गन्ना सर्वे में एक गलती, पर्ची-पैसा दोनों अटका: 2026-27 का रिकॉर्ड ऐसे जांचें

हर साल कुछ किसान ऐसे मिलते हैं जिनकी पर्ची तो बनती है, लेकिन तौल के वक्त या भुगतान के वक्त अटक जाती है। वजह पूछो तो पता चलता है कि सर्वे में रकबा गलत दर्ज था, या खेत में लगी प्रजाति और कागज में लिखी प्रजाति मेल ही नहीं खाती। पेराई सत्र 2026-27 अब बस कुछ हफ्तों की दूरी पर है। सितंबर में समिति स्तर पर सर्वे और सट्टा प्रदर्शन मेले लग चुके हैं। अगर आपने अब तक अपना रिकॉर्ड नहीं मिलाया, तो यह काम आज ही कर लीजिए।
सर्वे होता क्या है, और कौन करता है
गन्ने का सर्वे कोई कागजी खानापूरी नहीं है। चीनी मिल और गन्ना समिति के कर्मचारी (कामदार) खेत-खेत जाकर नापते हैं कि किस किसान के पास कितने एकड़ में कौन सी प्रजाति का गन्ना खड़ा है। यही ब्योरा 63 कॉलम की रिपोर्ट और कच्चे गन्ना कैलेंडर में दर्ज होता है। बाद में इसी रिकॉर्ड के आधार पर बोर्डिंग होती है, पर्चियां बनती हैं और भुगतान खाते में जाता है। सर्वे में लिखी एक लाइन, सीजन भर आपके काम आती है।
इस बार सितंबर में कई समितियों ने किसानों को रिकॉर्ड दिखाने के लिए मेले आयोजित किए। शामली में सहकारी गन्ना विकास समिति ने 15 से 25 सितंबर तक सर्वे और सट्टा प्रदर्शन मेला लगाया, जहां किसानों को कैलेंडर की जांच कर सुधार का आवेदन देने को कहा गया। अयोध्या के रौजागांव क्षेत्र में 17 से 26 सितंबर तक आपत्ति निस्तारण मेला चला। इन मेलों में आई जानकारी के मुताबिक गन्ना कैलेंडर में सुधार का यह किसानों के लिए आखिरी अवसर था, इसके बाद पेराई के दौरान संशोधन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रहता।
अपना रिकॉर्ड कहां और कैसे देखें
सबसे आसान रास्ता ईगन्ना ऐप और caneup.in पोर्टल है। ऐप पर किसान अपने गन्ने का सर्वे, रकबा और प्रजाति का ब्योरा घर बैठे देख सकता है। जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, वे गन्ना समिति कार्यालय जाकर 63 कॉलम की रिपोर्ट मांग सकते हैं।
जांच में इन 6 बातों को जरूर मिलाइए
- रकबा: खेत में जितना गन्ना बोया है, उतना ही दर्ज है या नहीं। कम दर्ज हुआ तो पर्ची कम बनेगी, ज्यादा दर्ज हुआ तो तौल के वक्त दिक्कत होगी।
- प्रजाति: खेत में जो प्रजाति खड़ी है, वही कागज में होनी चाहिए। चीनी मिलें डी-ग्रेडिंग को लेकर सख्त हैं, और गलत प्रजाति की पर्ची पर गन्ना देने से भुगतान में कटौती का खतरा रहता है।
- मोबाइल नंबर: पर्ची और भुगतान की सूचना एसएमएस से आती है। नंबर बदला है तो अपडेट कराएं, वरना सूचना आप तक पहुंचेगी ही नहीं।
- आधार कार्ड: पहचान से जुड़े रिकॉर्ड में आधार का मिलान जरूरी है। अधिकारियों ने मेलों में आधार और मोबाइल अपडेट कराने की खास अपील की थी।
- आपूर्ति साधन: गन्ना मिल तक कैसे पहुंचेगा, इसका ब्योरा भी रिकॉर्ड में दर्ज होता है। इसमें गलती हुई तो तौल केंद्र पर विवाद खड़ा होता है।
- ऑनलाइन घोषणा पत्र: जिन्होंने अभी तक ऑनलाइन घोषणा पत्र नहीं भरा, उन्हें यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। समितियों की ओर से बताया गया है कि घोषणा पत्र जमा न होने की स्थिति में 2026-27 के सत्र में आपूर्ति रिकॉर्ड का संचालन नहीं हो पाएगा।
गलती मिली तो सुधार कैसे कराएं
घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन देर करने की भी नहीं। शामली मेले में अधिकारियों ने साफ कहा था कि त्रुटि मिलने पर उचित साक्ष्य के साथ निर्धारित काउंटर पर प्रार्थना पत्र देकर संशोधन कराया जा सकता है। यानी खसरा-खतौनी या जो भी दस्तावेज आपके दावे को साबित करे, उसे साथ लेकर समिति कार्यालय जाएं।
ऑनलाइन पोर्टल पर भी समस्या दर्ज कराने का विकल्प है। अगर समिति स्तर पर बात नहीं बनती तो जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। एक जरूरी बात और: इस बार समिति सदस्यता और उत्पादन बढ़ोतरी के आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 10 अक्टूबर 2026 की गई थी, ताकि छूटे किसान पर्ची की दौड़ से बाहर न रहें। याद रखिए, पेराई शुरू होने के बाद कैलेंडर में बदलाव कराना लगभग नामुमकिन हो जाता है, इसलिए यह काम पर्ची बंटने से पहले निपटा लीजिए।
यह काम क्यों इतना मायने रखता है
गन्ना किसान की पूरी सीजन की कमाई दो-तीन कागजों पर टिकी है: सर्वे रिकॉर्ड, पर्ची और भुगतान। सर्वे गलत होगा तो पर्ची गलत बनेगी, पर्ची गलत होगी तो तौल और भुगतान दोनों में झंझट होगा। हर साल डीएम स्तर की बैठकों में मिलों को चेतावनी मिलती है कि गन्ने की डी-ग्रेडिंग न हो, लेकिन जो रिकॉर्ड ही साफ नहीं होगा, वहां विवाद की गुंजाइश अपने आप बन जाती है।
मुख्य बातें
- पेराई सत्र 2026-27 से पहले का गन्ना सर्वे हो चुका है; सितंबर में शामली (15-25 सितंबर) और रौजागांव (17-26 सितंबर) में रिकॉर्ड प्रदर्शन मेले लगे थे।
- ईगन्ना ऐप या caneup.in पर रकबा, प्रजाति, मोबाइल नंबर, आधार और घोषणा पत्र का ब्योरा अभी जांच लें।
- गलती मिलने पर साक्ष्य के साथ समिति कार्यालय में प्रार्थना पत्र दें या ऑनलाइन समस्या दर्ज करें; पेराई शुरू होने के बाद कैलेंडर में सुधार व्यावहारिक रूप से नहीं होता।
स्रोत: हिंदुस्तान (शामली सर्वे एवं सट्टा प्रदर्शन मेला, सितंबर 2026); दैनिक भास्कर (रौजागांव आपत्ति निस्तारण मेला, सितंबर 2026); किसान इंडिया (गन्ना समिति सदस्यता तिथि विस्तार, अक्टूबर 2026)।
