पत्तियां पीली-काली पड़ रही हैं तो पायरिला समझो, 5000 कोकून वाला मित्र कीट ही इलाज है

शाम को खेत से लौटते किसान ने देखा कि गन्ने की नीचे वाली पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। कुछ पर कालापन भी था। गन्ना लंबा तो था, पर पत्तियां सूखी-सूखी लग रही थीं। मिल में तौल के बाद जब चीनी की बात आई, तो अंदाजा हुआ कि नुकसान पत्तियों से शुरू होकर रस तक पहुंच चुका है। पश्चिमी यूपी के कई खेतों में इस कहानी का नाम एक ही है, पायरिला। यह छोटा सा कीट झुंड में हमला करके पूरी फसल की मिठास खा जाता है।
पायरिला का वैज्ञानिक नाम पायरिला परप्युसिला है। यह उत्तर भारत में गन्ने का बड़ा दुश्मन माना जाता है। वयस्क कीट भूरे-पीले रंग का, करीब 7 से 8 मिलीमीटर लंबा होता है। छूते ही यह उछलकर दूसरी पत्ती पर चला जाता है, इसीलिए किसान अक्सर इसे देखकर भी पहचान नहीं पाते।
पायरिला है या कुछ और, ऐसे पहचानें
पहला संकेत पत्ती के नीचे की तरफ मिलता है। पायरिला के बच्चे और बड़े कीट, दोनों पत्ती की निचली सतह पर झुंड में बैठकर रस चूसते हैं। जिस जगह रस चूसा जाता है, वहां पहले पीले धब्बे बनते हैं, फिर पत्ती सूखने लगती है। तेज हमले में पत्तियां झुलसी हुई दिखती हैं।
दूसरा संकेत काला रंग है। यह कीट रस चूसने के बाद शहद जैसा चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है, जिसे हनीड्यू कहते हैं। इस पर काली फफूंद जम जाती है, जिसे सूटी मोल्ड कहते हैं। काली परत से धूप पत्ती तक नहीं पहुंचती और खाना बनाने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। पत्तियां पीली होने के साथ-साथ काली भी पड़ रही हैं, तो यह पायरिला की सबसे पक्की निशानी है।
तीसरा संकेत झुंड है। यह कीट अकेला नहीं आता। एक पत्ती पर दर्जनों कीट एक साथ बैठे मिलते हैं। पत्ती हिलाने पर छोटे-छोटे कीट उछलते हुए दिखते हैं और कभी-कभी टिक-टिक जैसी हल्की आवाज भी सुनाई देती है। ज्यादा नमी और घनी बढ़वार वाले खेतों में इसका हमला तेज होता है।
चौथा संकेत चीनी में कमी है। पत्ती कमजोर होगी तो रस में चीनी भी कम बनेगी। अध्ययनों में पायरिला के तेज हमले से रस में चीनी की मात्रा में 30 प्रतिशत तक की कमी दर्ज हुई है। यानी कीट सीधे किसान की कमाई पर हमला करता है। पेड़ी फसल पर इसका असर और भी ज्यादा होता है, क्योंकि कमजोर पेड़ी अगली फसल की नींव भी कमजोर कर देती है।
जांच का सही तरीका, अंदाजे से नहीं
दवा छिड़कने से पहले खेत की जांच करें। अलग-अलग कोनों से 10 से 15 पत्तियां उठाएं और उनकी निचली सतह देखें। एक पत्ती पर कितने कीट हैं, इसका अंदाजा लगाएं। साथ ही सफेद या भूरे रंग के छोटे कोकून भी देखें। ये कोकून ही इस कहानी के असली हीरो की निशानी हैं।
मित्र कीट से इलाज, सबसे सस्ता और टिकाऊ
कोकून का मतलब है कि खेत में पायरिला का दुश्मन पहले से मौजूद है। इस दुश्मन का नाम एपिरिकेनिया मेलानोल्यूका है, एक छोटा परजीवी कीट जो पायरिला के बच्चों और बड़े कीटों पर पलता है। जहां यह जम जाता है, वहां अक्सर दवा की जरूरत ही नहीं पड़ती।
लखनऊ के गन्ना अनुसंधान संस्थान ने यूपी के तीन चीनी मिल क्षेत्रों में पायरिला के प्रकोप के दौरान इस परजीवी से नियंत्रण का सफल प्रयोग किया था। करीब 40,000 हेक्टेयर क्षेत्र में परजीवी वाली पत्तियों को बांटकर फैलाया गया और पायरिला काबू में आ गई। कीटनाशक न छिड़कने से प्रति हेक्टेयर करीब 1,600 रुपये की बचत भी हुई थी।
सिफारिश के अनुसार, प्रति हेक्टेयर 4,000 से 5,000 कोकून या 4 से 5 लाख अंडे छोड़े जाते हैं। अगर अंडे उपलब्ध न हों तो 10,000 कोकून प्रति हेक्टेयर तक छोड़े जा सकते हैं। जल्दी स्थापना के लिए जुलाई-अगस्त में कम से कम 1,000 जीवित कोकून प्रति हेक्टेयर छोड़ना मददगार है। परजीवी वाली पत्तियों के छोटे टुकड़े काटकर गन्ने की पत्तियों के नीचे स्टेपलर से लगाए जाते हैं।
सबसे अहम नियम यह है कि जिस खेत में यह परजीवी छोड़ा गया हो या पहले से दिख रहा हो, वहां कीटनाशक न छिड़कें। कीटनाशक मित्र कीट को भी मार देता है और फिर पायरिला बेखौफ बढ़ता है। अगर एक पत्ती पर 1 से 5 कोकून दिख रहे हों और पायरिला की संख्या प्रति पत्ती 20 से 150 के बीच हो, तो दवा छिड़कनी ही नहीं चाहिए। जिस खेत में परजीवी जम गया हो, वहां कटाई के बाद पत्ती-पत्तन भी नहीं जलाना चाहिए, क्योंकि उसी में परजीवी की अगली पीढ़ी पलती है।
दवा कब और कैसे, जब मित्र कीट न हो
अगर खेत में परजीवी बिल्कुल नहीं दिख रहा और पायरिला तेजी से बढ़ रही है, तब जरूरत के हिसाब से दवा का रास्ता अपनाया जाता है। समेकित कीट प्रबंधन की सिफारिशों में मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी की 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव बताया गया है। एक जैविक विकल्प मेटाराइजियम एनिसोप्ली नामक फफूंद आधारित पाउडर है, जिसकी 40 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की दर से छिड़काव की सलाह दी जाती है।
दवा छिड़कते समय लेबल की मात्रा से ज्यादा न डालें। ज्यादा मात्रा से कीट जल्दी नहीं मरता, उल्टा मित्र कीट मरते हैं और खर्च बढ़ता है। छिड़काव सुबह या शाम को करें, जब हवा शांत हो। छिड़काव करने वाले को मुंह, नाक और हाथ ढककर रखना चाहिए और बाद में हाथ-मुंह अच्छी तरह धोना चाहिए। प्रकोप बड़े क्षेत्र में फैल गया है तो गन्ना समिति या कृषि विभाग से संपर्क करें, ताकि आसपास के खेतों में भी एक साथ कार्रवाई हो सके।
वे गलतियां जो नुकसान बढ़ा देती हैं
सबसे बड़ी गलती है पत्ती का कालापन देखकर फफूंद की दवा छिड़क देना। कालापन बीमारी नहीं, पायरिला के हनीड्यू पर जमी फफूंद है। जब तक कीट काबू में नहीं आएगा, कालापन वापस आता रहेगा। दूसरी गलती है पहली झलक में ही तेज कीटनाशक छिड़क देना, जिससे मित्र कीट मर जाते हैं और अगले हफ्ते पायरिला दोगुनी ताकत से लौटता है। तीसरी गलती है सिर्फ अपने खेत का इलाज करना, जबकि पड़ोसी खेत में कीट भरा पड़ा हो। पायरिला एक खेत से दूसरे खेत में आसानी से चला जाता है, इसलिए गांव स्तर पर एक साथ कार्रवाई ही टिकाऊ हल है।
मुख्य बातें
- पायरिला पत्ती के नीचे झुंड में रस चूसता है, पत्ती पीली पड़ती है और हनीड्यू पर काली फफूंद जमती है, जिससे चीनी तक घट जाती है।
- मित्र कीट एपिरिकेनिया के 4,000 से 5,000 कोकून प्रति हेक्टेयर छोड़ना सबसे सस्ता नियंत्रण है, और जहां यह दिखे वहां दवा नहीं छिड़कनी चाहिए।
- परजीवी न होने पर ही जरूरत के हिसाब से मैलाथियान 2 मिली प्रति लीटर या मेटाराइजियम 40 ग्राम प्रति 10 लीटर का छिड़काव करें, लेबल की मात्रा से ज्यादा नहीं।
स्रोत: भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ (Sugar Tech में प्रकाशित पायरिला जैव-नियंत्रण अध्ययन), वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट का पायरिला प्रबंधन नोट और कृषि विज्ञान केंद्रों की समेकित कीट प्रबंधन सिफारिशें।
