15 अक्टूबर से पहले गन्ने को गिरने से बचाएं: 4 बचाव और गिरे गन्ने की कटाई का सही क्रम

आंधी के बाद खेत में बिछी फसल देखकर किसान के मन में एक ही सवाल उठता है: अब पहला काम क्या करें, गन्ने को बांधें या सीधे कटाई की तैयारी में लग जाएं? सही जवाब दोनों में से कोई एक नहीं है। जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि गन्ना कितना गिरा है, कब गिरा है और आपकी मिल कब चलने वाली है। पश्चिमी यूपी में 15 अक्टूबर से मिलें चलनी शुरू हो रही हैं, इसलिए यह सवाल अभी सबसे ज्यादा जरूरी है।
इस गाइड में हम दोनों स्थितियों की बात करेंगे: जो फसल अभी खड़ी है, उसे गिरने से कैसे बचाएं; और जो गिर चुकी है, उसे पेराई तक कैसे संभालें ताकि नुकसान कम से कम हो।
गिरा गन्ना खेत में क्यों भारी पड़ता है
गिरा हुआ गन्ना सिर्फ देखने में खराब नहीं लगता। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक जमीन से छूते डंठल में आंखें फूटने लगती हैं, हवाई जड़ें निकल आती हैं और चूहे डंठल काट देते हैं। कटाई भी मुश्किल हो जाती है, क्योंकि बिखरे डंठल उठाने में दोगुनी मजदूरी लगती है और मिल तक मिट्टी लगा गन्ना पहुंचता है। यही कारण है कि लोट-पोट को सिर्फ खेत की नहीं, पेराई की समस्या मानकर चलना चाहिए।
खड़ी फसल के लिए अभी 4 बचाव-उपाय
पेराई से पहले के इन 2-3 हफ्तों में जो फसल अभी सीधी खड़ी है, उसे बचाना सबसे सस्ता सौदा है। गिरने के बाद संभालने से कहीं आसान है गिरने से रोकना।
1. बंधाई सही तरीके से करें। सूखी पत्तियों से कतारों के डंठलों को आपस में बांधना लोट-पोट रोकने का सबसे आजमाया तरीका है। ध्यान रखें कि हरी पत्तियों का गुच्छा एक जगह इकट्ठा करके न बांधें, इससे प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है और डंठल कमजोर पड़ता है। सूखी निचली पत्तियों से बांधने से डंठल को सहारा भी मिलता है और पत्तियां काम की भी रहती हैं।
2. जड़ों पर आखिरी बार मिट्टी चढ़ाएं। मिट्टी चढ़ाने से गन्ने की जड़ों को मजबूत पकड़ मिलती है और यही पकड़ आंधी के झोंकों में फसल को थामे रखती है। बरसात के बाद खेत की मिट्टी नरम होती है, इस नमी का फायदा उठाकर पौधों की जड़ों के आसपास हल्की मिट्टी चढ़ा दें। गीली मिट्टी में दबाने से पौधों को नीचे से मजबूत सहारा मिलता है और नई जड़ें भी तेजी से निकलती हैं।
3. पोटाश की भूमिका न भूलें। कृषि सलाह के मुताबिक पोटाश डालने से डंठल मजबूत बनता है और गिरने का खतरा घटता है। इसके उलट अब इस समय यूरिया यानी नाइट्रोजन की अतिरिक्त मात्रा से बचें, क्योंकि ज्यादा नाइट्रोजन से डंठल लंबा तो होता है, पर अंदर से खोखला और कमजोर रहता है।
4. खेत के किनारे हवा-रोक लगाएं। जिस दिशा से आंधी आती है, उस तरफ खेत के किनारे ऊंचे पेड़ या झाड़ियां हवा की रफ्तार तोड़ देती हैं। यह काम इस सीजन में पूरा नहीं होगा, लेकिन अगली बुवाई से पहले इसकी योजना बना लें। गहरी कूड़ में बुवाई और कतारों की सही दूरी भी लंबे समय में लोट-पोट का खतरा घटाती है।
आंधी के बाद गिरा गन्ना: तुरंत 4 काम
अगर फसल गिर चुकी है, तो घबराने की जगह क्रम से काम करें। सितंबर 2026 में शाहजहांपुर के किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने जो सलाह दी थी, वह हर जिले के काम की है।
सबसे पहले पानी निकालें। गिरे गन्ने के खेत में पानी भरा हो तो जड़ें सड़ने लगती हैं। खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी सबसे पहला काम है।
फिर जड़ों पर मिट्टी चढ़ाएं। बारिश के बाद नरम मिट्टी में यह काम आसान होता है और गिरे पौधों को दोबारा सहारा मिलता है। जहां डंठल पूरी तरह जमीन पर बिछ गया हो, वहां जबरदस्ती उठाने की कोशिश में डंठल टूटने का डर रहता है, ऐसे में कटाई की तैयारी बेहतर विकल्प है।
फफूंद का खतरा देखें। फसल गिरने और नमी बढ़ने से कवक जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जो पत्तियों और तने को नुकसान पहुंचाती हैं। साफ मौसम में कृषि विशेषज्ञ की सलाह से सही फफूंदनाशक का छिड़काव करें, ताकि डंठल की मोटाई और मिठास पर बुरा असर न पड़े।
गिरे खेत को कटाई में पहले रखें। यह सबसे अहम फैसला है। गिरा हुआ गन्ना खेत में जितना ज्यादा पड़ा रहेगा, उतनी ज्यादा आंखें फूटेंगी और सड़न बढ़ेगी। इसलिए पेराई शुरू होते ही गिरे हुए खेत की कटाई की लाइन सबसे पहले लगाएं। खड़े खेत का गन्ना इंतजार कर सकता है, गिरा हुआ नहीं।
पेराई तक गिरे गन्ने की तैयारी
कटाई के समय बिखरे डंठलों से मिट्टी और सूखी पत्तियां अच्छी तरह साफ कर लें, क्योंकि गंदा गन्ना मिल की तौल पर भी दिक्कत देता है। गिरे और खड़े खेत का गन्ना मिल को अलग-अलग भेजें, ताकि मिल को साफ डंठल मिले और आपकी पर्ची में कटौती की नौबत न आए। कटाई के बाद खेत में बचे ठूंठों की देखभाल पेड़ी फसल के लिए भी जरूरी है, क्योंकि गिरे खेत की पेड़ी वैसे भी कमजोर रहती है।
याद रखें, लोट-पोट हर साल की कहानी है। जो किसान बंधाई और मिट्टी चढ़ाने का काम समय पर करता है, उसका गन्ना आंधी में भी खड़ा रहता है और पेराई में उसकी ट्रॉली सबसे पहले मिल पहुंचती है।
मुख्य बातें
- खड़ी फसल को बचाने के लिए सूखी पत्तियों से सही बंधाई करें, जड़ों पर मिट्टी चढ़ाएं और पोटाश पर ध्यान दें; अब यूरिया की अतिरिक्त मात्रा से बचें।
- आंधी के बाद सबसे पहले खेत से पानी निकालें, फिर गीली मिट्टी में जड़ों पर मिट्टी चढ़ाएं और फफूंद से बचाव के लिए विशेषज्ञ की सलाह से छिड़काव करें।
- गिरे हुए खेत की कटाई पेराई में सबसे पहले कराएं, क्योंकि पड़ा हुआ गन्ना रोज नुकसान बढ़ाता है।
स्रोत: कृषि विज्ञान सलाह (eagri.org, TNAU), भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज (indiansugar.com), News18 हिंदी कृषि सलाह, सितंबर 2026।
