गन्ना भाव

गन्ने की लागत ₹2,22,520 प्रति हेक्टेयर पहुंची, अब ₹500 भाव की मांग और तेज़

✍️ Aamir Raza · 🗓 27 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ने की लागत ₹2,22,520 प्रति हेक्टेयर पहुंची, अब ₹500 भाव की मांग और तेज़

एक हेक्टेयर गन्ने की खेती पर इस सत्र औसतन ₹2,22,520 खर्च आ रहा है। पिछले साल यही खर्च ₹2,12,043 था। यानी एक साल में लागत ₹10,477 बढ़ गई है। इसी एक आंकड़े ने उत्तर प्रदेश में गन्ने के भाव की बहस को फिर गरमा दिया है। किसान संगठन अब कम से कम ₹500 प्रति क्विंटल भाव मांग रहे हैं। पेराई सत्र शुरू हो चुका है, 2026-27 के गन्ना मूल्य की घोषणा अभी बाकी है।

लागत कहां बढ़ी

किसान संगठनों के आंकलन में पौध और पेड़ी, दोनों फसलों की औसत लागत जोड़ी गई है। पौध फसल में खर्च ज्यादा बैठता है। खेत की तैयारी, बीज, खाद और निराई-गुड़ाई पर ही बड़ा हिस्सा निकल जाता है। पेड़ी फसल में ये खर्च अपेक्षाकृत कम होते हैं, क्योंकि बीज और जुताई का काम पहले हो चुका होता है।

दोनों का औसत निकालने पर इस सत्र की लागत ₹2,22,520 प्रति हेक्टेयर बैठती है। पिछले साल का औसत ₹2,12,043 था। खाद, बीज और खेत के कामों पर बढ़ते खर्च को किसान इस बढ़ोतरी की वजह बता रहे हैं। संगठनों का कहना है कि भाव तय करते समय इस बढ़ी लागत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

चीनी के दाम बने मांग की बुनियाद

किसानों की मांग का दूसरा आधार चीनी के बाजार भाव हैं। पिछले पेराई सत्र में मिलों से बिकने वाली चीनी की कीमत शुरुआती दौर में लगभग ₹4,000 प्रति क्विंटल थी। सत्र के आगे बढ़ने के साथ यह करीब ₹6,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।

किसानों का तर्क सीधा है। जब चीनी महंगी बिकी है तो उसका फायदा गन्ना उगाने वाले को भी मिलना चाहिए। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा है कि ₹400 प्रति क्विंटल का मौजूदा भाव लागत के लिहाज से पर्याप्त नहीं है और सरकार को भाव कम से कम ₹500 प्रति क्विंटल घोषित करना चाहिए।

मिलों का गणित भी समझिए

भाव की इस लड़ाई में मिलों का पक्ष भी जानना जरूरी है, ताकि किसान पूरी तस्वीर के साथ अपनी बात रख सकें। मिलों के आकलन के मुताबिक एक क्विंटल चीनी बनाने में औसतन नौ क्विंटल गन्ना लगता है। ₹400 प्रति क्विंटल के भाव से इसकी लागत ₹3,600 बैठती है। ढुलाई पर करीब ₹20 और वेतन व प्रक्रिया पर लगभग ₹50 से ₹55 प्रति क्विंटल और जुड़ जाते हैं। शीरा और एथेनॉल की अर्थव्यवस्था भी इस गणित का हिस्सा है, जिस पर दोनों पक्षों के आंकड़े अलग-अलग हैं।

SAP की स्थिति: पुराना भाव, नया सत्र

यहां एक बात साफ रखना जरूरी है। पिछले पेराई सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (SAP) में ₹30 प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी। इसके बाद SAP 2025-26 में अगेती किस्म के लिए ₹400, सामान्य किस्म के लिए ₹390 और अनुपयुक्त किस्म के लिए ₹355 प्रति क्विंटल तय हुआ था।

2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है। जब तक नई घोषणा नहीं होती, पिछले सत्र का भाव ही चर्चा का आधार है, लेकिन वह इस सत्र का घोषित भाव नहीं है। किसान इस अंतर को ध्यान में रखें और किसी भी खबर में पुराने भाव को नए सत्र का भाव समझने की गलती न करें।

पेराई शुरू हो चुकी है, फैसला बाकी है

इस बीच पेराई सत्र 2026-27 समय पर शुरू हो गया है। भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) के मुताबिक देश में अब तक करीब 107 मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। इनमें महाराष्ट्र की करीब 87 मिलें हैं। उत्तर प्रदेश में अब तक दो मिलों ने पेराई शुरू की है।

ISMA के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले तीन से चार दिन में पेराई शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद मध्य और फिर पूर्वी उत्तर प्रदेश में पेराई चरणों में बढ़ेगी, क्योंकि वहां गन्ना देर से पकता है। 25 अक्टूबर तक इस सत्र में करीब 4 लाख टन चीनी उत्पादन हो चुका था, जबकि पिछले साल इसी तारीख तक यह करीब 60 हजार टन था। पिछले सत्र की समाप्ति पर करीब 36 लाख टन का स्टॉक बचा था, जिससे घरेलू आपूर्ति की स्थिति मजबूत बताई जा रही है।

गन्ना मिलों में पहुंचने लगा है, लेकिन भाव का फैसला अभी होना है। यही वह समय है जब लागत के आंकड़े सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।

किसान के लिए इसका मतलब क्या है

अपनी पर्ची और तौल का रिकॉर्ड संभालकर रखें, क्योंकि भाव की घोषणा के बाद भुगतान की गणना इन्हीं दस्तावेजों से होती है। किसी बिचौलिए या अफवाह के भरोसे गन्ना न बेचें, SAP की घोषणा सरकारी माध्यम से ही मानें। अगर आपकी मिल ने पेराई शुरू कर दी है तो पर्ची की तारीख और गन्ने की किस्म का मिलान कर लें, क्योंकि अगेती, सामान्य और अनुपयुक्त किस्म के भाव अलग-अलग होते हैं।

मांग ₹500 की है, फैसला सरकार का है। लेकिन लागत का यह आंकड़ा किसानों के पक्ष को मजबूत करता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार 2026-27 के SAP में लागत की इस बढ़ोतरी को कितनी जगह देती है।

मुख्य बातें

  • इस सत्र गन्ने की औसत उत्पादन लागत ₹2,22,520 प्रति हेक्टेयर आंकी गई है, जो पिछले साल से ₹10,477 ज्यादा है।
  • किसान संगठन कम से कम ₹500 प्रति क्विंटल भाव मांग रहे हैं; चीनी के दाम पिछले सत्र में ₹4,000 से बढ़कर करीब ₹6,000 प्रति क्विंटल तक पहुंचे थे।
  • SAP 2025-26 में अगेती ₹400, सामान्य ₹390 और अनुपयुक्त ₹355 प्रति क्विंटल था; 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है।

स्रोत: इंडिया टुडे हिंदी, 27 अक्टूबर 2026; राइट न्यूज़; इकोनॉमिक टाइम्स/ISMA, 26 अक्टूबर 2026।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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