गन्ना किसान अब 'ऊर्जादाता': E20 पर गडकरी का नया दावा, माइलेज बढ़ने की रिपोर्ट

पिछले कुछ महीनों से पेट्रोल पंपों पर E20 का बोर्ड देखकर गाड़ी वालों के मन में एक ही सवाल उठता है, “क्या इससे इंजन खराब हो जाएगा, एवरेज घट जाएगा?” सोशल मीडिया और संसद तक इस पर बहस छिड़ी हुई थी। अब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसका जवाब अपने अंदाज में दिया है।
25 सितंबर 2026 को भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत के दौरान गडकरी ने कहा कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। उन्होंने एक ताजा रिपोर्ट का हवाला दिया, हालांकि उस रिपोर्ट का नाम उन्होंने नहीं बताया।
भोपाल में गडकरी ने क्या कहा
गडकरी ने मंच से कहा, “2022 से भारत में इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल इस्तेमाल हो रहा है। आज देश में चार करोड़ चार पहिया और दो करोड़ दो पहिया वाहनों में यही ईंधन डलता है। मुझे भरोसा है कि किसी भी गाड़ी को कोई दिक्कत नहीं हुई। हमें एक रिपोर्ट मिली है, जिससे पता चला है कि इससे गाड़ियों का एवरेज भी बढ़ा है।”
उन्होंने बताया कि देश में होने वाला करीब 40 फीसदी प्रदूषण परिवहन क्षेत्र की वजह से है। इस प्रदूषण को खत्म करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों और फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों को बढ़ावा देना जरूरी है।
E20 होता क्या है
गडकरी ने भोपाल में ही इसका मतलब भी समझाया। E20 यानी पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाना। यह इथेनॉल किसान तैयार करता है, मक्के से, धान की पराली से, कपास की डंठल से। यह व्यवस्था सिर्फ भारत में नहीं, दुनिया के 19 देशों में चल रही है। अमेरिका, जर्मनी और जापान जैसे देश भी इथेनॉल वाला ईंधन इस्तेमाल करते हैं।
‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनता किसान
कार्यक्रम का सबसे बड़ा संदेश गडकरी की यह पंक्ति रही: “आज किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, ऊर्जादाता बन गया है।”
उन्होंने आंकड़े भी रखे। जब इथेनॉल मक्के से बनना शुरू हुआ, तब मक्का 1,200 रुपये क्विंटल बिकता था और उसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये था। आज उत्तर प्रदेश और बिहार के किसान मक्के का 2,600 रुपये क्विंटल भाव पा रहे हैं। गडकरी के मुताबिक इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से अब तक किसानों को 45,000 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
पीटीआई की पहले की रिपोर्टों के मुताबिक पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से किसानों को कच्चे माल, यानी गन्ने और मक्के, के बदले करीब 40,000 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। साफ है, गन्ना इस पूरी योजना की नींव है।
100 फीसदी इथेनॉल वाली गाड़ियां और 25 रुपये का दावा
गडकरी ने फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों का भी खाका खींचा। उन्होंने कहा कि अब ऑटो कंपनियां 100 फीसदी इथेनॉल पर चलने वाले इंजन बनाएंगी। टाटा, महिंद्रा, टोयोटा और सुजुकी जैसी कंपनियों के ऐसे वाहन आने वाले हैं। जून में मारुति सुजुकी देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार पहले ही पेश कर चुकी है।
सबसे चौंकाने वाला दावा टोयोटा की 100 फीसदी इथेनॉल वाली इनोवा को लेकर रहा। गडकरी के मुताबिक इसमें 100 फीसदी इथेनॉल डालने पर गाड़ी चलते वक्त करीब 60 फीसदी बिजली भी पैदा करती है, जिससे पेट्रोल से ज्यादा एवरेज मिलता है। इसका चलाना ऐसा होगा जैसे पेट्रोल 25 रुपये लीटर हो।
उनका बड़ा दावा यह भी था कि वैकल्पिक ईंधन अपनाने से देश को 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोल-डीजल आयात नहीं करना पड़ेगा। बचने वाला पैसा किसानों की आय बढ़ाएगा। साथ ही देश के 10 रूटों पर हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक और बसें चलाने की योजना भी उन्होंने दोहराई।
एक नजर में दूसरी तरफ की बात
सरकार का कहना है कि वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल एसोसिएशनों या उपभोक्ता समूहों से E20 के माइलेज, इंजन की सेहत या मेंटेनेंस खर्च पर कोई बड़ी या पुख्ता शिकायत नहीं मिली है। सरकार ने इंजन की मजबूती और पुर्जों की अनुकूलता पर लैब अध्ययन और फील्ड ट्रायल का भी हवाला दिया है।
लेकिन ईमानदारी से कहें तो गडकरी ने माइलेज बढ़ने की जिस रिपोर्ट का जिक्र किया, उसका नाम या स्रोत उन्होंने सार्वजनिक नहीं किया। यानी यह मंत्री का बयान है, किसी स्वतंत्र अध्ययन का प्रकाशित निष्कर्ष नहीं।
यूपी के गन्ना किसान के लिए इसका मतलब
सवाल उठता है, भोपाल की इस घोषणा का यूपी के गन्ना किसान से क्या वास्ता? वास्ता सीधा है। इथेनॉल की मांग जितनी बढ़ेगी, गन्ने और मक्के जैसे कच्चे माल की खपत उतनी बढ़ेगी।
पहले से ही चीनी मिलें इथेनॉल उत्पादन में लगी हैं। इथेनॉल से मिलने वाली आय मिलों की कमाई का बड़ा हिस्सा बनती जा रही है। जब मिलों की कमाई बढ़ती है, तो किसानों के भुगतान की स्थिति भी मजबूत होती है। यही वह कड़ी है जिससे E20 की हर घोषणा किसान के खेत तक पहुंचती है।
गडकरी का “ऊर्जादाता” वाला बयान भी इसी कड़ी का हिस्सा है। किसान अब सिर्फ गन्ना उगाने वाला नहीं, देश के ईंधन का स्रोत बन रहा है। आने वाले समय में इथेनॉल की मांग बढ़ने पर गन्ने की खपत बढ़ेगी, और इससे भाव और भुगतान दोनों पर अच्छा असर पड़ने की उम्मीद है।
मुख्य बातें
- भोपाल में गडकरी ने दावा किया कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों का एवरेज बढ़ा है, इंजन को कोई नुकसान नहीं हुआ।
- देश में 2022 से 4 करोड़ चार पहिया और 2 करोड़ दो पहिया वाहनों में E20 इस्तेमाल हो रहा है।
- यूपी-बिहार के किसान मक्के का 2,600 रुपये क्विंटल भाव पा रहे हैं, इथेनॉल से किसानों को अब तक 45,000 करोड़ रुपये मिले।
स्रोत: द हिंदू (26 सितंबर 2026), द ट्रिब्यून (26 सितंबर 2026), न्यूज18 हिंदी (25 सितंबर 2026)
