गन्ने की पत्ती जलाई तो ₹30,000 तक जुर्माना: इस बार सैटेलाइट से होगी निगरानी

अक्टूबर लगते ही गन्ना बेल्ट में हलचल बढ़ जाती है। पश्चिमी यूपी की मिलों को 15 अक्टूबर तक पेराई शुरू करने के निर्देश मिल चुके हैं। कटाई के साथ एक पुरानी आदत भी लौटती है — खेत में बची पत्ती और डंठल में माचिस लगा देना। पांच मिनट में खेत साफ, लेकिन इस बार यह आसानी महीनों का पछतावा बन सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पराली जलाने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। टीवी9 हिंदी और ज्ञानओके की रिपोर्टों के मुताबिक शासनादेश में साफ कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पराली जलाने की घटनाओं को शून्य किया जाए। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश हैं कि सैटेलाइट इमेज के जरिए खेतों पर लगातार नजर रखी जाए। यानी अब यह भरोसा नहीं चलेगा कि खेत गांव से दूर है तो कोई देखेगा नहीं — आग की लपट सैटेलाइट तक पहुंचेगी।
हर 50-100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी
इस बार निगरानी सिर्फ ऊपर से नहीं, गांव के स्तर तक उतारी गई है। दोनों रिपोर्टों के अनुसार प्रत्येक 50 से 100 किसानों के समूह पर एक नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी होगी कि उसके इलाके में कोई फसल अवशेष न जलाए। राजस्व, पुलिस, कृषि, ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभागों के कर्मचारी कटाई के दिनों में खेतों का चक्कर लगाएंगे।
पड़ोसी हरियाणा के करनाल में प्रशासन ने निगरानी के लिए रात में ड्रोन तक उतार दिए हैं। यूपी में सैटेलाइट निगरानी का आदेश इसी सख्ती की कड़ी है।
जुर्माना कितना: दो तरह की दरें, सच समझिए
यहां एक बात ध्यान से समझिए, क्योंकि जुर्माने की दरों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। यूपी सरकार के शासनादेश के हवाले से टीवी9 हिंदी और ज्ञानओके ने बताया है कि दो एकड़ से कम जमीन पर ₹2,500, दो से पांच एकड़ तक ₹5,000 और पांच एकड़ से अधिक जमीन पर ₹15,000 की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी।
वहीं केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना में दरें इससे ज्यादा हैं — दो एकड़ से कम पर ₹5,000, दो से पांच एकड़ तक ₹10,000 और पांच एकड़ से अधिक पर ₹30,000 तक प्रति घटना। किसान तक और दैनिक जागरण की रिपोर्टों में इन्हीं बढ़ी हुई दरों का उल्लेख है। दर चाहे जो भी लागू हो, रकम हजारों में है — और मामला सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है।
जुर्माने से आगे: एफआईआर और रिकॉर्ड में दाग
पराली जलाने पर अब एफआईआर तक की कार्रवाई हो रही है। किसान तक की रिपोर्ट के मुताबिक करनाल में आग लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ फसल पोर्टल पर रेड एंट्री की जा रही है। इसका सीधा मतलब है कि ऐसा किसान अगले दो सीजन तक मंडी में अपनी फसल नहीं बेच पाएगा। अमर उजाला की पलवल से 28 सितंबर की रिपोर्ट में भी जुर्माने के साथ एफआईआर और रेड एंट्री जैसी कार्रवाई का जिक्र है।
गन्ना किसानों के लिए यह चेतावनी खास तौर पर अहम है। कानून की नजर में गन्ने की पत्ती भी फसल अवशेष ही है — धान की पराली और गन्ने की पत्ती में कोई फर्क नहीं किया जाता। पत्ती जलाते पकड़े गए तो वही जुर्माना, वही एफआईआर और वही रिकॉर्ड में दाग।
पत्ती जलाने की जगह ये तीन काम करें
सवाल वाजिब है — कटाई के बाद बची पत्ती का करें क्या? खेत अगली बुवाई के लिए जल्दी चाहिए होता है, इसलिए किसान सबसे तेज रास्ता चुनता है। लेकिन कुछ ऐसे विकल्प हैं जिनमें न जुर्माने का डर है, न मिट्टी का नुकसान।
सबसे सीधा तरीका है पत्ती को खेत में ही दबाकर सड़ा देना। पत्ती सड़कर जैविक खाद बन जाती है और मिट्टी की ताकत बढ़ती है — अगली फसल में इसका फायदा दिखता है। दूसरा विकल्प है पत्ती को पशुओं के चारे या बिछावन के तौर पर इस्तेमाल करना। सर्दियों में सूखी पत्ती काम की चीज है। दैनिक जागरण की मुरादाबाद से रिपोर्ट में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को इन्हीं विकल्पों की सलाह दी है।
तीसरा रास्ता मशीनों का है। श्रेडर और बेलर जैसी मशीनें पत्ती को काटकर प्रबंधन योग्य बना देती हैं, और ये कस्टम हायरिंग सेंटर व फार्म मशीनरी बैंक से किराए पर मिल जाती हैं। थोड़ा खर्च आएगा, लेकिन जुर्माने के मुकाबले यह कुछ भी नहीं।
कटाई से पहले ये जांच जरूर कर लें
पेराई सत्र सिर पर है, ऐसे में कटाई शुरू करने से पहले दो काम निपटा लें। पहला — अपना सट्टा और गन्ना पर्ची का रिकॉर्ड जांच लें। रकबा या नाम में गलती हो तो समिति में समय रहते सुधार करा लें। दूसरा — ई-गन्ना ऐप पर अपना विवरण देख लें।
और अगर किसी बात को लेकर उलझन हो तो गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर बात की जा सकती है। पत्ती जलाने से खेत भले साफ दिखे, लेकिन उसकी कीमत अब सिर्फ धुआं नहीं रही। समझदारी इसी में है कि पत्ती को आफत नहीं, खाद समझा जाए।
मुख्य बातें
- सीएम योगी के निर्देश: वित्त वर्ष 2025-26 में पराली जलाने की घटनाएं शून्य करने का लक्ष्य; सैटेलाइट से निगरानी और हर 50-100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी।
- जुर्माना हजारों में: यूपी शासनादेश में ₹2,500 से ₹15,000, केंद्र की अधिसूचना के अनुसार ₹5,000 से ₹30,000 तक प्रति घटना — साथ में एफआईआर और रेड एंट्री की कार्रवाई भी संभव।
- गन्ने की पत्ती भी फसल अवशेष है: इसे जलाने के बजाय खेत में दबाकर खाद बनाएं, चारे में इस्तेमाल करें या किराए की मशीनों से प्रबंधन करें।
स्रोत: टीवी9 हिंदी, ज्ञानओके, किसान तक, दैनिक जागरण, अमर उजाला
