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टिकैत की चेतावनी: जरूरत पड़ी तो UP-हरियाणा बॉर्डर सील — यमुनानगर में हाईवे जाम

✍️ Aamir Raza · 🗓 05 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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टिकैत की चेतावनी: जरूरत पड़ी तो UP-हरियाणा बॉर्डर सील — यमुनानगर में हाईवे जाम

हरियाणा में जो किसान आंदोलन खड़ा हो रहा है, उसकी गूंज अब उत्तर प्रदेश तक पहुंचने लगी है। रविवार, 4 अक्टूबर को यमुनानगर के औरंगाबाद गांव में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की महापंचायत के बाद पंचकूला-सहारनपुर हाईवे पूरी तरह जाम कर दिया गया। वहां मौजूद किसान नेता राकेश टिकैत ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो हरियाणा-यूपी बॉर्डर दोबारा सील किया जा सकता है।

यह खबर यूपी के गन्ना किसानों के लिए सीधे मायने रखती है। पेराई सत्र सिर पर है, गन्ने के भाव की घोषणा का इंतजार हो रहा है, और टिकैत ने गन्ने के रेट को महापंचायत का बड़ा मुद्दा बनाया है। पड़ोसी राज्य में बन रहा दबाव यूपी के 122 चीनी मिल क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।

4 अक्टूबर को औरंगाबाद में क्या हुआ

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, महापंचायत खत्म होते ही किसान हाईवे की ओर बढ़ गए। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने हाईवे जाम का ऐलान किया, और उनके आह्वान के बाद किसानों ने पंचकूला-सहारनपुर हाईवे के एक हिस्से को ब्लॉक कर दिया। वजह बताई गई हरियाणा सरकार की धान खरीद में देरी। बाद में स्थानीय अधिकारियों से बातचीत के बाद रास्ता खोला गया।

टिकैत ने मौके पर पत्रकारों से कहा कि सरकार किसान का अनाज नहीं खरीदेगी तो किसान के पास क्या रास्ता बचेगा। उन्होंने याद दिलाया कि हरियाणा सरकार ने पहले खरीद शुरू होने की तारीख 25 सितंबर दी थी, फिर 29 सितंबर की नई तारीख आई। किसानों की धान मंडियों में पड़ी है, लेकिन खरीद की रफ्तार धीमी है। लल्लूराम की रिपोर्ट के अनुसार किसानों ने हाईवे पर ही धरना लगा दिया था और कहा था कि अधिकारी खुद हाईवे पर आकर ज्ञापन लें, कोई प्रतिनिधिमंडल दफ्तर नहीं जाएगा।

टिकैत के वे बयान जो यूपी तक पहुंचते हैं

महापंचायत में टिकैत ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि अगर किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो संयुक्त किसान मोर्चा बड़ा फैसला लेगा। उन्होंने धान खरीद और गन्ने के रेट, दोनों मुद्दे उठाए।

टिकैत की एक बात यूपी से सीधे जुड़ी है। उन्होंने कहा कि पहले हरियाणा में गन्ने और धान का सबसे अच्छा रेट मिलता था, और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के किसान भी यहां अपनी फसल बेचने और सस्ता डीजल-खाद लेने आते थे। आज हालत यह है कि हरियाणा का किसान खुद अपने हक के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने पोर्टल और जटिल प्रक्रियाओं को भी परेशानी की वजह बताया।

इसी महापंचायत में टिकैत ने वह चेतावनी दी जो यूपी के लिए सबसे अहम है। लल्लूराम की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि अगर हरियाणा के किसान फैसला लेते हैं तो उत्तर प्रदेश-हरियाणा बॉर्डर को दोबारा सील किया जा सकता है।

गुस्सा क्यों बढ़ा: धान खरीद का टाइमलाइन

यह आंदोलन एक दिन में नहीं बना। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 22 सितंबर को कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में दिल्ली-चंडीगढ़ जीटी रोड ब्लॉक करने वाले किसान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। तब धान की जल्द खरीद की मांग उठी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने खरीद की तारीख 1 अक्टूबर से बढ़ाकर 29 सितंबर कर दी, और कई मंडियों में खरीद शुरू भी हुई। लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि रफ्तार अब भी धीमी है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने 5 अक्टूबर को शाहाबाद के शहीद उधम सिंह चौक पर फिर जुटने का आह्वान किया है। चढ़ूनी का दावा है कि मंडियों में अब तक एक भी क्विंटल की खरीद और उठान नहीं हुई, क्योंकि पोर्टल पर फील्ड वेरिफिकेशन अटका हुआ है।

उधर महापंचायत की घोषणा पहले ही ट्रिब्यून की 15 सितंबर की रिपोर्ट में आ गई थी। जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने कहा था कि 4 अक्टूबर की पंचायत में गन्ने का रेट, धान खरीद, बिजली, खाद और बीज जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

पेराई से पहले यूपी के गन्ना किसान के लिए इसका मतलब

टिकैत ने खुद कहा है कि हरियाणा का आंदोलन उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंच सकता है। 2020-21 के आंदोलन की याद अभी ताजा है, जब दिल्ली की सीमाओं पर किसान 13 महीने बैठे थे। टिकैत ने महापंचायत में उसी दौर की याद दिलाई है।

दूसरा असर गन्ने के भाव पर होगा। पेराई सत्र शुरू होने से पहले भाव की घोषणा होती है। अगर हरियाणा में किसानों का दबाव तेज रहता है और वहां रेट का मुद्दा गर्म होता है, तो यूपी में भी किसान संगठन उसी आधार पर अपनी मांगें तेज कर सकते हैं। दो राज्यों के बीच तुलना हमेशा किसानों की सौदेबाजी का हथियार रही है।

तीसरी बात यह है कि आंदोलन की लहर सीमा पार करती है। जब भी किसान नेता बॉर्डर सील जैसी बात कहते हैं, उसका मकसद सरकार पर दबाव बनाना होता है। यूपी के किसानों के लिए इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि आने वाले हफ्तों में गन्ना भाव और पर्ची-तौल से जुड़े मुद्दों पर निगरानी रखना जरूरी हो गया है।

मुख्य बातें

  • 4 अक्टूबर को यमुनानगर के औरंगाबाद में भाकियू (टिकैत) की महापंचायत के बाद पंचकूला-सहारनपुर हाईवे जाम हुआ, धान खरीद में देरी मुख्य वजह थी।
  • राकेश टिकैत ने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो संयुक्त किसान मोर्चा बड़ा फैसला लेगा, और जरूरत पड़ी तो यूपी-हरियाणा बॉर्डर दोबारा सील हो सकता है।
  • पेराई सत्र से पहले यूपी के गन्ना किसानों के लिए संदेश साफ है: गन्ने के भाव और आंदोलन की गतिविधियों पर नजर रखें, दबाव दोनों राज्यों में एक साथ बढ़ रहा है।

स्रोत: पीटीआई (द प्रिंट के माध्यम से), एएनआई (लोकमत टाइम्स के माध्यम से), द ट्रिब्यून, हिंदुस्तान टाइम्स, लल्लूराम

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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