102 रुपये में मिट्टी जांच: गन्ने में खाद का सही हिसाब, 7 स्टेप में

हर सीजन एक ही कहानी सुनने को मिलती है। पड़ोस के किसान ने वही यूरिया, वही डीएपी डाला, फिर भी उसका गन्ना भारी निकला और आपका हल्का। फर्क कई बार खाद की कंपनी में नहीं, खेत की जमीन के अंदर छिपा होता है। जमीन में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश कितना है — इसका अंदाजा लगाना जुए जैसा है, और अंदाजे पर खाद डालना पैसा और पैदावार, दोनों गंवाने जैसा है।
यही अंदाजा खत्म करने का सबसे सस्ता तरीका मिट्टी परीक्षण है। सरकारी प्रयोगशाला में मात्र 102 रुपये के शुल्क पर 12 पैरामीटर की जांच होती है, जिसमें आपके खेत की जमीन की पूरी कुंडली सामने आ जाती है। मेरठ की क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के सहायक निदेशक अरुण कुमार ने खुद किसानों को यह सलाह दी है कि सही रिपोर्ट के लिए नमूना ठीक तरीके से लेना जरूरी है। रिपोर्ट में जो कमी-वृद्धि दिखेगी, उसी के हिसाब से खाद डालेंगे तो एक भी बोरी बेकार नहीं जाएगी।
पहले समझें: रिपोर्ट में क्या-क्या आता है
मिट्टी परीक्षण कोई एक नंबर नहीं देता। जांच में पीएच, ईसी, कार्बनिक कार्बन के साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जिंक-आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति सामने आती है। सरकार की सॉइल हेल्थ कार्ड योजना में भी इन्हीं 12 पैरामीटर की जांच होती है, और कार्ड के साथ उर्वरक की सही मात्रा की सलाह भी मिलती है। यानी रिपोर्ट सिर्फ बीमारी नहीं बताती, दवा का डोज भी लिखकर देती है।
गन्ना संस्थान मुजफ्फरनगर के वैज्ञानिकों ने किसान गोष्ठियों में साफ कहा है कि कई किसान उत्पादन बढ़ाने के चक्कर में यूरिया और डीएपी जरूरत से ज्यादा डाल रहे हैं, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति घटती जा रही है। उनकी सलाह है कि खेत के चारों कोनों से मिट्टी के सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच कराएं. कई किसान गोष्ठियों में यह जांच निशुल्क भी कराई जाती है।
सैंपल कब और कहां से लें
मिट्टी का नमूना बुवाई से पहले लें, खेत खाली हो तब। सॉइल हेल्थ कार्ड योजना में साल में दो बार सैंपलिंग का प्रावधान है, फसल कटने के बाद। शरदकालीन गन्ने की बुवाई का समय चल रहा है, तो बुवाई से पहले जांच कराना सबसे फायदेमंद है।
7 स्टेप: सही सैंपल लेने की विधि
1. खेत को हिस्सों में बांटें: एक एकड़ के खेत से 8-10 जगह मिट्टी लें। अलग-अलग हिस्सों से लेना इसलिए जरूरी है ताकि एक जगह की मिट्टी पूरी रिपोर्ट न बिगाड़ दे।
2. गड्ढा सही आकार का खोदें: हर जगह 6 इंच लंबा, 4 इंच चौड़ा और 6 इंच गहरा गड्ढा बनाएं। खुरपी से गड्ढे की दीवार से ऊपर से नीचे तक करीब 2.5 सेंटीमीटर मोटी परत काटकर अलग कर लें।
3. मेड़-डोल से दूर रहें: डोल (मेड़) से कम से कम 2 मीटर दूर की मिट्टी लें। मेड़ के पास की मिट्टी में खाद और पानी का असर अलग होता है, वह रिपोर्ट बिगाड़ सकती है। जहां खाद का ढेर रखा हो या पेड़ की छांव हो, वहां से नमूना न लें।
4. सब मिट्टी को मिलाएं: अलग-अलग जगहों से आई मिट्टी को साफ कपड़े पर अच्छी तरह मिलाएं। फिर ढेर बनाकर चार भागों में बांटें और आमने-सामने के दो भाग अलग निकालकर फिर मिलाएं। यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक करीब आधा किलो मिट्टी न रह जाए।
5. थैली पर पूरी जानकारी लिखें: साफ थैली में मिट्टी भरें और उस पर नाम, गांव, खेत की पहचान या खसरा संख्या, विकासखंड-तहसील का नाम जरूर लिखें। साथ में यह भी लिखें कि अगली फसल कौन सी लेनी है. गन्ना लिखेंगे तो सलाह उसी के हिसाब से मिलेगी।
6. जिला या क्षेत्रीय प्रयोगशाला में जमा करें: नमूना अपने जिले की मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में जमा कराएं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान मेरठ की क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला से भी संपर्क कर सकते हैं।
7. रिपोर्ट का इंतजार करें: जांच के बाद रिपोर्ट मिलती है, जिसमें हर पोषक तत्व की स्थिति (कम, मध्यम या अधिक) दर्ज होती है। उसी के आधार पर खाद की मात्रा बता दी जाती है।
रिपोर्ट देखकर खाद कैसे तय करें
रिपोर्ट में तीन शब्दों पर ध्यान दें: कम, मध्यम, अधिक। जिस तत्व की स्थिति “कम” है, उसकी खाद पूरी मात्रा में दें। “मध्यम” में आधी-तीन चौथाई, और “अधिक” वाले तत्व की खाद न डालें या बहुत कम डालें। यही वो हिसाब है जो रिपोर्ट के बिना कभी नहीं बनता। अगर रिपोर्ट में फास्फोरस “अधिक” दिखा तो डीएपी की बोरी बच जाएगी. वही आपकी असली बचत है।
पीएच पर भी नजर डालें। गन्ने को हल्की अम्लीय से उदासीन मिट्टी पसंद है। पीएच ज्यादा या कम निकले तो कृषि अधिकारी से सुधार का उपाय पूछें, अंदाजे से चूना या जिप्सम न डालें।
ये 5 गलतियां रिपोर्ट बर्बाद कर देती हैं
सबसे बड़ी गलती: एक ही कोने से मिट्टी लेकर भेज देना। दूसरी: गीली मिट्टी का नमूना भेजना. मिट्टी थोड़ी सूखी होनी चाहिए। तीसरी: खाद के ढेर या गोबर की खाद वाले हिस्से से नमूना लेना। चौथी: थैली पर नाम-पता न लिखना, जिससे रिपोर्ट किसी और के नाम पर बन जाती है। पांचवीं: रिपोर्ट आने के बाद भी पुराने अंदाजे से खाद डालना।
कितने समय में दोहराएं
एक बार जांच कराकर भूल न जाएं। हर फसल चक्र या दो साल में एक बार मिट्टी परीक्षण दोहराएं, क्योंकि हर फसल जमीन से पोषक तत्व निकालती है। पेड़ी फसल के बाद यह और भी जरूरी है, क्योंकि पेड़ी में मिट्टी पर दबाव ज्यादा पड़ता है।
मुख्य बातें
- सरकारी प्रयोगशाला में 102 रुपये में 12 पैरामीटर की मिट्टी जांच होती है; किसान गोष्ठियों में कई बार यह निशुल्क भी कराई जाती है।
- 8-10 जगह से 6 इंच गहरे गड्ढों की मिट्टी मिलाकर आधा किलो नमूना बनाएं; मेड़ से 2 मीटर दूर से लें और थैली पर नाम, खसरा व अगली फसल जरूर लिखें।
- रिपोर्ट में कम-मध्यम-अधिक के हिसाब से खाद डालें — जरूरत से ज्यादा यूरिया-डीएपी जमीन की उर्वरा शक्ति घटाता है।
स्रोत: News18 Hindi (मेरठ क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला, सहायक निदेशक अरुण कुमार से बातचीत); ChiniMandi/Live Hindustan (गन्ना संस्थान मुजफ्फरनगर के वैज्ञानिकों की किसान गोष्ठी सलाह); सॉइल हेल्थ कार्ड योजना — भारत सरकार कृषि मंत्रालय (12 पैरामीटर, सैंपलिंग विधि).
