गन्ने के साथ ये फसल लगाओ, एक खेत से दोगुना फायदा: सहफसली खेती का सही तरीका

अक्टूबर का महीना चल रहा है और पश्चिमी यूपी के कई किसान शरदकालीन गन्ने की बुवाई की तैयारी में जुटे हैं। खेत की जुताई हो गई है, मिट्टी तैयार है। लेकिन एक सवाल हर किसान के मन में घूमता है। गन्ना तो बो देंगे, पर शुरुआती 4-5 महीने तक पौधे छोटे ही रहेंगे। कतारों के बीच की इसी खाली जगह को काम में लाने का तरीका है सहफसली खेती।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी.आर. कंबोज खुद कह चुके हैं कि गन्ने में अंतरफसली खेती अपनाने से किसानों की आय बढ़ेगी और खेती ज्यादा लाभकारी बनेगी। उन्होंने गन्ने के साथ तिल, मूंगफली, मूंग, सोयाबीन और भिंडी के सफल प्रयोगों की सराहना की और कहा कि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाना चाहिए।
शरदकालीन गन्ने के साथ क्या बोया जाए
अक्टूबर में बोए जाने वाले शरदकालीन गन्ने में सहफसल के लिए ट्रेंच विधि सबसे मुफीद मानी जाती है। इस विधि में ट्रेंच ओपनर से करीब 1 फीट चौड़ी और 25-30 सेमी गहरी नाली बनाई जाती है। दो नालियों के बीच 120 सेमी की दूरी रखी जाती है। इसी चौड़ी दूरी का फायदा उठाकर नालियों के बीच सरसों, आलू या मूंग जैसी फसलें बोई जा सकती हैं। रेजर विधि की तुलना में ट्रेंच विधि से बोए गए गन्ने की उपज ज्यादा मिलती है, और बीच की जगह से अतिरिक्त आमदनी भी होती है।
खाद की बात करें तो एक एकड़ के हिसाब से 113 किलो नाइट्रोजन, 32 किलो फास्फोरस, 72 किलो पोटाश और 10 किलो जिंक सल्फेट की सिफारिश है। इसमें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फास्फोरस, पोटाश व जिंक सल्फेट की पूरी मात्रा बुवाई के समय ही डाल दें। बची हुई नाइट्रोजन फसल की बढ़वार के हिसाब से बाद में डालें। मिट्टी जांच के अनुसार मात्रा समायोजित करना सबसे अच्छा रहता है।
वसंतकालीन गन्ने में उड़द, मूंग, लोबिया
फरवरी-मार्च में बोए जाने वाले वसंतकालीन गन्ने के साथ दलहनी फसलें बहुत अच्छी रहती हैं। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने हाल की सलाह में किसानों से कहा है कि गन्ने के साथ अंतरफसल के रूप में उड़द, मूंग या लोबिया की खेती करें, इससे आय बढ़ेगी। उसी बैठक में एक जरूरी चेतावनी भी दी गई। लाल सड़न रोग से संक्रमित गन्ने की किस्म 0238 की बुवाई बिल्कुल न करें। लाल सड़न को गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है। ये तने को अंदर से खोखला कर देता है और उपज में 40 फीसदी तक की गिरावट ला सकता है। इसलिए बीज गन्ना लेते समय किस्म का चुनाव सोच-समझकर करें।
दलहनी फसलों का एक और फायदा है। इनकी जड़ों में रहने वाले जीवाणु हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में जमा करते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और अगली फसल में रासायनिक खाद पर निर्भरता घटती है। खरीफ में गन्ने के साथ तिल और मूंगफली जैसी तिलहनी फसलें लेने से देश में खाद्य तेल की कमी को कम करने में भी मदद मिलेगी।
कतार का सही अनुपात क्या रखें
सहफसली खेती में सबसे बड़ी गलती कतारों की गलत दूरी होती है। सुलतानपुर के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सूर्य प्रकाश मिश्र की सलाह है कि फसलों की बुवाई उचित कतार दूरी और अनुपात में करें। आमतौर पर 2:1, 4:2 या 6:2 का कतार अनुपात अपनाया जाता है। मतलब गन्ने की दो कतारों के बीच अंतरफसल की एक कतार, या इसी तरह का संतुलित अनुपात। इससे दोनों फसलों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषण मिलता है।
फसल का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि दोनों फसलों की जड़ों की गहराई और बढ़ने की गति अलग-अलग हो, ताकि पोषक तत्वों और धूप के लिए ज्यादा होड़ न हो। पानी और खाद की जरूरतें भी ऐसी हों जिन्हें एक साथ पूरा किया जा सके। इन्हीं सिद्धांतों पर गन्ने के साथ आलू या मक्के के साथ अरहर जैसे संयोजन सुझाए जाते हैं।
पांच बातें जो भूलनी नहीं हैं
सबसे पहले बीजोपचार। बुवाई से पहले गन्ने के टुकड़ों और अंतरफसल के बीज दोनों का उपचार करें। बाविस्टिन जैसी दवा से उपचार करने पर बीज से लगने वाली बीमारियों का खतरा काफी घट जाता है। दूसरा, खरपतवार पर शुरू से नजर रखें। दो फसलें होने पर खरपतवार भी तेजी से बढ़ते हैं और पोषक तत्वों की होड़ बढ़ाते हैं। समय पर निराई-गुड़ाई करें।
तीसरा, सिंचाई और खाद का प्रबंधन दोनों फसलों की जरूरत के हिसाब से करें। एक फसल को ज्यादा पानी देकर दूसरी को नुकसान न पहुंचाएं। चौथा, कीट और रोगों की नियमित निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर समेकित कीट प्रबंधन अपनाएं। पांचवां, अंतरफसल ऐसी चुनें जिसका आपके इलाके में बाजार हो। फसल उगाने के बाद उसे बेचने की व्यवस्था पहले से सोच लें। आलू, सरसों और सब्जियों का फायदा यही है कि इनकी मांग स्थानीय मंडियों में बनी रहती है।
एक व्यावहारिक फायदा और है। अंतरफसली खेती से खेत में काम के दिन बढ़ते हैं, जिससे खेतिहर मजदूरों को भी अतिरिक्त रोजगार मिलता है। अगर आपने अभी तक सहफसल का फैसला नहीं किया है, तो मिट्टी की जांच करा लें, बीज का इंतजाम कर लें और इस बार खेत की हर इंच जमीन से कमाई करें।
मुख्य बातें
- शरदकालीन गन्ने में ट्रेंच विधि (120 सेमी कतार दूरी) के साथ सरसों, आलू या मूंग की सहफसल लें; वसंतकालीन गन्ने में उड़द, मूंग या लोबिया उपयुक्त रहती है।
- बुवाई के समय 113 किलो नाइट्रोजन (एक तिहाई), 32 किलो फास्फोरस, 72 किलो पोटाश और 10 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ डालें; मिट्टी जांच के अनुसार मात्रा समायोजित करें।
- 2:1, 4:2 या 6:2 का कतार अनुपात रखें, बीजोपचार जरूर करें और लाल सड़न प्रभावित 0238 किस्म की बुवाई न करें।
स्रोत: कृषिजागरण (शरदकालीन गन्ना वैज्ञानिक खेती), News18/Local18 (केवीके सुलतानपुर, डॉ. सूर्य प्रकाश मिश्र), ChiniMandi (हाउ कुलपति डॉ. बी.आर. कंबोज), Kisan India (उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद सलाह), MyKisan/ICAR-IISR।
