शरद गन्ने में दिसंबर वाली 53 किलो यूरिया: डालने का सही तरीका और 3 गलतियां

अक्टूबर में गन्ना बोने वाले किसानों के खेत अब हरे-भरे दिख रहे हैं। अंकुरण पूरा हो चुका है, कतारों में छोटे पौधे खड़े हैं। दिसंबर की ठंड शुरू होते ही इन्हीं खेतों में एक काम बाकी रहता है, जिसे बहुत से किसान या तो समय पर नहीं करते या गलत तरीके से कर देते हैं। वह काम है यूरिया की पहली टॉप ड्रेसिंग।
खाद बोरी से खेत तक पहुंचने की बात नहीं है। बात यह है कि खाद खेत की मिट्टी के अंदर, जड़ों के पास, सही मात्रा में और सही समय पर पहुंचे। इस गाइड में हम समझेंगे कि शरदकालीन बुवाई वाले गन्ने में दिसंबर वाली डोज़ क्यों सबसे अहम है, प्रति एकड़ कितनी यूरिया डालें, और कौन-सा तरीका खाद का पूरा फायदा दिलाता है।
यह डोज़ सबसे अहम क्यों है
गन्ने की फसल में नाइट्रोजन की सबसे ज्यादा ज़रूरत बुवाई के 45 से 120 दिनों के बीच होती है। यही वह समय है जब पौधे से कल्ले (टिलर) निकलते हैं। कल्लों की संख्या ही तय करती है कि कटाई के समय खेत में कितने गन्ने मिल में जाने लायक बनेंगे।
अक्टूबर में बोई फसल दिसंबर में बुवाई के करीब 60 दिन पूरे करती है। ठीक इसी समय फसल को नाइट्रोजन की पहली बड़ी खुराक चाहिए। इस समय दी गई खाद पौधे की जड़ों तक पहुंचती है और कल्ले निकलने की प्रक्रिया को तेज़ करती है। अगर यह डोज़ छूट जाए या कम पड़ जाए, तो कल्लों की गिनती घट जाती है, और यह कमी बाद की किसी भी खाद से पूरी नहीं होती।
भारत सरकार के कृषि ज्ञान पोर्टल विकासपीडिया की सिफारिश के अनुसार शरदकालीन बुवाई वाले गन्ने में सिंचाई करके 60 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर (132 किलोग्राम यूरिया) की पहली टॉप ड्रेसिंग की जाती है।
प्रति एकड़ सही मात्रा: हिसाब समझें
कुल सिफारिश मोटे तौर पर 150 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की है। इसका एक तिहाई हिस्सा बुवाई के समय कूड़ों में डाला जाता है, साथ में पूरा फॉस्फोरस (60 किलो) और पोटाश (20 किलो)। यूरिया का बचा हुआ हिस्सा दो टॉप ड्रेसिंग में बंटता है।
पहली टॉप ड्रेसिंग की मात्रा:
| इकाई | यूरिया की मात्रा | नाइट्रोजन |
|---|---|---|
| प्रति हेक्टेयर | 132 किलोग्राम | 60 किलोग्राम |
| प्रति एकड़ | लगभग 53 किलोग्राम | लगभग 24 किलोग्राम |
एकड़ का हिसाब याद रखें: एक हेक्टेयर में करीब 2.47 एकड़ होते हैं, इसलिए 132 किलोग्राम को 2.47 से भाग देने पर लगभग 53 किलोग्राम प्रति एकड़ आता है। एग्रीटेक प्लेटफॉर्म देहात की सिफारिश के अनुसार एक एकड़ गन्ने के खेत में कुल 130 किलोग्राम यूरिया, 52 किलोग्राम डीएपी और 40 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश की ज़रूरत होती है। पहला हिस्सा बेसल डोज़ में और बचा हुआ यूरिया कल्ले आने के समय टॉप ड्रेसिंग के तौर पर दिया जाता है।
मिट्टी परीक्षण करा रखा हो तो मात्रा उसी के अनुसार घटाएं-बढ़ाएं। बिना मिट्टी जांच के यह सिफारिश सुरक्षित और मानक मानी जाती है।
खाद डालने का सही तरीका: बैंड प्लेसमेंट
सबसे बड़ी गलती यही है कि किसान यूरिया को खेत में ऊपर से बिखेर देते हैं। धूप और हवा में बिखेरी गई यूरिया का बड़ा हिस्सा वाष्पीकरण से उड़ जाता है, और जो बचता है वह जड़ों तक नहीं पहुंच पाता। कृषि विज्ञान केंद्रों की सिफारिश के अनुसार सही तरीका बैंड प्लेसमेंट है:
- गन्ने की कतार के बगल में हल या खुरपी से करीब 15 सेंटीमीटर गहरी नाली खोदें। जड़ों के पास, लेकिन तने से सटाकर नहीं।
- इस नाली में यूरिया को एक पट्टी (बैंड) की तरह समान रूप से डालें।
- डालने के तुरंत बाद नाली पर मिट्टी चढ़ाकर खाद को पूरी तरह ढक दें। खुली पड़ी यूरिया हवा से नाइट्रोजन गंवाती है।
- उसी दिन या अगले दिन हल्की सिंचाई कर दें ताकि खाद घुलकर जड़ों तक उतर जाए।
यह तरीका थोड़ा मेहनत मांगता है, लेकिन इससे खाद का पूरा फायदा मिलता है। मजदूर कम हों तो कतार के एक ही तरफ नाली खोद लें। यह भी बिखेरने से कहीं बेहतर है।
खाद के बाद सिंचाई: कितनी और कब
विकासपीडिया की सिफारिश में साफ लिखा है: शरदकालीन गन्ने में सिंचाई कर पहली टॉप ड्रेसिंग करें। यानी खाद डालने के बाद खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। लेकिन यहां संतुलन ज़रूरी है:
- हल्की से मध्यम सिंचाई: खाद घुलेगी और जड़ों तक पहुंचेगी।
- ज़रूरत से ज्यादा सिंचाई: घुली हुई नाइट्रोजन नीचे बह जाएगी और फसल को नहीं मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी है कि खाद के बाद की सिंचाई ज़्यादा न हो, क्योंकि अत्यधिक पानी पोषक तत्वों को बहा ले जाता है।
सीधा नियम: खेत में पानी खड़ा न हो, लेकिन नमी जड़ों की गहराई तक पहुंचे। अगर बूंद-बूंद सिंचाई या स्प्रिंकलर है, तो वह इस काम के लिए सबसे अच्छा है।
खाद बर्बाद करने वाली 3 गलतियां
1. सूखी ज़मीन पर यूरिया बिखेरना। नमी के बिना यूरिया का अमोनिया हवा में उड़ जाता है। बिना सिंचाई की गारंटी के खाद डालना पैसे को हवा में उड़ाने जैसा है।
2. खाद डालकर बाढ़ जैसी सिंचाई करना। दिसंबर में कई किसान खाद के बाद खेत को पूरी तरह भर देते हैं। नाइट्रोजन पानी के साथ नीचे की मिट्टी में बह जाती है, जड़ें खाली हाथ रह जाती हैं।
3. पहली डोज़ में देरी करना। कल्ले निकलने की खिड़की बुवाई के 45-120 दिनों तक ही खुलती है। फरवरी-मार्च में दी गई खाद इस डोज़ की भरपाई नहीं करती। उस समय पौधा कल्लों के बजाय लंबाई और मोटाई पर ध्यान देता है।
पेड़ी (रटून) रखने वालों के लिए एक नोट: पेड़ी में अंकुरण पहले से शुरू होता है, इसलिए खाद डालने में देरी न करें।
मुख्य बातें
- अक्टूबर में बोए गन्ने में दिसंबर में पहली टॉप ड्रेसिंग का समय आता है। प्रति एकड़ लगभग 53 किलोग्राम यूरिया डालें।
- यूरिया को बिखेरें नहीं: कतार के बगल में 15 सेंटीमीटर गहरी नाली में बैंड बनाकर डालें और मिट्टी से ढक दें।
- खाद के बाद हल्की सिंचाई ज़रूरी है, लेकिन ज़्यादा पानी नाइट्रोजन बहा ले जाता है। संतुलन रखें।
स्रोत: विकासपीडिया (भारत सरकार-समर्थित कृषि ज्ञान पोर्टल), देहात एग्रीटेक, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) कृषि विज्ञान दिशानिर्देश।
