गन्ने में फूल (तुण) दिखा? इस खेत की कटाई सबसे पहले कराओ — 3-4 महीने में वजन-चीनी सुरक्षित

अक्टूबर की शुरुआत में एक दिन सुबह खेत पहुंचे, तो गन्ने के तनों के ऊपर सफेद-भूरे रंग की लंबी बालियां झूल रही थीं। गांव में इसे तुण कहते हैं, खेती की भाषा में पुष्पन। पहली बार देखने वाला सोच सकता है कि फसल तो खूब फल-फूल रही है। लेकिन जिस किसान ने दो-तीन पेराई सत्र देखे हैं, वह इस नजारे को देखकर चौकन्ना हो जाता है। गन्ने में फूल आना यानी फसल की बढ़त का रुक जाना, चीनी का टूटना और वजन का घटना। सवाल यह नहीं है कि नुकसान होगा या नहीं, सवाल यह है कि आप कटाई में कितनी देर करते हैं।
खुशखबरी पहले: फूल आने के बाद नुकसान एक ही दिन में नहीं होता। गन्ना प्रजनन संस्थान के प्रयोगों में देखा गया है कि फूल निकलने के 3-4 महीने के अंदर अगर गन्ने की कटाई हो जाए, तो फूल न आए गन्ने के मुकाबले उपज में नुकसान नहीं होता। नुकसान तब शुरू होता है जब फूल आई फसल महीनों तक खेत में खड़ी रह जाती है। यानी आपकी असली लड़ाई फूल से नहीं, देरी से है।
फूल आते ही गन्ने के अंदर क्या होता है
गन्ना लघु-दिवस पौधा है। अक्टूबर-नवंबर में जब दिन छोटे और रातें लंबी-ठंडी होने लगती हैं, तो पौधे के शीर्ष हिस्से में फूल बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। एक बार फूल बनना शुरू हो जाए, तो तने की बढ़त थम जाती है और फसल पकने की अवस्था में चली जाती है।
अगर इस समय कटाई में देर हो जाए, तो तने के अंदर चीनी का टूटना (शुगर रिवर्शन) शुरू हो जाता है, रेशे की मात्रा बढ़ती है और तना पोला या खोखला होने लगता है। महाराष्ट्र के चीनी मिल क्षेत्र के विशेषज्ञों के एक आकलन में बताया गया कि जब परिपक्व गन्ना खेत में डेढ़-दो महीने से ज्यादा खड़ा रह जाता है, तो तने फटने और पोले होने लगते हैं, और उपज में लगभग 5 प्रतिशत तक का नुकसान संभव है। फूले हुए तनों की चीनी भी कम निकलती है, क्योंकि उसमें चीनी टूटकर सरल शर्कराओं में बदलने लगती है।
सबसे पहला काम: फूल वाले खेत को कटाई की कतार में आगे लाओ
यहीं पर ज्यादातर किसान चूक जाते हैं। वे फूल देखते हैं, चिंता करते हैं, लेकिन कटाई का नंबर उसी क्रम में आने देते हैं जो समिति के कैलेंडर में पहले से तय है। सही रणनीति इसके उलट है: जिस खेत में फूल दिखा हो, उसे मिल के इंडेंट में सबसे आगे लगाओ।
पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही अपनी गन्ना समिति के सचिव या मिल के गन्ना प्रभारी से बात करें और बताएं कि किस खेत (किस सट्टे) में फूल आ गया है। पर्ची जारी होने के क्रम में फूल वाली फसल को प्राथमिकता दिलाने की मांग रखें। कई मिलें ऐसी फसल की कटाई-तौल को आगे रखती हैं, बशर्ते किसान समय पर सूचना दे। तौल केंद्र पर भी फूल वाले गन्ने की ट्रॉली को इंतजार न करना पड़े, इसका ध्यान रखें। कटाई के बाद खेत में गन्ना पड़ा न रहे, उसी दिन तौल तक पहुंचे।
एक और बात: फूल आई फसल की कटाई के लिए मजदूरों का इंतजाम भी पहले से कर लें। सीजन के बीच में मजदूर मिलना मुश्किल होता है, और हर हफ्ते की देरी तनों को और पोला करती जाती है।
जब तुरंत कटाई मुमकिन न हो: तुण निकालना
कभी मिल का नंबर देर से आता है, कभी मौसम साथ नहीं देता। ऐसी स्थिति में खेत में जाकर निकली हुई बालियों को नीचे से काटकर बाहर निकाल दें। बाली फसल की बढ़त की ऊर्जा खाती है, और उसे हटाने से नुकसान की रफ्तार धीमी पड़ती है। यह कोई स्थायी इलाज नहीं, बस समय खरीदने का तरीका है। साथ में पत्तियों की सूखी चादर (trash) भी हटा दें, ताकि खेत में नमी और हवा का संतुलन बना रहे।
बीज के लिए फूल वाला गन्ना न लें
एक गलती जो लंबे समय तक भारी पड़ती है: फूल आए तनों को अगले सीजन के बीज के लिए काट लेना। फूली हुई फसल के तनों की आंखें कमजोर होती हैं, जमाव गिरता है और अगली फसल की शुरुआत ही दबी रहती है। बीज हमेशा ऐसे खेत से लें जिसमें फूल न आया हो, तने मोटे और स्वस्थ हों। अगर खुद के खेत में सभी खेतों में फूल आ गया है, तो मिल की नर्सरी या प्रमाणित बीज स्रोत से बीज लें।
अगले सीजन की तैयारी: किस्म का चुनाव
जिन इलाकों में हर साल फूल ज्यादा आता है, वहां अगली बुवाई से पहले कम फूल वाली या फूल-रहित किस्मों के बारे में अपने कृषि विज्ञान केंद्र या मिल के गन्ना विकास विभाग से सलाह जरूर लें। कुछ इलाकों में फूल एक क्षेत्रीय समस्या है, और सही किस्म चुनना ही सबसे सस्ता बचाव है।
याद रखें: फूल आना फसल का अंत नहीं है। अंत तब होता है जब फूल आई फसल खेत में महीनों पड़ी रहती है और मिल का नंबर आता-आता रह जाता है। अक्टूबर में फूल देखा, तो नवंबर-दिसंबर में उसकी कटाई करा लेना ही सबसे बड़ा उपाय है।
मुख्य बातें
- गन्ने में फूल (तुण) आते ही बढ़त रुकती है; देर से कटाई पर चीनी टूटती है और तना पोला होता है — फूल आने के 3-4 महीने के अंदर कटाई हो जाए तो नुकसान नहीं होता।
- फूल वाले खेत को मिल के इंडेंट/पर्ची क्रम में सबसे आगे लगवाएं, समिति को समय पर सूचना दें और तौल तक देर न करें।
- बीज के लिए फूल आई फसल न लें; अगले सीजन के लिए कम फूल वाली किस्मों पर कृषि विज्ञान केंद्र या मिल से सलाह लें।
स्रोत: गन्ना खेती प्रबंधन पर कृषि प्रसार साहित्य (पुष्पन नियंत्रण खंड); गन्ना प्रजनन संस्थान के प्रयोगों पर आधारित केन प्रोडक्शन मैनुअल; महाराष्ट्र चीनी मिल क्षेत्र के विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित रिपोर्ट। फोटो: carrotmadman6 / Wikimedia Commons (CC BY 2.0)।
