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पेड़ी गन्ने से मुख्य फसल जितनी उपज? ये 5 काम कटाई के तुरंत बाद करें

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 01 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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पेड़ी गन्ने से मुख्य फसल जितनी उपज? ये 5 काम कटाई के तुरंत बाद करें

मिलों का पहिया घूमने लगा है और खेतों में गन्ना कट रहा है। अब कटे खेत को देखकर ज्यादातर किसान एक ही फैसला लेते हैं: जो मिला सो मिला, अगली फसल अपने आप खड़ी हो जाएगी। यहीं से पेड़ी का खेल बिगड़ना शुरू होता है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक कहते हैं कि कटाई के बाद सही पेड़ी प्रबंधन किया जाए तो उपज मुख्य फसल के बराबर तक मिल सकती है। लागत भी कम, क्योंकि दोबारा बुवाई का खर्च ही नहीं।

रिसर्च की बात भी यही कहती है। मुरादनगर (उत्तर प्रदेश) के गन्ना अनुसंधान संस्थान में हुए ट्रायल में पाया गया कि ट्रैश मल्चिंग और ठूंठ प्रबंधन जैसे काम अपनाने से पेड़ी की उपज पत्तियां जलाने वाले खेत से 23 से 29 प्रतिशत तक ज्यादा मिली। भारत में गन्ने का आधे से ज्यादा रकबा पेड़ी पर ही है, इसलिए यह फसल सिर्फ “बोनस” नहीं, आधी खेती है।

तो कटाई के तुरंत बाद करने वाले वे 5 काम कौन से हैं? पहला: ठूंठों को जमीन के बराबर छांटना। दूसरा: मुख्य फसल से 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद की खुराक जड़ों के पास देना। तीसरा: कटी पत्तियों को जलाने की बजाय खेत में बिछाना। चौथा: शुरुआती 60 दिनों में हल्की सिंचाई और समय पर निराई-गुड़ाई। पांचवां: खाली खांचियों में पौध लगाकर गैप भरना। नीचे हर काम की विधि विस्तार से दी गई है।

1. ठूंठों को जमीन के बराबर छांटें

गन्ना हमेशा जमीन की सतह से सटाकर काटें। अगर कटाई थोड़ी ऊपर से हो गई है तो धारदार गंडासे या स्टबल शेवर से बचे ठूंठों को जमीन के बराबर कर दें। इससे मिट्टी के नीचे के गठानों (बड्स) से मजबूत कल्ले निकलते हैं और नई जड़ें गहराई में उतरती हैं।

कटे ठूंठों पर फफूंद का हमला होने का डर रहता है। इससे बचाव के लिए कार्बेंडाजिम के घोल का छिड़काव करें, ताकि मिट्टी की बीमारियां नए कल्लों को नुकसान न पहुंचाएं। पेड़ी की शुरुआती बढ़त को सुरक्षित रखने का यह सबसे सस्ता और आसान तरीका है।

2. खाद का पहला कौर: 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन

पेड़ी को मुख्य फसल की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत होती है। ठूंठ छंटाई के बाद बेसल खुराक दें: प्रति एकड़ लगभग 50 किलो डीएपी, 40 किलो पोटाश, 140 किलो यूरिया, 10 किलो जिंक सल्फेट और 500 किलो सड़ी गोबर खाद या प्रेसमड कंपोस्ट। खाद को ऊपर से फेंकने की बजाय जड़ों के पास मिट्टी दबाकर देना चाहिए।

नाइट्रोजन और पोटाश की बाकी खुराक को 30वें और 60वें दिन दो हिस्सों में दें। पीलापन दिखे तो जिंक सल्फेट और फेरस सल्फेट का छिड़काव करें, इससे पौधों की हरियाली बढ़ती है। ध्यान रहे, खाद देते समय खेत में नमी होना जरूरी है, सूखे खेत में खाद देना पैसे की बर्बादी है।

3. पत्तियां जलाएं नहीं, खेत में बिछाएं

गन्ना काटने के बाद खेत में पड़ी सूखी पत्तियों को कतारों के बीच फैला दें या मल्चर से काटकर मिट्टी में मिला दें। इस ट्रैश मल्चिंग से नमी बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और जमीन में जैविक कार्बन बढ़ता है। मुरादनगर ट्रायल में 8 टन प्रति हेक्टेयर मल्चिंग वाले खेतों में उपज में बढ़ोतरी के साथ लागत में भी 25 से 30 प्रतिशत की बचत दर्ज हुई।

पत्तियां जलाने पर अब रोक भी है और फायदा भी नहीं। बुआई से पहले मल्चिंग के लिए यंत्र गन्ना समितियों के फार्म मशीनरी बैंक में उपलब्ध रहते हैं, जहां से किराये पर लेकर यह काम कराया जा सकता है।

4. शुरुआती 60 दिन: सिंचाई और निराई तय करते हैं उपज

पेड़ी में हल्की सिंचाई दें ताकि जड़ें और कोंपलें अच्छी तरह निकलें। खरपतवार पेड़ी में मुख्य फसल से भी तेजी से उगते हैं, इसलिए पहले 30 से 60 दिनों में निराई-गुड़ाई जरूर करें। मिट्टी का हल्का होना जरूरी है ताकि जड़ों को हवा मिले। इसके लिए जून के आसपास मिट्टी चढ़ाने (अर्थिंग अप) का काम करें, जिससे पौधे मजबूत खड़े रहें और गिरें नहीं।

पेड़ी फसल मुख्य फसल से करीब एक महीना पहले पकती है, इसलिए पेराई सत्र शुरू होने पर आपकी पर्ची पहले कटने की संभावना रहती है। जल्दी कटाई का मतलब होता है जल्दी भुगतान।

5. खाली खांची में नई पौध लगाएं

जहां 60 सेंटीमीटर से ज्यादा की दूरी तक पौधे न दिखें, उसे गैप मानें। ऐसे खांचों में कल्लों वाले गुच्छे को जड़ से निकालें, चार हिस्सों में काटें और क्लोरपायरीफॉस व कार्बेंडाजिम के घोल में डुबोकर लगा दें, फिर तुरंत पानी दें। नर्सरी में तैयार पौधे भी लगाए जा सकते हैं।

पौधों की संख्या ही उपज की नींव है। खाली खांची छोड़ने से खरपतवार बढ़ते हैं और प्रति एकड़ गन्ने की संख्या घट जाती है।

6. रैटून मैनेजर: एक मशीन, पांच काम

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की रैटून मैनेजर मशीन एक ही फेरे में ठूंठ छंटाई, जुताई, खाद-कीटनाशक डालना, निराई और मिट्टी चढ़ाना कर देती है। 35 एचपी ट्रैक्टर से चलने वाली यह मशीन एक हेक्टेयर खेत लगभग 4 से 5 घंटे में तैयार कर देती है।

सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के अनुसार यह यंत्र मंडल की सभी गन्ना समितियों के फार्म मशीनरी बैंक में उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन किसानों के पास खुद की मशीन नहीं, वे समिति से किराये पर लेकर कटाई के तुरंत बाद पेड़ी का प्रबंधन करा सकते हैं।

मुख्य बातें

  • कटाई जमीन से सटाकर करें, बचे ठूंठों को गंडासे या स्टबल शेवर से बराबर करें और कार्बेंडाजिम का छिड़काव करें।
  • पेड़ी को मुख्य फसल से 25% ज्यादा नाइट्रोजन चाहिए: प्रति एकड़ DAP 50 किलो, पोटाश 40 किलो, यूरिया 140 किलो, जिंक सल्फेट 10 किलो के साथ 500 किलो गोबर खाद जड़ों के पास मिट्टी दबाकर दें।
  • पत्तियां जलाएं नहीं: कतारों के बीच मल्चिंग करें, शुरुआती 60 दिन में हल्की सिंचाई और निराई-गुड़ाई करें, और 60 सेमी से बड़े गैप में पौध लगाएं।

स्रोत: उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक (News18/लोकल18, फरवरी 2026); भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ (रैटून मैनेजर मशीन विनिर्देश); गन्ना अनुसंधान संस्थान, मुरादनगर ट्रायल (जर्नल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस); उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह, सहारनपुर (हिंदुस्तान/चिनीमंडी रिपोर्ट)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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