों रुपये का अनुदान मिलता है। 2025-26 में ही राज्य सरकार ने 40,521 सोलर पंप देने का लक्ष्य रखा था (पीटीआई)। पर आवेदन से पंप लगने तक किसान ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे अनुदान का फायदा आधा रह जाता है। इस गाइड में वे 5 गलतियां हैं, जो तुम्हें नहीं करनी हैं।
PM-KUSUM क्या है, संक्षेप में
PM-KUSUM का दूसरा हिस्सा (Component B) अकेले खड़े सोलर पंपों के लिए है। इसमें केंद्र करीब 60 प्रतिशत और राज्य करीब 30 प्रतिशत अनुदान देता है, यानी कुल अनुदान 90 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। बाकी हिस्सा किसान चुकाता है। यूपी में यह योजना कृषि विभाग के पोर्टल से चलती है और पंप ई-लॉटरी से मिलते हैं। अनुदान की रकम किसान के हाथ नहीं आती, वह अधिकृत वेंडर को जाती है, किसान सिर्फ अपना हिस्सा देता है।
2025-26 के यूपी चक्र में पंप के प्रकार के हिसाब से अनुदान घोषित किया गया था। मिसाल के तौर पर 2 HP डीसी/एसी सरफेस पंप पर कुल ₹98,593, 5 HP एसी सबमर्सिबल पंप पर ₹1,88,038 और 7.5/10 HP एसी सबमर्सिबल पंप पर अधिकतम ₹2,54,983 का अनुदान रखा गया था। इतनी बड़ी रकम पर अगर पंप का चुनाव ही गलत हो गया, तो नुकसान भी उतना ही बड़ा होता है।
गलती 1: बिना जरूरत देखे HP चुन लेना
सबसे आम गलती यही है। पड़ोसी ने 5 HP लगाया तो हमने भी 5 HP ले लिया। जबकि सही HP तीन चीजों पर निर्भर करता है: बोरिंग की गहराई, पानी की धार (डिस्चार्ज) और सिंचाई वाला रकबा।
छोटे ट्यूबवेल पर 2 HP काफी होता है, गहरे बोरिंग और बड़े रकबे के लिए ज्यादा HP चाहिए। HP कम हुआ तो मोटर पर जोर पड़ेगा और जल्द खराब होगी। ज्यादा हुआ तो तुमने अनुदान के बावजूद जेब से ज्यादा लगाया। आवेदन से पहले कृषि अधिकारी से बोरिंग और रकबे के हिसाब से सही HP की सलाह जरूर लो।
गलती 2: सरफेस और सबमर्सिबल में उलझ जाना
सोलर पंप दो तरह के होते हैं। सरफेस पंप जमीन पर रखकर पानी खींचता है, सबमर्सिबल पंप बोरिंग के अंदर पानी में डूबकर चलता है। जिसका जलस्तर गहरा है, उसके लिए सरफेस पंप बेकार है, पानी ही नहीं उठेगा। जिसका पानी ऊपर है, वह सबमर्सिबल लेकर बेवजह ज्यादा खर्च करेगा।
यह चुनाव तुम्हारी बोरिंग की गहराई तय करेगी, तुम्हारी पसंद नहीं। आवेदन में पंप का प्रकार चुनने का विकल्प आता है। वहां अंदाजे से टिक मत लगाओ। यूपी में नौ तरह के पंपों पर अनुदान मिलता है, इसलिए सही प्रकार चुनना तुम्हारे ही हक में है।
गलती 3: अधिकृत वेंडर को छोड़कर कहीं और से लेना
PM-KUSUM में पंप सिर्फ सरकार के तय अधिकृत वेंडरों से लगते हैं। अनुदान इन्हीं वेंडरों को सीधे मिलता है। जो किसान दलाल या गैर-अधिकृत दुकानदार से पंप ले लेता है, वह अनुदान से हाथ धो बैठता है।
कुछ ठग आवेदन के नाम पर पूरी रकम पहले ही मांग लेते हैं। याद रखो: आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन मुफ्त है। 2025-26 के यूपी चक्र में बुकिंग पर सिर्फ ₹5,000 टोकन मनी जमा करानी थी, बाकी रकम बुकिंग पक्की होने के बाद मांगी जाती थी। तुमसे कोई पूरी कीमत एडवांस में मांगे, तो समझो गड़बड़ है।
गलती 4: कागज आधे-अधूरे रखना
ई-लॉटरी में नाम आ गया, पर वेरिफिकेशन में अटक गए। ऐसा बहुतों के साथ होता है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, खतौनी या खसरा, आधार से जुड़ा बैंक खाता, मोबाइल नंबर और फोटो चाहिए। सबसे ज्यादा अटकने वाली दो चीजें हैं: बैंक खाता आधार से जुड़ा न होना, और खतौनी में नाम का फर्क होना।
आवेदन से पहले बैंक जाकर कन्फर्म कर लो कि खाता आधार से लिंक है। खतौनी और आधार का नाम एक जैसा होना चाहिए। जो किसान ये कागज पहले से दुरुस्त रखता है, उसका पंप सबसे पहले लगता है।
गलती 5: पंप लगने के बाद भूल जाना
पंप लग गया, पानी चलने लगा, बस काम खत्म। नहीं। सोलर पैनल पर धूल और मिट्टी की परत जमती है, और गन्ने के खेतों में धूल तो भरपूर उड़ती है। धूल भरा पैनल कम बिजली बनाएगा, पंप धीमा चलेगा। हफ्ते में एक बार पैनल को साफ पानी से पोंछ दो, बस इतना ही काम है।
साथ ही पैनल पर पूरे दिन धूप पड़नी चाहिए, आसपास पेड़ या छप्पर की छांव न पड़े। ये छोटी-छोटी बातें पंप की उम्र सालों बढ़ा देती हैं। डीजल सेट की तरह इसमें हर महीने तेल बदलने का झंझट नहीं, पर थोड़ी देखभाल तो मांगता है।
आवेदन की सही राह, एक नजर में
यूपी में आवेदन कृषि विभाग के पोर्टल www.agriculture.up.gov.in पर होता है। रजिस्ट्रेशन करो, कागज अपलोड करो, आवेदन संख्या संभालकर रखो। विभाग जांच करता है, फिर ई-लॉटरी से चयन होता है। चयन के बाद अधिकृत वेंडर चुनो, अपना हिस्सा चुकाओ, वेंडर पंप लगाएगा। जांच के बाद अनुदान वेंडर को मिल जाता है। किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं है।
एक चेतावनी भी जरूरी है: इंटरनेट पर PM-KUSUM के नाम से कई फर्जी वेबसाइटें रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे मांगती हैं। सिर्फ आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करो। कोई एजेंट कहे कि वह तुम्हारा नाम लॉटरी में पक्का करवा देगा, तो वह झूठ बोल रहा है। चयन ई-लॉटरी से होता है, सिफारिश से नहीं।
मुख्य बातें
- बोरिंग की गहराई और रकबे के हिसाब से सही HP और सही पंप (सरफेस या सबमर्सिबल) चुनो; अंदाजे से चुनाव अनुदान का फायदा आधा कर देता है।
- पंप सिर्फ अधिकृत वेंडर से लो, पूरी रकम एडवांस में कभी मत दो; अनुदान सीधे वेंडर को मिलता है।
- आधार से जुड़ा बैंक खाता और सही खतौनी पहले से तैयार रखो, तभी ई-लॉटरी के बाद वेरिफिकेशन में अटकोगे नहीं।
स्रोत: पीटीआई (फ्री प्रेस जर्नल, रेडिफ़, न्यूज़ड्रम के माध्यम से), The Statesman, kisanpreneur.in, headsupb2b.com, solarsquare.in। फीचर्ड फोटो: IWMI।
