गन्ने की पत्तियां जलाईं तो ₹15,000 तक जुर्माना — सरकार मशीन पर दे रही 80% अनुदान

अक्टूबर चढ़ते ही पश्चिमी और पूर्वी यूपी के गन्ना बेल्ट में रौनक बढ़ जाती है। मिलें चलने की तैयारी कर रही हैं और जिन खेतों में कटाई निपट गई है, वहां सूखी पत्तियों के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। अब हर किसान के दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा है। इन पत्तियों का किया क्या जाए? पुरानी आदत कहती है आग लगाओ और खेत साफ करो। लेकिन इस बार आग लगाने की कीमत पहले से ज्यादा हो सकती है, क्योंकि फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना अब सैटेलाइट निगरानी के साथ वसूला जा रहा है।
न्यूज18 की एक रिपोर्ट (1 सितंबर 2026, मुरादाबाद) के मुताबिक, फसल अवशेष जलाते हुए पकड़े जाने पर नियमानुसार 2,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से जुर्माना लगाया जा सकता है। संत कबीर नगर के कृषि विभाग ने तो सीधे चेताया है कि फसल अवशेष जलाने पर 15 हजार रुपये तक का अर्थदंड और सैटेलाइट से निगरानी रखी जा रही है। यानी रकबा जितना बड़ा, जुर्माना उतना भारी। मुरादाबाद के उप कृषि निदेशक रवि कांत का कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद किसानों पर बोझ डालना नहीं, बल्कि उन्हें अवशेषों के सही इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना है।
CRM योजना: जुर्माने से बचने का सरकारी रास्ता
इसी जुर्माने के डर के बीच सरकार ने किसानों के लिए दूसरा रास्ता भी खोला है। फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत किसान गन्ने की पत्तियों और पराली को खेत में ही मिलाने वाली मशीनें अनुदान पर ले सकते हैं।
न्यूज18 की उसी रिपोर्ट में मुरादाबाद के उप कृषि निदेशक ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जरूरी कृषि यंत्रों की बुकिंग कराई जा रही है और इन यंत्रों पर किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इन मशीनों से पत्तियां खेत में ही मिल जाती हैं। इससे खेत में जैव-भार बढ़ता है, मिट्टी की दशा सुधरती है और लंबे समय में रासायनिक खाद की जरूरत भी घटती है।
एकल यंत्र पर 50%, हायरिंग सेंटर पर 80%
अनुदान की दरें यंत्र के प्रकार पर निर्भर करती हैं। ईटीवी भारत की प्रयागराज रिपोर्ट (1 अगस्त 2026) के अनुसार, एकल कृषि यंत्रों पर किसानों को लागत पर अधिकतम 50 प्रतिशत तक सीधी सब्सिडी दी जाती है। वहीं फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर बनाने पर 80 प्रतिशत तक का अनुदान मिलता है। जिन किसानों के पास अपनी मशीन खरीदने की क्षमता नहीं है, वे इन केंद्रों से किराए पर यंत्र लेकर काम करा सकते हैं।
कौन से यंत्रों पर मिलेगा फायदा
संत कबीर नगर में कृषि विभाग ने साफ किया है कि पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, स्ट्रा रीपर, मल्चर, पैडी स्ट्रा चॉपर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, स्ट्रा रेक और बेलर जैसे यंत्रों पर 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इन यंत्रों से पत्तियों को खेत में ही सड़ाकर खाद में बदला जा सकता है। गन्ना किसान के लिए मल्चर और श्रब मास्टर सीधे काम के यंत्र हैं, क्योंकि कटाई के बाद बची सूखी पत्तियों को इन्हीं से निपटाया जाता है।
एक सख्त नियम कम्बाइन हार्वेस्टर वालों के लिए भी है। विभाग ने कहा है कि कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। संचालक की जिम्मेदारी होगी कि कटाई के साथ अवशेष निपटाए, नहीं तो हार्वेस्टर जब्त कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बुकिंग कैसे कराएं
ईटीवी भारत की लखनऊ रिपोर्ट (27 फरवरी 2026) के अनुसार, कृषि यंत्रों की बुकिंग कृषि विभाग के पोर्टल agridarshan.up.gov.in पर ऑनलाइन होती है। किसान “किसान कॉर्नर” में जाकर “यंत्र बुकिंग प्रारंभ” लिंक पर क्लिक करके जनपदवार आवेदन कर सकते हैं। चयन पारदर्शी तरीके से होता है। अगर लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आएं तो ई-लॉटरी से चयन किया जाता है। प्रयागराज में विभाग ने आवेदन के साथ जमानत राशि का नियम भी रखा था, ताकि सिर्फ गंभीर किसान ही आवेदन करें।
इस दौर में ड्रोन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। कृषि ड्रोन की खरीद पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है।
पत्तियां न जलाएं तो क्या-क्या मिलेगा
पत्तियों को जलाने से बचने का फायदा सिर्फ जुर्माने से बचना नहीं है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अवशेषों को खेत में मिलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणु जिंदा रहते हैं और मिट्टी की उर्वरक क्षमता बनी रहती है। जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है और मिट्टी की सेहत भी बिगड़ती है।
एक और रास्ता गोशाला का है। विभाग का कहना है कि धान की पराली या गन्ने की पत्तियां गोशालाओं को दान की जा सकती हैं, जहां सर्दियों में ये पशुओं के चारे और बिछावन के काम आती हैं। गांव-गांव में दीवारों पर पेंटिंग और होर्डिंग के जरिए इसी बात का प्रचार हो रहा है, और प्रगतिशील किसानों को जोड़कर दूसरे किसानों को भी समझाया जा रहा है।
मुख्य बातें
- गन्ने की पत्तियां या फसल अवशेष जलाने पर ₹2,500 प्रति हेक्टेयर की दर से जुर्माना, कुल ₹15,000 तक — सैटेलाइट से निगरानी।
- CRM योजना में अवशेष प्रबंधन यंत्रों पर 80% तक अनुदान; कस्टम हायरिंग सेंटर पर भी 80%, एकल यंत्रों पर अधिकतम 50%।
- बुकिंग agridarshan.up.gov.in पोर्टल पर, चयन ई-लॉटरी से; पत्तियां खेत में मिलाएं या गोशाला को दान करें।
स्रोत: न्यूज18 हिंदी (1 सितंबर 2026, मुरादाबाद); ईटीवी भारत (1 अगस्त 2026, प्रयागराज और 27 फरवरी 2026, लखनऊ); तरुण मित्र (संत कबीर नगर)
