गन्ने के बीच मसूर: 1 एकड़ से 6 क्विंटल दाल + गन्ना, ₹50,000 अतिरिक्त कमाने की विधि

कुशीनगर के कुछ गांवों में इस बार अजीब नजारा है। गन्ने के खेत में गन्ना भी खड़ा है और उसके बीच की कतारों में मसूर भी पक रही है। कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक एक एकड़ से करीब 6 क्विंटल मसूर निकल रही है, जिससे किसान को 50 से 55 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी का अंदाजा है। यही नहीं, जिले में सहफसली खेती के लिए मसूर का बीज मुफ्त भी बांटा जा रहा है।
यह कोई जादू नहीं, खेत का सीधा गणित है। गन्ना 10 से 12 महीने की फसल है, लेकिन शुरुआती 3-4 महीनों में उसकी दो कतारों के बीच की मिट्टी खाली पड़ी रहती है। उसी खाली जगह और खाली समय में 3-4 महीने वाली रबी फसल बो दी जाए, तो एक ही एकड़ दो बार कमाएगा। इस गाइड में खेत-कतार की तैयारी, 4 भरोसेमंद फसलों की बीज दर और बुवाई विधि, और गन्ना घटाने वाली गलतियों का पूरा हिसाब है।
4 फीट की कतार: सहफसल की बुनियाद
सहफसल तभी चलेगी जब गन्ने की कतारों के बीच जगह हो। पारंपरिक 2 से 2.5 फीट की संकरी कतारों में दूसरी फसल दम घुटकर मर जाएगी। इसलिए पहला कदम है बुवाई की विधि बदलना।
ट्रेंच विधि में कतार से कतार की दूरी 4 फीट (करीब 120 सेंटीमीटर) रखी जाती है और नाली करीब 1 फीट गहरी बनाई जाती है। बस्ती के गन्ना विकास निरीक्षक के अनुसार जिन किसानों के पास छोटा ट्रैक्टर है, वे 5 फीट की दूरी पर बोएं ताकि निराई-गुड़ाई में ट्रैक्टर आसानी से चल सके। ट्रेंच की गहरी नाली में जड़ें नीचे जाती हैं, फसल हवा में नहीं गिरती, और धूप-हवा का प्रवेश बेहतर होता है। नालियों के बीच की खाली पट्टी ही आपकी सहफसल की जमीन है।
खेत की तैयारी में 2-3 बार जुताई करके मिट्टी भुरभुरी बनाएं और गोबर की खाद मिलाएं।
कौन सी 4 फसलें? पश्चिमी यूपी का व्यावहारिक चयन
आईआईएसआर लखनऊ की सिफारिश के अनुसार रबी सीजन में गन्ने के साथ सरसों और मसूर को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। व्यावहारिक अनुभव के आधार पर ये 4 फसलें सबसे भरोसेमंद हैं:
1. मसूर (सबसे ज्यादा मुनाफे वाली): अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में बुवाई करें। प्रति हेक्टेयर 25 से 35 किलोग्राम बीज पर्याप्त है, कतारों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखें। फरवरी-मार्च तक कट जाती है, गन्ने की बढ़वार के समय तक खेत खाली। दलहनी फसल होने से मिट्टी में नाइट्रोजन भी छोड़ती है, यानी गन्ने को मुफ्त खाद का फायदा।
2. सरसों: प्रति हेक्टेयर सिर्फ 6 किलोग्राम बीज चाहिए, कतार दूरी 30 सेंटीमीटर रखें। बीज 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई पर बोएं। कम लागत, जल्दी कटाई और बाजार में अच्छी मांग इसे छोटे किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनाती है।
3. गेहूं: गन्ने की 120 सेंटीमीटर चौड़ी कतारों के बीच गेहूं की कतारें 20 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं। प्रति हेक्टेयर करीब 100 किलोग्राम बीज दर रखें। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली सिंचाई दें।
4. आलू: अगेती किस्में अक्टूबर में बोकर जनवरी-फरवरी में निकाल ली जाती हैं। आलू की खुदाई के समय मिट्टी की गुड़ाई अपने आप हो जाती है, जिससे गन्ने की जड़ों को हवा मिलती है।
पानी और खाद का हिसाब
सहफसल का सबसे बड़ा सवाल है: पानी और खाद की होड़ तो नहीं होगी? इसका जवाब बुवाई के समय की योजना में है।
सहफसल की बेसल खाद बुवाई के समय ही डाल दें, ताकि बाद में गन्ने की खाद से टकराव न हो। दलहनी फसलें (मसूर, चना) हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में जमा करती हैं, इसलिए इनके साथ यूरिया की अतिरिक्त मात्रा की जरूरत कम पड़ती है। गेहूं के मामले में पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद तय है, उसी के साथ गन्ने को भी पानी मिल जाता है।
एक और फायदा अक्सर नजरअंदाज होता है: कतारों के बीच फसल खड़ी होने से खरपतवार को बढ़ने की जगह नहीं मिलती। निराई-गुड़ाई का खर्च अपने आप घट जाता है। ढकरानी (देहरादून) के कृषि विज्ञान केंद्र के परीक्षणों में गन्ने के साथ उड़द की सहफसली खेती इतनी सफल रही कि 4 बार के ट्रायल के बाद 227 किसानों के 163 हेक्टेयर में इसे अपनाया गया।
5 गलतियां जो गन्ने की उपज घटा देती हैं
ऊंची बढ़ने वाली फसल चुनना: सहफसल कभी गन्ने से ऊंची नहीं होनी चाहिए, वरना धूप रुक जाएगी। मक्का जैसी लंबी फसल इस काम के लिए गलत है।
देर से कटने वाली किस्म: जो फसल मार्च के बाद तक खेत में रहेगी, वह गन्ने की कल्ले फूटने की अवस्था से टकराएगी। हमेशा 3-4 महीने में कटने वाली किस्म चुनें।
संकरी कतारों में जबरदस्ती बुवाई: 2.5 फीट की कतारों में सहफसल दोनों फसलों को नुकसान पहुंचाती है। पहले कतार चौड़ी करें, फिर सहफसल सोचें।
पानी का असंतुलन: आलू या गेहूं को ज्यादा पानी देकर गन्ने की नाली में पानी भर देना जड़ सड़न को न्योता देता है। सिंचाई नाली में नियंत्रित रखें।
बीज उपचार छोड़ देना: सहफसल के बीज को बुवाई से पहले फफूंदनाशक से उपचारित करना उतना ही जरूरी है जितना गन्ने के टुकड़ों का। सस्ती बचत महंगा रोग बन सकती है।
अक्टूबर से मार्च तक का कैलेंडर
अक्टूबर के दूसरे-तीसरे सप्ताह में गन्ने की ट्रेंच बुवाई के साथ ही सहफसल बो दें। जनवरी में आलू, फरवरी-मार्च में मसूर, सरसों और गेहूं कट जाएंगे। उसके बाद खेत में सिर्फ गन्ना रहेगा, जिसे पूरी धूप और पूरी जगह मिलेगी।
मुख्य बातें
- गन्ने की कतारें 4 फीट (छोटे ट्रैक्टर पर 5 फीट) चौड़ी रखें। यही पट्टी सहफसल की जमीन है।
- रबी में मसूर और सरसों सबसे भरोसेमंद सहफसलें हैं; बीज दर क्रमशः 25-35 किग्रा और 6 किग्रा प्रति हेक्टेयर।
- सहफसल फरवरी-मार्च तक कट जानी चाहिए, ताकि गन्ने की बढ़वार से टकराव न हो।
स्रोत: आईआईएसआर सिफारिशों पर आधारित यूपी सरकार की अंतःफसली खेती योजना (इंडिया टाइम्स/एशियानेट न्यूज), कुशीनगर मसूर सहफसली खेती रिपोर्ट (न्यूजट्रैक, 18 अक्टूबर 2026), गन्ना-गेहूं सहफसली विधि (डीहाट), ट्रेंच विधि विशेषज्ञ सलाह (न्यूज18/लोकल18, बस्ती), रबी फसल बीज दर सलाह (दैनिक ट्रिब्यून), केवीके ढकरानी उड़द सहफसल परीक्षण (ट्रैक्टर जंक्शन)।
