1 सेंसर, 3 गहराई की जांच: मिट्टी की नमी देखकर सिंचाई का सही फैसला

सुबह खेत पर पहुंचे किसान ने जूते से ऊपरी मिट्टी को ठोकर मारी। ऊपर से मिट्टी सूखी दिख रही थी, पर दो अंगुल नीचे दबाकर देखा तो नमी महसूस हुई। अब सवाल खड़ा हो गया। पानी चलाऊं या रुकूं? पंप का डीजल और मजदूरी भी लगेगी, और अगर पानी की जरूरत ही नहीं थी तो खेत में पानी भरने से जड़ों को नुकसान अलग होगा। इसी उलझन में ज्यादातर सिंचाई का फैसला होता है।
ऊपर की मिट्टी अक्सर झूठ बोलती है। धूप और हवा से ऊपरी दो-तीन सेंटीमीटर जल्दी सूख जाता है, जबकि जड़ों के पास नमी बची रहती है। मिट्टी नमी सेंसर इसी अंदाजे को खत्म करने के लिए है। यह जड़ों के पास की मिट्टी में कितना पानी बचा है, यह बता देता है।
सेंसर असल में क्या नापता है
सेंसर मिट्टी के अंदर लगाया जाता है और वहां की नमी से जुड़ा एक नंबर दिखाता है। नंबर का मतलब समझना ही असली काम है, सेंसर खरीदना नहीं। दो तरह के सेंसर आमतौर पर मिलते हैं और दोनों अलग चीज नापते हैं।
पहला है टेंशियोमीटर। यह पानी से भरी एक नली होती है जिसके नीचे छिद्रदार मिट्टी का कप लगा होता है। मिट्टी सूखती है तो वह इस कप से पानी खींचती है और नली के अंदर खिंचाव पैदा होता है। यह खिंचाव गेज पर किलो पास्कल या सेंटीबार में दिखता है। रीडिंग शून्य का मतलब है मिट्टी पूरी तरह गीली है, नंबर जितना बढ़ेगा, मिट्टी उतनी ही सूखी समझो। इसकी सीमा आमतौर पर शून्य से 70 से 85 सेंटीबार तक रहती है।
दूसरी किस्म है कैपेसिटिव सेंसर। यह मिट्टी में पानी की मात्रा को प्रतिशत में बताता है। यह सस्ता और रखरखाव में आसान होता है, इसलिए छोटे खेतों और बागवानी में ज्यादा चलता है।
लगाने की सही जगह और गहराई
सेंसर की जगह ही उसकी आधी सच्चाई है। उसे ऐसी जगह लगाओ जो पूरे खेत का प्रतिनिधित्व करे। ट्रैक्टर के पहिए के निशान, मेड़ के किनारे या ड्रिप के एमिटर से सटाकर सेंसर मत लगाओ। इन जगहों की नमी पूरे खेत जैसी नहीं होती।
गन्ना जैसी गहरी जड़ वाली फसल में एक गहराई पर लगा सेंसर अधूरी कहानी बताता है। कृषि विशेषज्ञ दो से तीन गहराई पर सेंसर लगाने की सलाह देते हैं। एक सेंसर करीब 15 सेंटीमीटर, दूसरा करीब 30 सेंटीमीटर और तीसरा 45 से 60 सेंटीमीटर की गहराई पर लगाओ। ऊपर वाला बताएगा कि सिंचाई की जरूरत कब पड़ने वाली है। नीचे वाला बताएगा कि पानी जड़ों तक पहुंचा या सिर्फ ऊपर ही रह गया।
लगाते वक्त सेंसर के आसपास मिट्टी से उसका संपर्क पूरी तरह होना चाहिए। चारों ओर हवा की खाली जगह रह गई तो रीडिंग गलत आएगी। गड्ढा खोदो, सेंसर रखो, फिर उसी मिट्टी को दबाकर भरो। लगाने के बाद एक बार सिंचाई करके देखो कि रीडिंग बदल रही है या नहीं। रीडिंग न बदले तो समझो कि सेंसर ठीक से बैठा नहीं है।
रीडिंग पढ़ने का आसान तरीका
टेंशियोमीटर की रीडिंग को इस तरह पढ़ो। शून्य के पास मतलब मिट्टी भरी हुई है, सिंचाई की जरूरत नहीं। नंबर बढ़ता जाए तो समझो मिट्टी सूख रही है। दोमट मिट्टी के लिए शुरुआती दायरा 20 से 50 किलो पास्कल के बीच माना जाता है। बलुई मिट्टी में पानी जल्दी निकल जाता है, इसलिए वहां दायरा थोड़ा कसा रहता है। चिकनी मिट्टी पानी धीरे छोड़ती है, वहां दायरा थोड़ा खुला रहता है।
यह दायरा पत्थर की लकीर नहीं है। हर खेत की मिट्टी अलग है। पहली दो-तीन सिंचाई में अपनी मिट्टी का अपना नंबर तय कर लो। जिस रीडिंग पर फसल हरी-भरी रहे और पानी भी बचे, वही तुम्हारे खेत का सही नंबर है। रीडिंग डायरी में लिखो।
रीडिंग से सिंचाई का फैसला
अब सबसे काम की बात, रीडिंग देखकर पानी कब चलाना है। ऊपर वाला सेंसर सूखा बता रहा है और नीचे वाला अभी गीला है तो हल्की सिंचाई काफी है। ऊपर और नीचे दोनों सूखे बता रहे हैं तो भरपूर सिंचाई की जरूरत है। दोनों गीले हैं तो पंप चलाने का कोई मतलब नहीं, पानी बचाओ और अगली रीडिंग का इंतजार करो। बारिश के बाद भी रीडिंग देखो। कई बार बारिश का पानी सिर्फ ऊपर तक ही उतरता है और नीचे वाला सेंसर अब भी सूखा रहता है।
ये गलतियां सेंसर को बेकार कर देती हैं
एक ही जगह के सेंसर पर पूरे खेत का फैसला मत करो। खेत के ऊंचे-नीचे हिस्सों में नमी अलग-अलग होती है, इसलिए बड़े खेत में दो-तीन जगह रीडिंग लेना बेहतर है। टेंशियोमीटर में पानी खत्म हो जाए या हवा चली जाए तो वह गलत नंबर दिखाएगा, इसलिए उसकी नली का ध्यान रखो। जो रीडिंग हफ्ते में एक बार भी न देखी जाए, वह किसी काम की नहीं।
खरीदने से पहले दुकानदार से ये पूछो
सेंसर लेने से पहले तीन सवाल जरूर पूछो। यह किस गहराई तक काम करेगा और इसकी रीडिंग की सीमा क्या है। रीडिंग कहां दिखेगी, सिर्फ मीटर पर या मोबाइल पर भी। रखरखाव में क्या करना होगा, जैसे टेंशियोमीटर में पानी भरना या बैटरी बदलना। कृषि विज्ञान केंद्र या जिला कृषि विभाग से भी पूछ सकते हो कि तुम्हारे इलाके की मिट्टी के लिए किस तरह का सेंसर ठीक रहेगा। योजना के तहत मदद मिलती है या नहीं, यह भी वहीं से पता चलेगा।
मिट्टी नमी सेंसर कोई जादू नहीं है। यह सिर्फ इतना करता है कि तुम्हारे फैसले के पीछे अंदाजे की जगह एक नंबर आ जाता है। पानी महंगा है, डीजल महंगा है, और गन्ने की जड़ें एक बार खराब हो गईं तो पूरा सीजन नहीं लौटता।
मुख्य बातें
- ऊपरी मिट्टी देखकर सिंचाई का फैसला मत करो, जड़ों के पास की नमी ही असली सच है।
- गन्ने जैसे गहरी जड़ वाली फसल में 15, 30 और 45 से 60 सेंटीमीटर की गहराई पर सेंसर लगाओ।
- रीडिंग का अपना नंबर अपने खेत की मिट्टी के हिसाब से दो-तीन सिंचाई में तय करो, पड़ोसी का नंबर मत अपनाओ।
स्रोत: अलबामा कोऑपरेटिव एक्सटेंशन, इरिगेशन शेड्यूलिंग यूजिंग सॉइल वाटर टेंशन सेंसर्स; ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी एक्सटेंशन, सॉइल मॉइश्चर मॉनिटरिंग टू सपोर्ट इरिगेशन शेड्यूलिंग; अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, टेंशियोमीटर अध्याय।
