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गन्ना गिर रहा है, मिठास कम आती है? पोटाश की सही खुराक से तना मज़बूत, चीनी भी बढ़ेगी

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 31 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ना गिर रहा है, मिठास कम आती है? पोटाश की सही खुराक से तना मज़बूत, चीनी भी बढ़ेगी

पिछले साल हवा के एक तेज झोंके में मुज़फ़्फ़रनगर के एक किसान का खेत देखने लायक नहीं रहा। गन्ना लंबा था, हरा था, वजन भी ठीक-ठाक था। पर आधा खेत ज़मीन पर लेटा हुआ था, कटाई में दिक्कत हुई और मिल में मिठास भी उम्मीद से कम निकली। बाद में हिसाब लगाया तो पता चला कि उसने सीजन भर यूरिया और डीएपी पर पूरा ज़ोर दिया था, पर पोटाश की तरफ ध्यान ही नहीं गया था। पश्चिमी यूपी के कई खेतों में यही पैटर्न है। यूरिया की हरियाली देखकर फसल ठीक लगती है, पर कमज़ोरी तब खुलती है जब गन्ना गिरता है या चीनी कम आती है।

पोटाश गन्ने में असल में क्या करता है

पोटाश तने की दीवारों को मज़बूत करता है, जिससे गन्ना हवा में कम गिरता है। यह पौधे में पानी का संतुलन बनाए रखता है, इसलिए सूखे के दिनों में फसल ज़्यादा दिन टिकती है। सबसे बड़ा काम यह है कि पत्तियों में बनी चीनी को तने तक पहुंचाने में मदद करता है। पत्ती चीनी बनाती है, पर तने तक पहुंचाने का रास्ता पोटाश ही खोलता है। इसीलिए कमी में हरा गन्ना भी मिठास में पीछे रह सकता है।

गन्ना ज़मीन से बहुत ज़्यादा पोषक तत्व उठाता है। कृषि जागरण के मुताबिक 70 से 80 टन प्रति हेक्टेयर उपज देने वाली फसल ज़मीन से लगभग 120 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर तक खींच लेती है। जो किसान साल-दर-साल सिर्फ यूरिया डालता है, वह अनजाने में अपने खेत को पोटाश के मामले में खाली करता जाता है।

कमी पहचानें: पत्तियां पहले बता देती हैं

पोटाश की कमी सबसे पहले पुरानी पत्तियों पर दिखती है। पत्ती के किनारे पीले पड़ने लगते हैं, फिर सूखकर भूरे हो जाते हैं। पौधा कमज़ोर दिखता है, तने पतले रह जाते हैं, फसल हवा में आसानी से गिर जाती है और सूखे में जल्दी मुरझाती है।

पत्ती का पीलापन हर बार पोटाश की कमी नहीं होता। नई पत्ती पीली पड़े तो वह ज़िंक या आयरन की कमी भी हो सकती है। पोटाश की पहचान यह है कि असर पुरानी, नीचे वाली पत्तियों के किनारों से शुरू होता है। लक्षण दिखे तो मिट्टी जांच से कमी पक्की करें।

कितना डालें: प्रति एकड़ का हिसाब

एक ही नंबर सब खेतों पर लागू नहीं होता, इसलिए रेंज समझें। देहात की गन्ना खाद सलाह के मुताबिक एक एकड़ में बेसल डोज़ के तौर पर करीब 40 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) डाला जाता है, साथ में पूरी डीएपी और एक तिहाई यूरिया। एक अन्य सलाह में बुवाई के समय प्रति एकड़ 50 किलो एमओपी का ज़िक्र है। नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के एक उदाहरण में पूरे सीजन में प्रति एकड़ करीब 84 किलो एमओपी दो किस्तों में दिया गया, आधी बुवाई पर और आधी करीब साढ़े चार से पांच महीने बाद।

प्रदेश के सात ज़िलों के 161 प्रदर्शन खेतों में सामान्य खाद के साथ प्रति हेक्टेयर 150 किलो एमओपी, यानी प्रति एकड़ करीब 60 किलो, देने पर उपज में 15 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई।

व्यावहारिक हिसाब यह बनता है। बुवाई पर 40 से 50 किलो एमओपी प्रति एकड़ डालें, फिर कल्ले और बढ़वार में बाकी किस्त डालें, ताकि सीजन की कुल खुराक 60 से 85 किलो प्रति एकड़ के आसपास पहुंचे। मिट्टी जांच के हिसाब से इसे घटाएं-बढ़ाएं, और कृषि विज्ञान केंद्र या मिल के कृषि अधिकारी से सलाह लें। एमओपी में करीब 60 प्रतिशत पोटाश होता है, इसलिए तत्व के हिसाब से गणना करें।

कब और कैसे डालें

पोटाश को भी किस्तों में देना बेहतर रहता है। बुवाई के समय इसे कूंड या नाली में मिट्टी के साथ मिलाकर डालें, ताकि जड़ों के पास पहुंचे। दूसरी किस्त कल्ले और बढ़वार के दौर में कतार के पास डालें। खाद के बाद हल्की सिंचाई ज़रूरी है, ताकि खाद घुलकर जड़ों तक पहुंचे। सूखी मिट्टी पर बिखेरकर छोड़ देना कम असर करता है। पूरी खुराक एक ही बार में डालना भी गलती है, क्योंकि बाद में जब गन्ना लंबाई और मिठास बना रहा होता है, तब ज़मीन में पोटाश घट चुका होता है।

एमओपी या एसओपी: कौन सा चुनें

आम खेतों के लिए एमओपी ही सामान्य और सस्ता विकल्प है। इसमें करीब 60 प्रतिशत पोटाश होता है और गन्ना इसे अच्छी तरह सहन करता है। एसओपी, यानी पोटेशियम सल्फेट, में करीब 50 प्रतिशत पोटाश के साथ गंधक भी मिलता है। यह तब काम आता है जब पत्तियों पर छिड़काव करके तुरंत कमी दूर करनी हो। देहात की सलाह के मुताबिक खड़ी फसल में 2 से 4 प्रतिशत पोटेशियम सल्फेट के घोल का छिड़काव किया जा सकता है, और एसओपी 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से पत्तियों पर छिड़का जाता है। छिड़काव मिट्टी वाली खुराक की जगह नहीं लेता। यह तुरंत इलाज है, पूरे सीजन की ज़रूरत मिट्टी की खुराक ही पूरी करती है।

पेड़ी गन्ने में पोटाश और भी ज़रूरी

पेड़ी में यह बात और अहम है। मुख्य फसल ज़मीन से बड़ी मात्रा में पोटाश उठा लेती है, इसलिए पेड़ी में नई खुराक न दी गई तो अगली फसल उसी खाली ज़मीन से शुरुआत करती है। कटाई के बाद पेड़ी की पहली देखभाल के साथ पोटाश की किस्त भी जोड़ लें।

पोटाश चमत्कारी खाद नहीं है और यूरिया की जगह नहीं लेता। पर जिस खेत में यह छूट रहा है, वहां सही मात्रा और सही समय पर इसे जोड़ना तने की मज़बूती और मिठास दोनों में फर्क डालता है।

मुख्य बातें

  • गन्ने में पोटाश तने को मज़बूत करता है, सूखा झेलने की ताकत देता है और पत्तियों से चीनी तने तक पहुंचाता है।
  • बुवाई पर प्रति एकड़ 40 से 50 किलो एमओपी डालें, फिर बढ़वार में दूसरी किस्त के साथ सीजन की कुल खुराक 60 से 85 किलो प्रति एकड़ के आसपास रखें, मिट्टी जांच के हिसाब से घटा-बढ़ाकर।
  • कमी पुरानी पत्तियों के किनारों से शुरू होती है। लक्षण दिखें तो मिट्टी जांच कराएं और स्थानीय सलाह से पोटेशियम सल्फेट का छिड़काव करें।

स्रोत: देहात गन्ना उर्वरक प्रबंधन व पोषक तत्व प्रबंधन सलाह, कृषि जागरण गन्ना पोषक तत्व आकलन, नवसारी कृषि विश्वविद्यालय गन्ना खाद उदाहरण, उत्तर प्रदेश में पोटाश परीक्षणों पर आईसीएल शोध सारांश।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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