गन्ना काटने से पहले 5 निशानियां जांच लें, कच्ची फसल में चीनी भी घटेगी और वजन भी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराई सत्र इस बार करीब 10 दिन पहले शुरू होने की तैयारी है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अक्टूबर के पहले हफ्ते तक बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल पूरे करने के बाद 20 अक्टूबर के आसपास मिलों के चलने की संभावना है।
ऐसे में हर गन्ना किसान के मन में एक ही सवाल घूम रहा है: मिल तो चल जाएगी, लेकिन क्या मेरा गन्ना पक गया है? जल्दी कटाई कर दी तो चीनी प्रतिशत कम मिलेगा और वजन भी हल्का आएगा। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह साफ है: कटाई से पहले फसल की परिपक्वता जांचना जरूरी है, और इसके लिए 5 ठोस निशानियां हैं।
1. ब्रिक्स 18 से 20 के बीच हो, तभी कटाई
गन्ना पका है या नहीं, ये बताने का सबसे भरोसेमंद तरीका है हैंड रिफ्रेक्टोमीटर। ये छोटा यंत्र गन्ने के रस में ब्रिक्स यानी चीनी की मात्रा मापता है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका सिंह के मुताबिक, जब ब्रिक्स 18 से 20 के बीच हो, तो गन्ने को पका माना जाता है। गांव जंक्शन की रिपोर्ट में डॉ. सिंह बताती हैं कि गुड़ और चीनी, दोनों के लिहाज से ये रेंज ही पकने की पहचान है।
कृषि जागरण ने भी यही आंकड़ा दिया है: हैंड रिफ्रेक्टोमीटर का बिंदु 18 तक पहुंचे, तो कटाई शुरू कर देनी चाहिए। यंत्र न हो तो सोसायटी या गन्ना विकास कार्यालय से जांच करवा सकते हैं।
2. नीचे की पत्तियां सूखकर लटकने लगें
गन्ना पकने पर नीचे की पुरानी पत्तियां सूखकर लटक जाती हैं। ये खेत में खड़े होकर दिखने वाली सबसे साफ निशानी है। कृषि जागरण के लेखक, जिनमें चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के गन्ना पर्यवेक्षक भी शामिल हैं, लिखते हैं कि जब नीचे की पत्तियां सूखकर लटक जाएं, तो गन्ने को परिपक्व मान लेना चाहिए।
ध्यान रहे, ऊपर की नई पत्तियां हरी रहेंगी। फसल का ऊपर से हरा दिखना मतलब ये नहीं कि गन्ना कच्चा है।
3. थपथपाने पर धातु जैसी खनक
एक पुराना, लेकिन आज भी कारगर देसी टेस्ट है थपथपाकर सुनना। गांव जंक्शन की रिपोर्ट के अनुसार, गन्ने को काटकर या उसके टुकड़े को थपथपाने पर धातु जैसी साफ और खनकदार आवाज सुनाई दे, तो इसे पकने का संकेत माना जाता है। कच्चे गन्ने में आवाज दबकर आती है। कृषि जागरण भी इसकी पुष्टि करता है: थपथपाने पर मेटेलिक (धातु) आवाज आना परिपक्वता की निशानी है।
4. काटकर धूप में रखें, तो कटा हिस्सा चमके
गन्ने को काटकर धूप में रखिए और उसके कटे हिस्से को गौर से देखिए। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों के मुताबिक, पके गन्ने का कटा हिस्सा धूप में चमकीला दिखाई देता है, जो शर्करा के जमाव की वजह से होता है।
5. किस्म की उम्र पूरी हो चुकी हो
अगेती किस्में आमतौर पर 10 से 12 महीने में पक जाती हैं, जबकि पछेती किस्मों को 12 से 14 महीने लगते हैं। इसलिए बोनी की तारीख याद रखना जरूरी है। अक्टूबर 2025 में बोया शरदकालीन गन्ना अब 12 महीने की उम्र पूरी कर चुका है, लेकिन देर से हुई बोनी पर कैलेंडर देखकर जल्दबाजी न करें।
कच्ची कटाई का सीधा नुकसान: चीनी कम, वजन कम
इन निशानियों को नजरअंदाज करके जल्दी कटाई करने का नुकसान दोहरा है। जाने-माने गन्ना प्रजनक बख्शी राम, जिनके नाम सीओ-0238 जैसी लोकप्रिय किस्म है, बिजनेसलाइन से बातचीत में साफ कहते हैं: अगर किसान जल्दी कटाई करेगा, तो शर्करा की मात्रा कम होने की वजह से नुकसान उसी को होगा। गन्ना विशेषज्ञ डीके त्यागी भी चेताते हैं कि जल्दी पराई में रिकवरी घटेगी और उत्पादन कम होगा।
पराई कैलेंडर के हिसाब से कटाई की योजना बनाएं
पराई सत्र का गणित भी दिमाग में रखें। केंद्र सरकार 15 अक्टूबर से सीजन शुरू कराने का दबाव बना रही थी, जबकि पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास चलने की तैयारी में हैं, मौसम पर निर्भरता के साथ। उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी हिस्से में हैं (उप गन्ना आयुक्त, सहारनपुर)। गन्ना रकबा भी इस बार 28.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 28.4 लाख हेक्टेयर रह गया है, इसलिए पर्ची और कैलेंडर का सिस्टम पहले से कसा रहेगा।
कटाई से पहले ये दो काम निपटा लें: ई-गन्ना ऐप पर अपना सर्वेक्षण रिकॉर्ड (रकबा और किस्म) जांच लें, और बैंक खाता सक्रिय हो तथा पहचान दस्तावेजों से जुड़ा हो। गन्ना विभाग की सलाह है कि इन्हें पहले ठीक कर लेने से भुगतान में देरी नहीं होती।
कटाई के बाद जितनी जल्दी मिल गेट या क्रय केंद्र पहुंचे, उतना अच्छा। कटा गन्ना खेत में पड़ा रहने पर वजन घटने लगता है और शर्करा भी कम होती है। काटने के बाद सूखी पत्ती को खेत में जलाने से बचें, वो मल्च के काम आ सकती है।
मुख्य बातें
- ब्रिक्स 18 से 20, नीचे की सूखी पत्तियां, धातु जैसी खनक, धूप में चमकता कटा सिरा और किस्म की पूरी उम्र: ये 5 निशानियां गन्ने के पकने की पहचान हैं।
- जल्दी कटाई से चीनी प्रतिशत और वजन दोनों घटते हैं; वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि कच्ची कटाई का नुकसान किसान को ही भुगतना पड़ता है।
- पश्चिमी यूपी में पराई 20 अक्टूबर के आसपास शुरू हो सकती है; कटाई से पहले ई-गन्ना सर्वेक्षण रिकॉर्ड और बैंक खाते की जांच जरूर कर लें।
स्रोत: गांव जंक्शन (उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका सिंह), कृषि जागरण (चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग, उत्तर प्रदेश), टाइम्स ऑफ इंडिया / बिजनेसलाइन (सितंबर 2026)
