गन्ने का खरपतवार चुपचाप 40% उपज खा जाता है: 5 उपाय जो खर्च घटाएं

सुबह की सिंचाई का पानी गन्ने की जड़ों तक पहुंचने से पहले ही खरपतवार उसे पी जाते हैं। यह कोई काव्यात्मक कहावत नहीं, खेत की रोज़ की सच्चाई है। गन्ना बोने के बाद पहले दो-ढाई महीनों में अगर खरपतवार न दबाए गए तो फसल को खाद भी कम मिलती है, पानी भी कम मिलता है और रोशनी भी। शोध बताते हैं कि इस लापरवाही की कीमत बहुत भारी पड़ती है। खरपतवार गन्ने की 40 से 60 प्रतिशत तक उपज चुरा सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि पांच ठोस उपाय हैं जो इस चोरी को रोकते हैं और उल्टा आपकी जेब का बोझ भी घटाते हैं।
सबसे पहले समझिए: खरपतवार का निशाना कब सबसे ज़्यादा लगता है
शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट, कोयंबटूर के दो सीजन के प्रयोगों ने साफ नापा है। बोए गए (प्लांट) गन्ने में फसल-खरपतवार की सबसे गंभीर प्रतिस्पर्धा बुवाई के 30 से 45 दिन बाद होती है। पेड़ी फसल में यह खिड़की और चौड़ी है, पेड़ी शुरू होने के 30 से 90 दिन तक। यानी जो काम इन दिनों में हो गया, वही असली काम है। खेत बुवाई के तीसरे दिन से लेकर तीसरे महीने तक जो खरपतवार निकाल देता है, उसे बाकी सीजन में रुक-रुक कर छोटी देखभाल ही करनी पड़ती है।
उपाय 1: बुवाई के दूसरे-तीसरे दिन खरपतवारनाशी का छिड़काव
खरपतवार को अंकुरित होने से पहले ही रोकना सबसे सस्ता हथियार है। बुवाई के 2 दिन के भीतर प्रति एकड़ 800 ग्राम पेंडिमेथालिन का छिड़काव करें। या फिर अंकुरण से पहले प्रति एकड़ 800 ग्राम एट्राजिन का प्रयोग करें। कृषि संस्थानों की सलाह में यह मात्रा 2 किलो प्रति हेक्टेयर (900 लीटर पानी में) के तौर पर दर्ज है, जो तीसरे दिन डिफ्लेक्टर या फैन टाइप नोजल से दी जाती है। छिड़काव तभी करें जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो। सूखी मिट्टी पर दवा का असर आधा रह जाता है। तेज हवा या बादल वाले मौसम में छिड़काव न करें। यह एक छिड़काव पूरे महीने की दो निराई के बराबर काम करता है, और मजदूरी पर खर्च होने वाला पैसा सीधे बचता है।
उपाय 2: 30 दिन पर पहली निराई-गुड़ाई, फिर 30-30 दिन का अंतर
जिस किसान ने ऊपर वाला छिड़काव किया, उसे भी बुवाई के 30 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई ज़रूर करनी चाहिए। उसके बाद 30-30 दिन के अंतराल पर जरूरत के हिसाब से दूसरी और तीसरी निराई कर दें। जिन खेतों में दवा नहीं डली, वहां जूनियर-हो से 25, 55 और 85 दिन पर कूड़ियों की निराई-गुड़ाई की सलाह दी जाती है। निराई सिर्फ खरपतवार निकालने का काम नहीं करती। मिट्टी की पपड़ी टूटती है, हवा-रोशनी जड़ों तक पहुंचती है और किल्ले (टिलरिंग) अच्छी निकलती है। मजदूर का एक दिन महंगा लगता है, पर तीन निराई की लागत भी दो क्विंटल उपज के नुकसान से कम ही पड़ती है।
उपाय 3: कटाई के बाद पत्ती की मल्चिंग: फ्री की दवा
गन्ने की पत्ती जो कटाई के बाद खेत में पड़ी रहती है, वही सबसे सस्ता खरपतवार-रोधी है। बुवाई के एक हफ्ते के भीतर कूड़ियों पर 10 सेंटीमीटर मोटी पत्ती की परत एकसार बिछा दें। रोशनी न मिलने से खरपतवार सूखकर नष्ट हो जाते हैं। यह परत नमी भी बचाती है और तना-छेदक कीट के प्रकोप में भी कमी आती है। खर्च शून्य, पत्ती खेत में ही है। यह तरीका उन किसानों के लिए सबसे अच्छा है जो दवा का प्रयोग कम से कम करना चाहते हैं।
उपाय 4: खड़े खेत में लक्षित छिड़काव: बुवाई के 21वें दिन
अगर प्री-इमरजेंस छिड़काव छूट गया, तो बुवाई के 21वें दिन पोस्ट-इमरजेंस छिड़काव किया जा सकता है। कृषि संस्थानों की सिफारिश के अनुसार प्रति हेक्टेयर 2.5 लीटर ग्रैमाक्सोन और 2.5 किलो 2,4-डी सोडियम साल्ट को 900 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर प्रति एकड़ 600 ग्राम 2,4-डी (बाजार में वीडमार नाम से मिलती है) का छिड़काव असरदार है। घास (सेसेज) किस्म के खरपतवारों पर टोटल खरपतवारनाशी का स्पॉट स्प्रे कराएं। एक सावधानी जो शोध पत्रों में बार-बार दोहराई गई है, एक ही शाकनाशी का बार-बार प्रयोग न करें, खरपतवार उससे प्रतिरोधी हो जाते हैं। और शाकनाशी के साथ कीटनाशक या फफूंदनाशक न मिलाएं, दोनों का असर घटता है।
उपाय 5: पेड़ी में 120 दिन बाद बेल-खरपतवार पर नज़र
पेड़ी फसल में फसल के 120 दिन के बाद बेल की तरह लिपटने वाले खरपतवार एक नई मुसीबत बन रहे हैं। ये गन्ने के पौधे को झुका देते हैं और बढ़त रुक जाती है। इन पर हाथ से निराई सबसे भरोसेमंद है, क्योंकि पत्तियों पर बंधी बेलों पर छिड़काव की दवा पूरी नहीं पहुंचती। पेड़ी में रासायनिक नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 400 से 800 ग्राम एट्राजिन 50% डब्ल्यूपी का छिड़काव किया जा सकता है। याद रखें, पेड़ी में गंभीर प्रतिस्पर्धा की खिड़की 90 दिन तक है, इसलिए बुवाई-पेड़ी के पहले तीन महीनों में ही जोर लगाएं।
सुरक्षा के तीन नियम जो हर बार लागू होंगे
एक, दवा के पैकेट पर लिखे निर्देश पढ़कर ही प्रयोग करें और सही मात्रा रखें। ज्यादा दवा फसल को नुकसान पहुंचाती है, कम दवा पैसे की बर्बादी है। दो, खरीदते समय दवा की मियाद (एक्सपायरी डेट) ज़रूर जांचें। तीन, छिड़काव के बाद 3 से 4 हफ्ते तक खेत में कोई और सांस्कृतिक कार्य न करें ताकि दवा का पूरा असर मिले।
मुख्य बातें
- प्लांट गन्ने में 30-45 दिन और पेड़ी में 30-90 दिन खरपतवार की गंभीर प्रतिस्पर्धा की खिड़की है, इसी में जोर लगाएं।
- बुवाई के 2-3 दिन में पेंडिमेथालिन या एट्राजिन का छिड़काव और 10 सेमी पत्ती की मल्चिंग सस्ते और असरदार हथियार हैं।
- 30, 60 और 90 दिन पर निराई-गुड़ाई, चौड़ी पत्ती पर 2,4-डी, बेल-खरपतवार पर हाथ-निराई, एक ही दवा बार-बार न दोहराएं।
स्रोत: शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट (कोयंबटूर): फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा अध्ययन, sugarcane.res.in; ई-अग्रीकल्चर (AGRO 304) खरपतवार प्रबंधन पाठ्यक्रम, eagri.org; गन्ने में खरपतवार प्रबंधन पर हिंदी कृषि सलाह, dehaat.in; थाईलैंड देर-वर्षा गन्ना अध्ययन, MDPI Agronomy (2025)।
