खेती गाइड

गन्ने की पत्ती पीली दिखे तो 3 दिन में करें ये काम, वरना उपज और चीनी दोनों घटेंगी

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 02 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ने की पत्ती पीली दिखे तो 3 दिन में करें ये काम, वरना उपज और चीनी दोनों घटेंगी

नवंबर की सुबह एक किसान ने देखा कि गन्ने के एक हिस्से की पत्तियाँ हल्की पीली पड़ रही हैं। बाकी खेत हरा था, इसलिए लगा कि छोटी सी बात होगी। दो हफ्ते बाद वही हिस्सा और पीला हो गया और बढ़वार भी रुक गई। तब तक पराई का समय आ चुका था और सुधार का मौका हाथ से निकल गया था। पीली पत्ती की कहानी अक्सर ऐसी ही होती है। शुरुआत छोटी दिखती है, इसलिए किसान इंतजार करता है, और इंतजार ही नुकसान बढ़ाता है।

इस गाइड में अगले तीन दिन का प्लान है। पहला दिन पहचान का है, दूसरा दिन सही कदम का है और तीसरा दिन असर परखने का है। इससे गलत इलाज पर पैसा और समय बरबाद नहीं होगा।

पहला दिन: 15 मिनट की जाँच, बिना एक रुपया खर्च किए

दुकान जाने से पहले खेत में 15 मिनट रुकिए और चार सवालों के जवाब नोट कीजिए। पहला, पीलापन नई पत्तियों में है या पुरानी पत्तियों में। पुरानी, नीचे की पत्तियों से शुरू होने वाला पीलापन अक्सर नाइट्रोजन की कमी की ओर इशारा करता है। नई, ऊपर की पत्तियों का पीला होना लोहा या सल्फर जैसे तत्वों की कमी से जुड़ा हो सकता है।

दूसरा, पत्ती पूरी पीली है या नसों के बीच का हिस्सा पीला है। लोहे की कमी में नई पत्ती पीली पड़ती है लेकिन उसकी नसें हरी रहती हैं। यह लक्षण क्षारीय और चूने वाली मिट्टी में ज्यादा दिखता है, जहाँ लोहा मिट्टी में होते हुए भी पौधे को नहीं मिल पाता। सल्फर की कमी में नई पत्तियाँ एक समान हल्की पीली दिखती हैं।

तीसरा, समस्या पूरे खेत में है या कुछ जगहों पर। पूरे खेत में एक साथ पीलापन खाद या पानी की बड़ी कमी की ओर इशारा करता है। कुछ धब्बों में, खासकर खेत के निचले हिस्से में पीलापन हो तो जलभराव की आशंका ज्यादा होती है। एक पौधे के पास मिट्टी खोदकर देखिए। जड़ें भूरी-काली और बदबूदार मिलें तो समझिए कि जड़ें पानी में डूबकर खराब हो रही हैं। ऐसी हालत में खाद डालना बेकार है, पहले पानी निकालना होगा।

चौथा, पत्तियों के नीचे और तने पर कीट तो नहीं हैं, क्योंकि रस चूसने वाले कीट भी पत्तियाँ पीली कर देते हैं। यह चार जवाब एक कागज पर लिख लीजिए।

दूसरा दिन: कारण के हिसाब से एक कदम, एक साथ सब कुछ नहीं

दूसरे दिन का नियम एक है। एक कारण पर एक कदम उठाइए। कई किसान पीलापन देखते ही एक साथ यूरिया, टॉनिक और कीटनाशक डाल देते हैं। इससे यह पता ही नहीं चलता कि किस चीज ने काम किया और किसने नुकसान पहुँचाया।

अगर लक्षण नाइट्रोजन की कमी जैसे लगें तो संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन दीजिए, लेकिन सूखे खेत में नहीं। खाद तभी काम करती है जब मिट्टी में नमी हो। नाइट्रोजन की अधिकता भी नुकसान करती है, पत्तियाँ जरूरत से ज्यादा मुलायम हो जाती हैं और पकने में देरी हो सकती है।

अगर लक्षण लोहे की कमी जैसे लगें तो मिट्टी की जाँच और पीएच देखना पहला काम है। कृषि की किताबों में लोहे की कमी के लिए फेरस सल्फेट के 0.5 प्रतिशत घोल के पत्तियों पर छिड़काव का जिक्र मिलता है। मात्रा और सही समय अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से पूछकर ही तय कीजिए। छिड़काव सुबह या शाम को कीजिए, दोपहर की तेज धूप में पत्ती जल सकती है।

सल्फर की कमी को हल्के में लेना महँगा पड़ता है। शामली के कृषि विज्ञान केंद्र के हवाले से अमर उजाला की एक खबर में बताया गया था कि जिले में गन्ने की फसल में करीब 20 प्रतिशत सल्फर की कमी पाई गई है और ज्यादा यूरिया के प्रयोग से यह कमी बढ़ती है। पूर्ति के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट, जिप्सम या सल्फर मिश्रित उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है, मात्रा मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट से ही तय होनी चाहिए। जलभराव वाले खेत में दूसरे दिन का काम नाली साफ करना और पानी निकालना है, पानी निकलने से पहले खाद मत डालिए।

तीसरा दिन: असर परखिए, फिर अगला फैसला लीजिए

तीसरे दिन खेत में फिर जाकर उन्हीं पौधों को देखिए जिन पर पहले दिन निशान लगाया था। पत्तियों का रंग सुधरने लगा है या पीलापन आगे बढ़ रहा है, यही असर की पहली निशानी है। पोषक तत्वों के छिड़काव का असर अक्सर 7 से 10 दिन में दिखता है। नई निकलने वाली पत्ती हरी निकल रही है तो इलाज सही दिशा में है।

अगर तीन दिन में कोई सुधार न दिखे तो घबराकर दूसरा इलाज शुरू मत कीजिए। पहले दिन के नोट दोबारा देखिए। कई बार पीलापन एक से ज्यादा कारणों से होता है, जैसे जलभराव के साथ लोहे की कमी। ऐसी हालत में मिट्टी परीक्षण सबसे भरोसेमंद रास्ता है।

नवंबर में एक खास बात: हर पीली पत्ती खतरे की निशानी नहीं

पराई के मौसम में एक बात समझना बहुत जरूरी है। फसल के पकने के समय नीचे की पुरानी पत्तियाँ स्वाभाविक रूप से पीली पड़कर सूखती हैं। यह पौधे की सामान्य उम्र का हिस्सा है। चिंता तब कीजिए जब पीलापन तेजी से ऊपर की नई पत्तियों तक पहुँच रहा हो, पूरे झुरमुट में फैल रहा हो या बढ़वार रुक गई हो।

कुछ हालत में घरेलू अंदाजा काफी नहीं होता। पत्तियों पर हरे-पीले धब्बों का मोज़ेक जैसा पैटर्न बने और पीलापन धीरे-धीरे फैल रहा हो, तो वायरस रोग की आशंका होती है। इसका कोई सीधा रासायनिक इलाज नहीं होता, रोगग्रस्त पौधों को हटाइए और नमूना कृषि विज्ञान केंद्र को दिखाइए। अगले सीजन के लिए बुवाई से पहले मिट्टी परीक्षण कराइए और जल निकासी पहले से ठीक रखिए।

मुख्य बातें

  • पीली पत्ती देखते ही खाद या दवा मत डालिए, पहले दिन नई या पुरानी पत्ती, नसों का रंग, फैलाव और जड़ों की जाँच कीजिए।
  • दूसरे दिन एक कारण पर एक कदम उठाइए, छिड़काव सुबह या शाम को कीजिए और सूखे खेत में खाद मत डालिए।
  • तीन दिन में असर परखिए, सुधार न दिखे तो मिट्टी परीक्षण कराइए और मोज़ेक पैटर्न या तेजी से फैलते पीलापन पर कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लीजिए।

स्रोत: पोषक तत्व कमी पर शोध प्रकाशन, शामली में सल्फर कमी पर अमर उजाला की खबर।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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