गन्ना भाव 2026-27: कमेटी की बैठक में ₹600 की मांग उठी, लागत ₹392 बताई, फैसला अभी बाकी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों के बायलर गर्म होने लगे हैं। 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन गन्ने का भाव अब तक तय नहीं हुआ। खेत में गन्ना तैयार है, ट्रैक्टर-ट्रॉली तैयार है, पर भाव का पता नहीं।
इस बीच गन्ने के भाव को लेकर हलचल भी तेज हो गई है। लखनऊ में 7 अक्टूबर को गन्ना आयुक्त कार्यालय में एक उप-समिति की बैठक हुई, जिसमें आने वाले पेराई सत्र 2026-27 के भाव पर चर्चा हुई। बैठक में किसान पक्ष से ₹600 प्रति क्विंटल की मांग रखी गई। साफ शब्दों में कहें तो भाव की मांग टेबल पर आ चुकी है, लेकिन सरकार की तरफ से घोषणा अभी बाकी है।
लखनऊ की बैठक में ₹600 की मांग किसने रखी
बैठक में गन्ना विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासन-समिति-क्रय मामलों के अपर गन्ना आयुक्त और चीनी मिलों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
किसान पक्ष से बलरामपुर सहकारी गन्ना विकास समिति के अध्यक्ष प्रतिनिधि रणवीर सिंह रन्नू ने मांग रखी कि 2026-27 के पेराई सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) ₹600 प्रति क्विंटल तय किया जाए। बैठक में खेती की बढ़ती लागत का हवाला दिया गया और किसान को उसकी मेहनत का जायज दाम देने की बात कही गई। पेराई बस कुछ दिन दूर है, इसलिए इस बैठक की चर्चा अहम मानी जा रही है।
अगस्त में भी यही मांग: ज्ञापन और ₹392 लागत का हिसाब
₹600 की मांग अचानक नहीं उठी है। अगस्त 2026 में लखीमपुर खीरी के राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने भी उत्तर प्रदेश सरकार से 2026-27 के लिए ₹600 प्रति क्विंटल भाव तय करने की मांग की थी। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्री कृष्ण वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी और गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार को ज्ञापन सौंपा था।
संगठन का तर्क आंकड़ों पर टिका था। उनके मुताबिक पिछले पेराई सत्र में राज्य ने अगेती गन्ने का भाव ₹400, सामान्य का ₹390 और अनुपयुक्त किस्मों का ₹355 प्रति क्विंटल तय किया था। वहीं शाहजहांपुर के उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के हवाले से गन्ना उत्पादन की लागत करीब ₹392 प्रति क्विंटल बताई गई। यानी अगेती गन्ने पर किसान को लागत से महज ₹8 प्रति क्विंटल ऊपर भाव मिला था।
संगठन ने यह भी कहा कि तब से चीनी के दाम काफी बढ़ चुके हैं। थोक में चीनी करीब ₹4,800 प्रति क्विंटल और खुदरा में ₹5,400 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थी। इथेनॉल, बायो-पोटाश और बिजली की कीमतें भी बढ़ीं, जबकि डीजल, बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी की लागत लगातार ऊपर जा रही है। एक और मांग खास थी: आधुनिक तकनीक से मिलों की प्रसंस्करण लागत घटी है और खोई (बगास) व बायो-पोटाश जैसे उप-उत्पादों से आमदनी बढ़ी है, इसलिए इनकी कमाई का एक हिस्सा किसानों के भुगतान वाले एस्क्रो खाते में जाना चाहिए।
₹600 का गणित: किसान की जेब में क्या बदलेगा
अब सीधा हिसाब समझिए। पिछले सत्र में अगेती गन्ने का भाव ₹400 था और लागत ₹392 बताई गई। अगर भाव ₹600 होता है, तो हर क्विंटल पर किसान को लागत से ₹208 ऊपर मिलेगा। एक एकड़ (700 क्विंटल) पर यह अंतर करीब ₹1.45 लाख बनता है, इसलिए ₹600 का आंकड़ा चर्चा में है।
लेकिन एक बात साफ रखिए: ₹600 अभी मांग है, घोषणा नहीं। 2026-27 के SAP की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, और अंतिम फैसला समिति की सिफारिशों के बाद मुख्यमंत्री व कैबिनेट स्तर पर होगा। मांग और घोषणा में फर्क होता है, और किसान को इसी फर्क को समझकर अपनी योजना बनानी चाहिए।
फैसला कब होगा और किसान अभी क्या करे
भाव तय करने की प्रक्रिया में पहले उप-समिति में किसान और मिलों की राय ली जाती है, फिर रिपोर्ट आगे बढ़ती है और अंतिम मुहर सरकार लगाती है। बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों में मरम्मत का काम तेज हो चुका है। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के मुताबिक प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं।
पेराई से पहले किसान के लिए सबसे जरूरी काम भाव का इंतजार करना नहीं, कागजी तैयारी पूरी करना है। अपने गन्ने के सर्वे रिकॉर्ड में रकबा और किस्म सही दर्ज है या नहीं, यह देख लें। बैंक खाता चालू रहे और जरूरी पहचान दस्तावेज उससे जुड़े हों, ताकि भुगतान में देरी न हो। जल्दी पेराई शुरू होने से खेत समय पर खाली होगा और गेहूं की बुआई सही समय पर हो पाएगी।
आगे क्या देखना होगा
अब सबकी नजर सरकार की घोषणा पर है। 7 अक्टूबर की बैठक में ₹600 की मांग रखी जा चुकी है, अगस्त में ज्ञापन भी दिया जा चुका है। अगर भाव में बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा फायदा उस किसान को होगा जिसने बढ़ती लागत के बीच गन्ना लगाया है। बढ़ोतरी मामूली रही, तो किसान संगठनों की नाराजगी और आंदोलन की चर्चा दोनों बढ़ सकती हैं।
मुख्य बातें
- 7 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना आयुक्त कार्यालय की उप-समिति बैठक में 2026-27 के लिए ₹600 प्रति क्विंटल SAP की मांग रखी गई।
- किसान संगठनों का दावा: गन्ना लागत करीब ₹392 प्रति क्विंटल, जबकि पिछले सत्र का भाव ₹400 (अगेती) था; 2026-27 की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
- पश्चिमी यूपी में 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की उम्मीद; किसान अभी सर्वे रिकॉर्ड और बैंक खाता दुरुस्त रखें।
स्रोत: चिनीमंडी (9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट, हिंदुस्तान के हवाले से; 20 अगस्त 2026 की रिपोर्ट), टाइम्स ऑफ इंडिया (पश्चिमी यूपी पेराई कार्यक्रम, चिनीमंडी के हवाले से)।
