गन्ने के पत्ते जलाते हैं? यही पशुओं का मुफ्त चारा है: यूरिया उपचार की 4-स्टेप विधि

कटाई के बाद खेत में गन्ने के पत्तों के ढेर लग जाते हैं। ज्यादातर किसान इन पत्तों को या तो जला देते हैं या खेत के किनारे सड़ने के लिए छोड़ देते हैं। उसी गांव में किसी के घर में भैंस बंधी है जिसे सर्दियों में हरा चारा नहीं मिल रहा, और बाजार का पशु आहार इतना महंगा है कि हर किसान खरीद नहीं पाता। अजीब बात है — एक तरफ चारा जल रहा है, दूसरी तरफ चारे की कमी से दूध घट रहा है।
गन्ना एक साल से ज्यादा खेत में रहने वाली फसल है। कटाई के बाद हर एकड़ से क्विंटलों पत्ते निकलते हैं, जो ज्यादातर किसानों के लिए सिरदर्द हैं। पर पशुपालन करने वाले किसान के लिए यही पत्ते सर्दियों के चारे का मुफ्त स्रोत हैं।
गन्ने के पत्तों में कितना दम है
सूखे गन्ने के पत्तों में प्रोटीन 4 प्रतिशत से भी कम होता है। पशु इन्हें चबा भी नहीं पाता ठीक से — पत्ते कठोर होते हैं, स्वादहीन होते हैं और पचते नहीं। किसान तक की रिपोर्ट के मुताबिक सूखे चारे में ऑक्सालेट भी ज्यादा होता है, जो पशु के शरीर में कैल्शियम के साथ मिलकर उसे बाहर निकाल देता है। नतीजा — कैल्शियम की कमी और बीमारियां।
यूरिया उपचार इस तस्वीर को बदल देता है। उपचार के बाद चारा मुलायम हो जाता है, स्वादिष्ट हो जाता है और प्रोटीन की मात्रा लगभग 9 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। यानी वही बेकार पत्ते पौष्टिक चारे में बदल जाते हैं। पशु विज्ञान के जानकारों के अनुसार यूरिया उपचारित चारा खिलाने पर पशु को दिए जाने वाले महंगे पशु आहार में 30 प्रतिशत तक की कमी की जा सकती है।
यूरिया उपचार की 4-स्टेप विधि
यह विधि किसान तक और पशुपालन विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुसार है।
स्टेप 1 — पत्ते फैलाएं। एक क्विंटल सूखे गन्ने के पत्तों को समतल जगह पर करीब 6 इंच मोटी परत में फैला दें। पत्ते ज्यादा लंबे हों तो काटकर छोटे कर लें, इससे घोल अंदर तक पहुंचता है।
स्टेप 2 — यूरिया का घोल छिड़कें। 4 किलो यूरिया को 50 लीटर साफ पानी में अच्छी तरह घोल लें। इस घोल को छलनी या स्प्रेयर की मदद से फैले हुए पत्तों पर समान रूप से छिड़कें। फिर पत्तों को पैरों से दबाकर उसके ऊपर एक क्विंटल पत्तों की दूसरी परत बिछाएं और फिर से घोल छिड़कें। इस तरह एक के ऊपर एक परत बिछाते जाएं। एक बार में 5 से 10 क्विंटल पत्तों का ढेर तैयार हो जाता है।
स्टेप 3 — हवा बंद करके ढकें। तैयार ढेर को पॉलीथीन शीट से अच्छी तरह ढक दें ताकि अंदर बनी अमोनिया गैस बाहर न निकले। शीट के किनारों को मिट्टी से दबा दें। पॉलीथीन न हो तो ढेर को गुम्बद जैसा बनाकर ऊपर से पुआल से ढक सकते हैं, पर पॉलीथीन ज्यादा असरदार है।
स्टेप 4 — 20 दिन इंतजार करें। ढके हुए ढेर को 20 से 21 दिन तक ऐसे ही छोड़ दें। इस दौरान यूरिया से अमोनिया गैस बनती है जो पत्तों के रेशों को नरम करती है और प्रोटीन बढ़ाती है। 20 दिन बाद शीट हटाकर चारा निकालें। पहले दिन थोड़ा फैलाकर हवा लगने दें, फिर पशुओं को खिलाएं।
कितना खिलाएं और कैसे शुरू करें
पहले दिन से पूरा उपचारित चारा न दें। शुरुआत में अपने सामान्य चारे में थोड़ा उपचारित चारा मिलाकर खिलाएं और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं। पशु को एक-दो दिन में इसका स्वाद लग जाता है। उपचारित चारे के साथ साफ पानी हमेशा उपलब्ध रखें, क्योंकि यूरिया उपचारित चारा खाने के बाद पशु को ज्यादा प्यास लगती है।
उपचारित चारा पौष्टिक जरूर है, पर यह हरे चारे की पूरी जगह नहीं लेता। इसे पशु आहार के पूरक के तौर पर इस्तेमाल करें। जिन किसानों के पास नियमित हरा चारा नहीं है, उनके लिए यह सर्दियों का सबसे सस्ता सहारा है।
पत्तों का दूसरा इस्तेमाल — 35 दिन में मुफ्त खाद
जिन किसानों के पास पशु नहीं हैं, उनके लिए पत्तों का एक और बढ़िया इस्तेमाल है। उ.प्र. गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार पत्तों को दो लाइनों में करके खेत में इतना पानी चलाएं कि पत्तियां डूब जाएं, फिर प्रति एकड़ 4 किलो ऑर्गेनो डीकंपोजर को 2 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर पत्तों पर डाल दें। 30 से 35 दिन में पत्तियां सड़कर खाद बन जाती हैं, जिससे पेड़ी में फुटाव तेज होता है और रासायनिक खाद की जरूरत घटती है।
4 सावधानियां — इन्हें हल्के में न लें
यूरिया की मात्रा कभी न बढ़ाएं। 1 क्विंटल पत्तों पर 4 किलो यूरिया ही डालें। ज्यादा यूरिया पशु के लिए जहर साबित हो सकती है। घोल बनाते समय तौलकर डालें, अंदाजे से नहीं।
यूरिया सीधे कभी न खिलाएं। यूरिया का दाना या घोल पशु को सीधे देना जानलेवा हो सकता है। सिर्फ उपचार पूरा होने के बाद तैयार चारा ही खिलाएं।
ढेर हवा बंद होना चाहिए। पॉलीथीन में छेद रह गया या किनारे खुले रह गए तो अमोनिया गैस निकल जाएगी और उपचार अधूरा रह जाएगा। चारा न तो मुलायम होगा, न पौष्टिक।
बीमार या गर्भवती पशु को पहले पूछें। सामान्य स्वस्थ पशुओं के लिए यह विधि सुरक्षित मानी जाती है, पर बीमार, गर्भवती या दूध देने वाली ज्यादा संवेदनशील भैंस-गाय के लिए पशु चिकित्सक से एक बार सलाह जरूर लें।
गन्ने के पत्ते कूड़ा नहीं हैं। जो किसान इन्हें जलाता है, वह असल में अपने पशुओं का चारा और अपने खेत की खाद दोनों जला रहा है। यूरिया उपचार की यह 4-स्टेप विधि एक बार आजमाकर देखिए — 20 दिन बाद आपके हाथ में वह चारा होगा जिसके लिए सर्दियों में दूसरे किसान बाजार के चक्कर काटते हैं।
मुख्य बातें
- गन्ने के सूखे पत्तों में प्रोटीन 4% से कम होता है; 4 किलो यूरिया प्रति क्विंटल के 20-दिन के उपचार से प्रोटीन लगभग 9% हो जाता है और चारा मुलायम व स्वादिष्ट बनता है।
- विधि: 6 इंच की परतों में पत्ते बिछाकर यूरिया घोल (4 किलो/50 लीटर पानी) छिड़कें, पॉलीथीन से हवा बंद करके 20 दिन छोड़ दें।
- उपचारित चारा खिलाने पर महंगे पशु आहार में 30% तक कमी संभव; यूरिया की मात्रा कभी न बढ़ाएं और बीमार/गर्भवती पशु के लिए पशु चिकित्सक से पूछें।
स्रोत: किसान तक (चारे का यूरिया उपचार विधि), विकिपीडिया हिंदी (यूरिया उपचार — प्रोटीन 4% से 9%), न्यूज18 हिंदी/लोकल18 (गन्ने के पत्तों से 35 दिन में खाद — उ.प्र. गन्ना शोध संस्थान, शाहजहांपुर), नाइजीरियन जर्नल ऑफ एनिमल प्रोडक्शन (गन्ना शीर्ष साइलेज पर यूरिया उपचार अध्ययन)।
