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बिना खेत बढ़ाए 75 हजार/महीना: मधुमक्खी पालन पर UP दे रहा 40% अनुदान

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 12 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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बिना खेत बढ़ाए 75 हजार/महीना: मधुमक्खी पालन पर UP दे रहा 40% अनुदान

गन्ने की पर्ची तो हर साल आती है, पर उससे घर कब चलेगा, ये हिसाब हर किसान अपने मन में जोड़ता है। चीनी मिल का भाव, तौल की घतौली, और पर्ची का इंतजार, ये तीन चीजें किसान की जेब तय करती हैं। इस चक्कर में एक और आय का रास्ता कई किसान अनदेखा कर जाते हैं, जो ना खेत मांगता है, ना रोज का मेहनतकश काम। नाम है मधुमक्खी पालन।

उत्तर प्रदेश सरकार इस वक्त बागवानी मिशन के तहत मौन पालन पर भारी अनुदान दे रही है। 50 बॉक्स की एक यूनिट की कुल लागत 3.20 लाख रुपये है, जिसमें से 1.28 लाख रुपये यानी 40 प्रतिशत अनुदान सरकार सीधे किसान के बैंक खाते में भेजती है। दैनिक जागरण के मुताबिक हर जिले में अभी दो-दो यूनिट का लक्ष्य रखा गया है और लाभ पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिल रहा है। यानी इच्छुक किसान को देर नहीं करनी चाहिए।

यूनिट का पूरा गणित

योजना के तहत किसान को 8-8 फ्रेम वाले 50 बक्सों की एक मौन पालन यूनिट लगानी होती है। कुल खर्च 3.20 लाख रुपये बैठता है। 40 प्रतिशत अनुदान घटा दें, तो किसान की जेब से करीब 1.92 लाख रुपये लगते हैं।

अब कमाई का हिसाब। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक फूल वाले मौसम में एक बॉक्स से एक महीने में करीब 5 किलो शुद्ध शहद मिलता है। 50 बॉक्स हुए तो एक महीने में करीब ढाई क्विंटल शहद। शहद का भाव औसतन 300 रुपये प्रति किलो भी पकड़ें, तो हर माह 75,000 रुपये की अतिरिक्त आमदनी शहद बेचकर निकलती है। जौनपुर के समृद्ध मौर्या जैसे किसानों का अनुभव है कि एक बॉक्स से साल भर में औसतन 40 से 50 किलो शहद का उत्पादन होता है। ध्यान रखें, ये कमाई फूल के मौसम पर निर्भर है, साल के 12 महीने एक जैसी नहीं रहती। लेकिन जो किसान एक बार बॉक्स लगा लेता है, उसके लिए ये रकम गन्ने के साथ एक मजबूत सहारा बन जाती है।

गन्ना किसान के लिए ये मौका क्यों खास है

गन्ना अकेला नहीं उगता। शरदकालीन बुवाई में कई किसान पंक्तियों के बीच सरसों जैसी अंतरवर्ती फसल लगाते हैं। सरसों के पीले फूल मधुमक्खियों के लिए बेहतरीन रस का स्रोत हैं। मधुमक्खियां इन फूलों पर मंडराकर परागण भी करती हैं, जिससे सरसों की उपज में भी बढ़ोतरी दर्ज होती है। यानी एक ही खेत से गन्ना, सरसों और शहद, तीनों की कमाई।

दूसरा बड़ा फायदा जमीन की है। बक्सों के लिए अलग खेत नहीं चाहिए। घर के आसपास, बगीचे में, खेत की मेड़ पर पेड़ों की छाया में, कहीं भी यूनिट लग सकती है। मधुमक्खियां 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में खुद फूल ढूंढ लेती हैं। गन्ना इलाकों में मेड़ों पर लगे पेड़, आम के बाग और आसपास के सरसों के खेत, ये सब उनके लिए काफी हैं।

बॉक्स लगाने का तरीका और जगह

शुरुआत छोटे पैमाने से भी हो सकती है, लेकिन अनुदान 50 बॉक्स की यूनिट पर ही मिलता है। बॉक्स रखने की जगह चुनते समय चार बातें ध्यान रखें। पहली, छाया हो और तेज हवा न लगती हो। दूसरी, नजदीक में पानी का स्रोत हो, क्योंकि मधुमक्खियों को रोज पानी चाहिए। तीसरी, जगह ऐसी हो जहां आसपास कीटनाशक का छिड़काव न होता हो। चौथी, मवेशियों और आम रास्ते से थोड़ी दूरी हो ताकि डंक का डर न रहे।

बॉक्स लकड़ी के स्टैंड पर जमीन से थोड़ा ऊपर रखे जाते हैं। हर बॉक्स में रानी मक्खी समेत पूरा कॉलोनी झुंड होता है।

शहद बेचना, पैकिंग और बाजार

कच्चा शहद सीधे लोकल बाजार, मंडियों और पड़ोस में बिकता है। जौनपुर के किसान ने अपने नाम से पैकिंग शुरू की और शहद दुकानों पर बिकने लगा। शुद्ध शहद की पहचान बाजार में बनी रहे, इसलिए मिलावट से दूर रहना ही सबसे बड़ी पूंजी है। अच्छी पैकिंग और सही भाव पर शहद की मांग शहरों में लगातार बनी रहती है।

एक सलाह ये भी है कि शहद के साथ मोम भी बेचा जा सकता है। बक्सों से निकलने वाला मोम मोमबत्ती, कॉस्मेटिक और आयुर्वेदिक उत्पादों में इस्तेमाल होता है, इसका भी बाजार है।

चार सावधानियां, जो नुकसान से बचाएंगी

कीटनाशक से दूरी सबसे जरूरी है। जिस दिन गन्ने या आसपास की फसल में कीटनाशक का छिड़काव हो, उस दिन मधुमक्खियां जहर खा सकती हैं। स्प्रे वाले दिनों में बॉक्स का मुंह बंद रखने या मक्खियों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था जरूरी है। पड़ोसी किसानों को भी इस बारे में बता दें।

दूसरी सावधानी पानी की है। गर्मी के दिनों में बॉक्स के पास साफ पानी का बर्तन रखना न भूलें। तीसरी, सर्दियों में बॉक्स को ठंड और नमी से बचाएं। हल्का ढकाव और धूप वाली जगह काम आती है। चौथी, मक्खियों के रोगों पर नजर रखें। कोई बीमारी दिखे तो जिला उद्यान अधिकारी के कार्यालय से सलाह लें, खुद दवा के प्रयोग से बचें।

आवेदन कैसे करें

इच्छुक किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रक्रिया जिला उद्यान अधिकारी के कार्यालय के जरिए होती है। जिले में लक्ष्य सीमित है, दो यूनिट प्रति जिला, इसलिए समय पर आवेदन करना फायदेमंद रहेगा। आवेदन से पहले अपने नजदीकी उद्यान कार्यालय जाकर दस्तावेजों की सूची जरूर ले लें, ताकि फॉर्म रिजेक्ट न हो।

मुख्य बातें

  • UP बागवानी मिशन में 50 बॉक्स (8-8 फ्रेम) की मौन पालन यूनिट की लागत 3.20 लाख, 40% यानी 1.28 लाख रुपये अनुदान सीधे खाते में।
  • फूल के मौसम में 50 बॉक्स से हर माह करीब ढाई क्विंटल शहद, 300 रुपये/किलो के भाव पर 75 हजार तक की एक्स्ट्रा आय संभव।
  • गन्ने के साथ सरसों की अंतरवर्ती फसल पर मक्खियां परागण भी बढ़ाती हैं, बॉक्स के लिए अलग जमीन नहीं चाहिए।

स्रोत: दैनिक जागरण (अंबेडकरनगर, UP बागवानी विभाग/जिला उद्यान अधिकारी के हवाले से), किसान ऑफ इंडिया (यूनिट लागत और उत्पादन आंकड़े), अतुल्य भारत चेतना (जौनपुर किसान अनुभव)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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