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गन्ने की नई किस्म 20016 के बीज के लिए मची होड़, 0238 से तुलना में क्या है खास?

✍️ Aamir Raza · 🗓 19 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ने की नई किस्म 20016 के बीज के लिए मची होड़, 0238 से तुलना में क्या है खास?

बीज की दुकानों और गन्ना मंडियों में इन दिनों एक ही सवाल सुनाई दे रहा है: नई किस्म 20016 का बीज कब मिलेगा? गन्ने की यह नई वैरायटी इस कदर चर्चा में है कि किसान इसे वर्षों से खेतों में लहलहा रही 0238 के विकल्प के तौर पर देखने लगे हैं। मामला इतना बढ़ा कि 16 अक्टूबर को हरियाणा के करनाल में किसान प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक से मिलने पहुंचा।

खबर 19 अक्टूबर को उस समय और गर्म हुई, जब मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के बीच इस नई किस्म की अच्छी पैदावार और ज्यादा मिठास को लेकर खासी उत्सुकता है। सीधा सवाल यह है कि 20016 में आखिर ऐसा क्या है, जिससे किसान इतने उत्साहित हैं? आइए पूरी तस्वीर समझते हैं।

करनाल में किसानों का ICAR महानिदेशक से मिलना

अमर उजाला की 16 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, गन्ने की खेती में उत्पादन और चीनी रिकवरी बेहतर करने के लिए उन्नत किस्मों को किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में गन्ने की नई किस्म सीओ 20016 को किसान समुदाय को समर्पित किया गया।

प्रगतिशील किसान और किसान प्रतिनिधि जसबीर सिंह पंजेटा ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान व शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. मांगी लाल जाट से मुलाकात की। पंजेटा ने इस किस्म को किसानों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। यह मुलाकात करनाल में केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के परिसर में हुई, जहां आसपास के कई किसान भी मौजूद रहे।

0238 से तुलना क्यों हो रही है

0238 कोई मामूली किस्म नहीं रही है। वर्षों से यह यूपी के खेतों में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली वैरायटी रही, लेकिन समय के साथ इसमें लाल सड़न जैसी बीमारियों की दिक्कतें बढ़ने की शिकायतें किसान करते आए हैं। किसान तक की 19 अक्टूबर की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि किसान नई किस्म 20016 की अच्छी पैदावार और ज्यादा मिठास को लेकर उत्साहित हैं, और इसकी तुलना सीधे 0238 से की जा रही है।

नोट करने वाली बात यह है कि रॉयल बुलेटिन की रिपोर्ट में किसान प्रतिनिधियों ने खुद कहा है कि अलग-अलग कृषि अनुसंधान संस्थानों की तैयार की गई उन्नत किस्में हमेशा से किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती हैं। लेकिन इन किस्मों का पूरा फायदा तभी मिलता है, जब वे क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और पानी की सुविधा के हिसाब से समय पर किसानों तक पहुंचें।

21012 किस्म की भी उठी मांग

करनाल की मुलाकात में सिर्फ 20016 ही नहीं, एक और किस्म का मुद्दा भी उठा। रॉयल बुलेटिन की रिपोर्ट के मुताबिक, किसान प्रतिनिधिमंडल ने महानिदेशक के सामने मांग रखी कि गन्ने की किस्म 21012 को भी जल्द से जल्द जारी किया जाए। किसानों का तर्क था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों के लिए गन्ना मुख्य नकदी फसल है, इसलिए उन्नत किस्मों की उपलब्धता सही समय पर मिलनी चाहिए।

यह मांग अपने आप में एक संकेत है। किसान अब किसी एक किस्म के भरोसे नहीं रहना चाहते। वे चाहते हैं कि 0238 के बाद बोने के लिए उनके पास दो-तीन भरोसेमंद विकल्प हों, ताकि किसी एक किस्म में बीमारी आने पर पूरा सीजन दांव पर न लगे।

यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है

सबसे पहला और सीधा फायदा यह है कि गन्ना अनुसंधान की दुनिया में नई किस्मों की रफ्तार तेज हुई है। 23232, 19231 जैसी किस्मों के बाद अब 20016 और 21012 की चर्चा बताती है कि आने वाले बुवाई सीजन में किसानों के पास विकल्प ज्यादा होंगे।

लेकिन यहां एक व्यावहारिक सावधानी भी जरूरी है। नई किस्म का बीज लेते समय किसान को यह जरूर जांचना चाहिए कि वह बीज प्रमाणित स्रोत से मिल रहा है या नहीं। नई किस्मों की होड़ के समय बाजार में नकली या बिना प्रमाणित बीज भी बिकने की आशंका रहती है। अपने क्षेत्र की गन्ना समिति या गन्ना विभाग के कार्यालय से बीज की उपलब्धता और दर की जानकारी पहले लें, फिर फैसला करें।

दूसरी बात, किसी नई किस्म को अपने पूरे खेत में एक साथ न बोएं। पहले एक-दो बीघे में लगाकर उस किस्म के व्यवहार, पैदावार और चीनी परता को अपनी मिट्टी पर खुद परखें। यही अनुभवी किसानों का पुराना नुस्खा है, जो हर नई किस्म के समय काम आता है।

आगे क्या देखें

फिलहाल 20016 को लेकर आधिकारिक स्तर पर जो जानकारी सामने आई है, वह किसानों के उत्साह और ICAR के समर्पण तक सीमित है। किस्म की आधिकारिक उपज आंकड़े, चीनी रिकवरी का प्रतिशत और रोग प्रतिरोधकता के ब्योरे आने वाले दिनों में कृषि संस्थानों की ओर से जारी होने की उम्मीद है। जैसे ही ये आंकड़े सामने आएंगे, तस्वीर और साफ होगी।

एक बात तय है: गन्ने की दुनिया में किस्मों की यह नई दौड़ किसानों के हक में है। 0238 के एकछत्र राज के बाद विकल्पों की भरमार का मतलब है बेहतर पैदावार, बेहतर चीनी और बीमारियों से कम नुकसान की उम्मीद।

मुख्य बातें

  • गन्ने की नई किस्म Co 20016 को लेकर यूपी के किसानों में खासा उत्साह, 0238 से तुलना हो रही है।
  • 16 अक्टूबर को करनाल में किसान प्रतिनिधियों ने ICAR महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट से मिलकर किस्म को किसान समुदाय को समर्पित करने पर आभार जताया।
  • प्रतिनिधिमंडल ने 21012 किस्म को भी जल्द जारी करने की मांग रखी; पश्चिमी यूपी-हरियाणा में गन्ना मुख्य नकदी फसल है।

स्रोत: किसान तक (19 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (16 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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