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गन्ने के रस से एथेनॉल पर रोक की तैयारी, 31 अक्टूबर तक अधिसूचना संभव

✍️ Aamir Raza · 🗓 06 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ने के रस से एथेनॉल पर रोक की तैयारी, 31 अक्टूबर तक अधिसूचना संभव

चीनी सत्र 2026-27 की पराई 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और पश्चिमी यूपी की मिलों में गन्ने की आवक धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है। ठीक इसी बीच दिल्ली से आई एक खबर ने मिल मालिकों के साथ-साथ किसानों के मन में भी सवाल खड़े कर दिए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की 5 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे को एथेनॉल बनाने में डायवर्ट करने पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है।

साफ कर दें कि रोक अभी लगी नहीं है। TOI के मुताबिक सरकार इस फैसले की अधिसूचना जल्द जारी करेगी। समय इसलिए अहम है क्योंकि एथेनॉल सप्लाई ईयर 1 नवंबर से 31 अक्टूबर तक चलता है, जबकि चीनी सत्र 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक चलता है। यानी 31 अक्टूबर से पहले आने वाली अधिसूचना मिलों के पूरे सत्र की योजना तय कर देगी।

सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ रहा है

वजह चीनी के भंडार की हालत है। 1 अक्टूबर को नया चीनी सत्र सिर्फ 37.5 लाख टन शुरुआती स्टॉक के साथ शुरू हुआ, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 50 लाख टन था। चीनी सत्र 2025-26 में उत्पादन शुरुआती अनुमान से करीब 11 फीसदी कम रहा। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की वजह से इस सत्र के उत्पादन पर भी दबाव बन रहा है।

आम घरों की रसोई तक असर पहुंच चुका है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक चीनी का औसत खुदरा भाव 55.28 रुपये किलो तक पहुंच गया, जो एक साल पहले के भाव से 20 फीसदी ज्यादा है। सरकार निर्यात पर रोक और स्टॉक सीमा जैसे कदम पहले ही उठा चुकी है; एथेनॉल डायवर्जन पर रोक इसी कड़ी का अगला कदम हो सकती है।

30 लाख टन: इतना गन्ना गया एथेनॉल में

बीते चीनी सत्र में मिलों ने करीब 30 लाख टन चीनी, यानी कुल उत्पादन का लगभग 10 फीसदी, एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट किया था। सरकार का कहना है कि एथेनॉल में जाने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 के करीब 12 फीसदी से घटकर 2025-26 में लगभग 9 फीसदी रह गया है। FE की रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 के एथेनॉल सप्लाई ईयर में कुल जरूरत का सिर्फ 26 फीसदी यानी 2,750 मिलियन लीटर एथेनॉल गन्ना आधारित स्रोतों से बना, जबकि 74 फीसदी यानी 7,610 मिलियन लीटर अनाज से तैयार हुआ। अनाज में मक्का से 5,180 मिलियन लीटर (47 फीसदी) और चावल से 3,050 मिलियन लीटर (27 फीसदी) एथेनॉल बना। FE के मुताबिक इस प्रतिबंध के बाद अगले सप्लाई ईयर में गन्ना आधारित हिस्सेदारी घटकर 10 से 12 फीसदी तक रह सकती है। यानी एथेनॉल का खेल अब लगभग पूरी तरह अनाज के सहारे चलेगा।

राहत वाली बात: सी-हेवी शीरा और अनाज से एथेनॉल जारी रहेगा

रोक सिर्फ गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे पर प्रस्तावित है। FE की रिपोर्ट के मुताबिक सी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाना जारी रहेगा, क्योंकि इसमें चीनी की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। मिलों के डिस्टिलरी यूनिट पूरी तरह ठप नहीं होंगे, और मक्का-चावल से बना एथेनॉल E20 के लक्ष्य को बचाए रखेगा।

यूपी के गन्ना किसानों पर क्या असर पड़ेगा

किसानों के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या मिलें कम गन्ना खरीदेंगी। जवाब सीधा है, नहीं। रोक एथेनॉल के कच्चे माल पर है, गन्ने की खरीद पर नहीं। मिलों को इस सत्र में भी उसी रफ्तार से गन्ना चाहिए, बल्कि ज्यादा चीनी बनाने के लिए उन्हें गन्ने और रस दोनों की जरूरत होगी। यूपी की 122 चीनी मिलों में पराई का काम चल रहा है। पर्ची और तौल की गति पर इस फैसले का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

दूसरा सवाल भाव और भुगतान को लेकर है। जब गन्ने के रस से एथेनॉल नहीं बनेगा, तो मिलें उसी गन्ने से ज्यादा चीनी निकालेंगी। घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई सुधरेगी। स्थिर भाव से मिलों की बिक्री की आय बनी रहती है, और मिलों के पास पैसा आने का मतलब है गन्ना भुगतान की रफ्तार भी टिकी रहना। इसलिए भुगतान को लेकर डरने की कोई वजह नहीं दिखती।

एक और असर मिलों की एथेनॉल से जुड़ी अतिरिक्त कमाई पर पड़ेगा। पिछले कुछ सालों में कई चीनी मिलों ने डिस्टिलरी यूनिट लगाकर एथेनॉल से अच्छी कमाई की थी। इस रोक से उस रास्ते पर ब्रेक लगेगा। गन्ना आधारित एथेनॉल का हिस्सा चार साल से लगातार घट रहा था, इसलिए यह मिलों के लिए अचानक का झटका नहीं होगा।

एक बात ध्यान रखने वाली है। फैसला अभी अंतिम नहीं हुआ है। अधिसूचना जारी होने के बाद ही साफ होगा कि रोक किन शर्तों के साथ लागू होगी। किसानों को किसी भी अफवाह पर गन्ना बेचने या रोकने का फैसला नहीं करना चाहिए। पराई का काम अपने समय पर चलता रहे, यही समझदारी है।

मुख्य बातें

  • केंद्र सरकार 1 नवंबर से शुरू होने वाले एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे के एथेनॉल डायवर्जन पर रोक की तैयारी में है; अधिसूचना 31 अक्टूबर से पहले संभव (टाइम्स ऑफ इंडिया, 5 अक्टूबर 2026)
  • नया चीनी सत्र सिर्फ 37.5 लाख टन शुरुआती स्टॉक के साथ शुरू हुआ; चीनी का खुदरा भाव 55.28 रुपये किलो, एक साल में 20 फीसदी बढ़ा
  • रोक से गन्ने की खरीद, पर्ची या तौल पर असर नहीं पड़ेगा; मिलें उसी गन्ने से ज्यादा चीनी बनाएंगी

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (5 अक्टूबर 2026), फाइनेंशियल एक्सप्रेस (5 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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