खेती गाइड

पर्ची, भुगतान या तौल की गड़बड़ी: इस 1 टोल-फ्री नंबर पर करें शिकायत, 24x7 मुफ्त सेवा

✍️ Aamir Raza · 🗓 12 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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पर्ची, भुगतान या तौल की गड़बड़ी: इस 1 टोल-फ्री नंबर पर करें शिकायत, 24x7 मुफ्त सेवा

उत्तर प्रदेश में करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवार हैं। हर पेराई सत्र में इनमें से हजारों के साथ वही पुरानी दिक्कत होती है — पर्ची समय पर नहीं आई, गन्ना तौल में कटा, या भुगतान महीनों से अटका पड़ा है। पहले ऐसे में किसान जिला गन्ना कार्यालय के चक्कर काटता था। अब जरूरत नहीं। गन्ना विकास विभाग ने किसानों के लिए टोल-फ्री कंट्रोल रूम शुरू किया है, जहां एक फोन पर शिकायत दर्ज होती है और संबंधित अधिकारी तक पहुंचती है।

यह सुविधा बिल्कुल मुफ्त है। पेराई सत्र (अक्टूबर से मई) के दौरान कंट्रोल रूम 24x7 काम करता है। यानी रात को भी फोन उठेगा।

शिकायत के लिए कौन से नंबर हैं

गन्ना विकास विभाग का मुख्य टोल-फ्री नंबर है 1800-121-3203। खेती से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए इस पर कॉल कर सकते हैं — सर्वे, सट्टा, कैलेंडर, पर्ची, भुगतान, तौल, कुछ भी।

इसके अलावा विभागीय हेल्पलाइन 1800-180-5129 भी उपलब्ध है। और जिनके पास इंटरनेट नहीं है, उनके लिए सरकारी एसएमएस शॉर्टकोड 51969 पर भी जानकारी और शिकायत संबंधी सेवाएं मिलती हैं।

ध्यान रहे — ये नंबर कृषि संबंधी सामान्य जानकारी के लिए नहीं, गन्ने से जुड़ी शिकायतों और जानकारी के लिए बने हैं। अगर समस्या खेती की दूसरी फसल की है, तो किसान कॉल सेंटर के अपने नंबर पर बात करना बेहतर रहेगा।

फोन पर शिकायत दर्ज होने के बाद क्या होता है

प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित है। कॉल करने पर कार्यकारी पहले आपका नाम, पता, किसान कोड, गांव कोड और समस्या नोट करता है। किसान कोड और गांव कोड इसलिए जरूरी हैं ताकि आपकी शिकायत सीधे सही जिले और सही मिल से जुड़ जाए।

इसके बाद शिकायत संबंधित जिला स्तरीय अधिकारियों को भेज दी जाती है। संबंधित अधिकारी किसान से संपर्क कर समस्या का समाधान करता है। और शिकायत निपटने के बाद किसान को एसएमएस के जरिए सूचित किया जाता है।

मुख्यालय स्तर पर अधिकारी रोजाना शिकायतों के निपटारे की निगरानी भी करते हैं। यानी आपकी शिकायत किसी रजिस्टर में दफन नहीं होती — उसका हिसाब रखा जाता है।

किन-किन मामलों में शिकायत करें

सिर्फ भुगतान ही नहीं, कई तरह की दिक्कतें इस नंबर पर दर्ज कराई जा सकती हैं:

  • पर्ची संबंधी: पर्ची समय पर न मिलना, कैलेंडर में गड़बड़ी, सट्टा-सर्वे की समस्या
  • तौल संबंधी: मिल गेट या क्रय केंद्र पर तौल में कटौती, वजन को लेकर विवाद
  • भुगतान संबंधी: गन्ना मूल्य का भुगतान देर से मिलना या अटक जाना
  • खेती संबंधी: कीट-रोग की रोकथाम के उपाय, नई किस्मों या तकनीक की जानकारी

खास बात यह है कि पर्ची और कैलेंडर से जुड़ी शिकायतों के लिए भी यही नंबर काम करता है। पहले किसानों को पर्ची की दिक्कत के लिए अलग-अलग जगह भागना पड़ता था।

कॉल करने से पहले ये 4 चीजें तैयार रखें

  1. किसान कोड — आपका गन्ना किसान के रूप में पंजीकरण नंबर
  2. गांव कोड — आपके गांव का विभागीय कोड
  3. पर्ची या भुगतान का विवरण — जिस तारीख की पर्ची अटकी है, या जिस भुगतान का मामला है, उसकी तारीख और रकम
  4. मिल/क्रय केंद्र का नाम — जहां गन्ना दिया था

ये चार चीजें तैयार होंगी तो कॉल 2-3 मिनट में पूरी हो जाएगी, और शिकायत बिना घूमे सही अधिकारी तक पहुंचेगी।

नंबर न लगे तो ये दूसरे रास्ते

कभी नेटवर्क या व्यस्तता की वजह से कॉल न लगे, तो विभाग के पोर्टल caneup.in पर शिकायत दर्ज करने का कॉलम भी है। वहां शिकायत दर्ज कराने पर संबंधित अधिकारी निश्चित समय में समाधान सुनिश्चित करते हैं।

जिनके पास स्मार्टफोन है, वे ई-गन्ना ऐप (E-ganna App) से भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। ऐप में पर्ची, भुगतान और सर्वे की जानकारी के साथ शिकायत का विकल्प मौजूद है।

और अगर मामला गंभीर है — जैसे बड़ी रकम का भुगतान महीनों से अटका हो — तो जिला गन्ना अधिकारी या अपनी गन्ना समिति के सचिव से सीधे मिलना भी एक विकल्प है। शिकायत की एक प्रति अपने पास रखना हमेशा अच्छा रहता है।

भुगतान देरी वालों के लिए एक खास बात

कानून के मुताबिक चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, और देरी पर 15% सालाना ब्याज का प्रावधान है। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस व्यवस्था को बरकरार रखा है। लेकिन सच्चाई यह है कि ब्याज की वसूली लगभग शून्य रही है।

ऐसे में अगर आपका भुगतान 14 दिन से ज्यादा अटका है, तो सिर्फ इंतजार मत कीजिए — टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराइए। ब्याज का हिसाब बाद में बनेगा, लेकिन शिकायत दर्ज होना पहला और सबसे जरूरी कदम है।

मुख्य बातें

  • गन्ना शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 — पेराई सत्र में 24x7 मुफ्त सेवा
  • वैकल्पिक हेल्पलाइन 1800-180-5129 और एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध
  • शिकायत के बाद किसान को एसएमएस से जानकारी, मुख्यालय रोजाना निगरानी करता है

स्रोत: TractorJunction (गन्ना विकास विभाग कंट्रोल रूम रिपोर्ट), ChiniMandi (गन्ना आयुक्त के हवाले से हेल्पलाइन व्यवस्था), Kisan India (48 लाख किसान परिवार, 122 मिलें)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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