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पाला पड़ने से पहले ये 6 काम, गन्ने की चीनी और वजन दोनों बचेंगे

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 18 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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पाला पड़ने से पहले ये 6 काम, गन्ने की चीनी और वजन दोनों बचेंगे

दिसंबर की कोई सुबह। किसान खेत पहुंचता है और देखता है कि गन्ने की पत्तियों पर बर्फ जैसी सफेद परत जमी है, किनारे काले पड़ गए हैं। यही पाला है, सर्दी में गन्ने का सबसे बड़ा दुश्मन। जिस साल ठंड लंबी खिंचती है, गन्ने का वजन घटता है, रस में चीनी कम होती है और बीज के लिए रखे गन्ने की आंखें तक खराब हो जाती हैं।

अच्छी खबर यह है कि पाले से बचाव के तरीके पुराने और आजमाए हुए हैं। कृषि वैज्ञानिक इन्हें हर साल दोहराते हैं, बस जरूरत होती है समय पर अमल की। यहां 6 ऐसे ही उपाय हैं, जो दिसंबर के आखिर से जनवरी के आखिर तक के खतरनाक दौर में आपकी फसल बचा सकते हैं।

पहले समझें, पाला पड़ता कब है

पाला हर ठंडी रात नहीं पड़ता। कृषि विभाग की सलाह के अनुसार, जिस दिन दोपहर से पहले ठंडी हवा चलती रहे और शाम होते-होते हवा थम जाए, आसमान बिल्कुल साफ हो जाए, उस रात पाले की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। रात के तीसरे-चौथे पहर, यानी आधी रात के बाद का समय, सबसे खतरनाक होता है।

इसलिए मौसम की खबर पर नजर रखना बचाव का पहला कदम है। अगर शीतलहर की चेतावनी है और आसमान साफ है, तो उसी शाम से तैयारी शुरू कर दें।

1. पाले वाली रात से पहले हल्की सिंचाई

यह सबसे आसान और सबसे असरदार उपाय है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर समेत कई कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पाले की आशंका वाली रात से पहले खेत में हल्की सिंचाई कर देने से फसल को बड़ा सहारा मिलता है।

गीली मिट्टी में गर्मी देर तक टिकी रहती है, जबकि सूखी मिट्टी रात में जल्दी ठंडी हो जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार सर्दी में सिंचाई से खेत का तापमान 0.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा रहता है। कई बार पाले और बचाव के बीच का फासला बस इतना ही होता है। सिंचाई हल्की हो, खेत में पानी भरना जरूरी नहीं, बस मिट्टी में नमी होनी चाहिए। बीज के लिए रखे गन्ने के खेत में सिंचाई खास तौर पर जरूरी बताई गई है।

2. आधी रात को खेत में धुआं करें

जिस रात पाला पड़ने की आशंका हो, उस रात 12 से 2 बजे के आसपास खेत की उत्तरी-पश्चिमी दिशा में, जहां से ठंडी हवा आती है, मेड़ों पर कूड़ा-कचरा या सूखी घास-फूस जलाकर धुआं करें। धुआं खेत में फैलकर वातावरण को गर्म रखता है।

कृषि विभाग की सलाह है कि मेड़ पर 10 से 20 फुट के अंतर पर कचरे के ढेर लगाकर धुआं करें, ताकि पूरा खेत धुएं की चादर में आ जाए। इस विधि से तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ाया जा सकता है। कचरे के साथ क्रूड ऑयल भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे धुआं घना और देर तक टिका रहता है। शाम को ही मेड़ों पर ढेर लगा दें, ताकि रात को सिर्फ आग लगानी हो।

3. गंधक के तेजाब का छिड़काव, वैज्ञानिकों की सलाह पर

जिन दिनों पाला पड़ने की आशंका लगातार बनी रहे, उन दिनों फसल पर गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करने की सलाह कृषि वैज्ञानिक देते हैं। 1 लीटर गंधक के तेजाब को 1000 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेयर क्षेत्र में प्लास्टिक के स्प्रेयर से छिड़कें।

इस छिड़काव का असर करीब दो सप्ताह तक रहता है। अगर इसके बाद भी शीतलहर जारी रहे तो 15-15 दिन के अंतर पर इसे दोहराया जा सकता है।

एक सावधानी जरूरी है। गंधक का तेजाब तेज रसायन है, इसलिए छिड़काव से पहले अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें और घोल बनाते समय दस्ताने और मास्क पहनें।

4. सुबह रस्सी से ओस गिरा दें

सुबह खेत में दो लोग रस्सी के दोनों सिरे पकड़कर फसल के ऊपर एक कोने से दूसरे कोने तक ले जाते हैं, ताकि पत्तियों पर जमी ओस नीचे गिर जाए। ओस जमी रहे तो पाले का असर बढ़ जाता है, क्योंकि गीली पत्ती पर बर्फ की परत जल्दी जमती है।

5. पाले के दिनों में गुड़ाई न करें

पंजाब के कृषि विभाग की गाइडलाइन में खास तौर पर कहा गया है कि पाले के दौरान गन्ने के खेत में गुड़ाई न करें। गुड़ाई से मिट्टी खुल जाती है और जड़ों के आसपास की गर्मी निकल जाती है, जिससे ठंड का असर सीधा जड़ तंत्र पर पड़ता है। बीज के गन्ने वाले खेत में इस नियम का सख्ती से पालन करें, क्योंकि पाला बीज की आंखें खराब कर देता है और खराब आंख से अंकुरण घट जाता है।

6. मेड़ पर हवा रोक पेड़ लगाएं

यह उपाय एक सीजन का नहीं, कई सालों का साथ देता है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि खेत की उत्तरी-पश्चिमी मेड़ों पर वायु अवरोधक पेड़ लगाए जाएं। शहतूत, शीशम, बबूल, खेजड़ी और जामुन जैसे पेड़ ठंडी हवा के झोंकों को रोकते हैं। पेड़ बड़े होने में समय लेते हैं, इसलिए इस काम को आज ही शुरू करना सबसे अच्छा है।

बीज वाले गन्ने को सबसे पहले बचाएं

अगर पूरा खेत एक साथ नहीं संभल पा रहा है तो सबसे पहले बीज के लिए रखे गन्ने की रक्षा करें, फिर खड़ी फसल की। पाला वजन और चीनी तो घटाता ही है, बीज की आंखें खराब करके अगले सीजन की बुवाई को भी खतरे में डालता है। जिस खेत का गन्ना मिल को जल्दी जाना है, उसकी कटाई पाले के दौर से पहले निपटाने की कोशिश करें।

मुख्य बातें

  • दिसंबर के आखिर से जनवरी के आखिर तक पाले का खतरा सबसे ज्यादा रहता है; साफ आसमान और थमी हवा वाली रात को पहले से तैयारी करें।
  • पाले वाली रात से पहले हल्की सिंचाई खेत का तापमान 0.5 से 2 डिग्री तक बचाए रखती है, और रात 12 से 2 बजे के बीच मेड़ों पर धुआं करने से 4 डिग्री तक गर्मी मिलती है।
  • पाले के दिनों में गुड़ाई न करें, बीज वाले गन्ने को सबसे पहले बचाएं और किसी रसायन के इस्तेमाल से पहले कृषि अधिकारी से सलाह जरूर लें।

स्रोत: पंजाब कृषि विभाग की पाला गाइडलाइन, डॉ. वीरेंद्र लाठर (पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान), कृषि विभाग की सलाह (kisansamadhan.com), एग्रोस्टार कृषि ज्ञान, डॉ. आर.पी. सिंह (kisanofindia.com), डॉ. आई.के. कुशवाहा (gaonconnection.com)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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