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गन्ने में खरपतवार से उपज बचानी है? बुवाई के बाद ये 3 तारीखें याद रखो

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 07 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ने में खरपतवार से उपज बचानी है? बुवाई के बाद ये 3 तारीखें याद रखो

अक्टूबर का महीना है, शरदकालीन बुवाई जोरों पर चल रही है। खेत में गन्ने की गोज़ डाली, ऊपर से मिट्टी चढ़ाई और किसान निश्चिंत हो गया कि अब काम खत्म। लेकिन असली मुकाबला तो अब शुरू होता है। गन्ने की आंख फूटने में जितना समय लेती है, खरपतवार उससे पहले खेत में कब्जा जमा लेते हैं। बथुआ, दूब, मोथा और चौलाई गन्ने के नन्हे कल्लों से धूप, पानी और खाद छीन लेते हैं। कल्ले कमजोर हुए तो मिलेबल गन्ने भी कम बनेंगे। यह कोई नई बात नहीं, हर साल का यही चक्र है।

अच्छी खबर यह है कि इस लड़ाई को जीतने के लिए पूरा सीजन खेत में डटे रहने की जरूरत नहीं। कृषि विज्ञान के मानक तरीकों के मुताबिक बुवाई के बाद सिर्फ 3 तारीखें याद रखनी हैं। पहली तारीख: बुवाई के 3 दिन के अंदर। दूसरी: 21 से 25 दिन बाद। तीसरी: 45 से 55 दिन बाद। इन तीन मौकों पर सही कदम उठा लिया तो खरपतवार पूरे सीजन दबे रहेंगे और कल्ले खुलकर बढ़ेंगे।

तारीख 1: बुवाई के 3 दिन के अंदर, दवा उगने से पहले

खरपतवारनाशी का सबसे असरदार इस्तेमाल वह है जो खरपतवार के उगने से पहले हो। इसे प्री-इमरजेंस छिड़काव कहते हैं। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज के अनुसार गन्ने की बुवाई के तीसरे दिन अट्राज़ीन 2 किलो या ऑक्सीफ्लोरफेन 750 मिली प्रति हेक्टेयर, 900 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।

इसमें एक शर्त सबसे अहम है और वही सबसे ज्यादा नजरअंदाज होती है: छिड़काव के समय खेत में नमी होनी चाहिए। सूखी मिट्टी पर दवा डाली तो असर आधा रह जाएगा। अगर बुवाई के बाद सिंचाई नहीं हुई है तो पहले हल्की सिंचाई करें, फिर दवा छिड़कें। नोजल का भी ध्यान रखें। फ्लैट फैन या डिफ्लेक्टर नोजल से दवा पूरे खेत में एक समान पड़ती है, जिससे कोई हिस्सा छूटता नहीं।

तारीख 2: 21 से 25 दिन बाद, जो बच गए उन्हें निपटाएं

प्री-इमरजेंस छिड़काव के बाद भी कुछ जिद्दी खरपतवार उग आते हैं, खासकर मोथा (साइप्रस) जैसे गहरी जड़ वाले। अगर पहली तारीख छूट गई हो या खरपतवार फिर से सिर उठा रहे हों, तो 21वें दिन पोस्ट-इमरजेंस छिड़काव का विकल्प है। कृषि विज्ञान की सिफारिश के मुताबिक ग्रामोक्सोन 2.5 लीटर और 2,4-डी सोडियम साल्ट 2.5 किलो प्रति हेक्टेयर, 900 लीटर पानी में घोलकर 21वें दिन छिड़कें।

जो किसान दवा से बचना चाहते हैं, उनके लिए यही समय पहली निराई-गुड़ाई का है। जूनियर-हो या हैंड-हो से बुवाई के करीब 25 दिन बाद मेड़ों की गुड़ाई करें और नालियों के खरपतवार हाथ से निकालें। गुड़ाई से दो फायदे एक साथ मिलते हैं: खरपतवार निकलते हैं और मिट्टी भुरभुरी होकर जड़ों को हवा मिलती है, जिससे कल्ले तेजी से निकलते हैं।

तारीख 3: 45 से 55 दिन बाद, आखिरी निर्णायक मौका

गन्ने के कल्ले निकलने का सबसे नाजुक दौर बुवाई के डेढ़ से तीन महीने के बीच होता है। इस समय खरपतवार अगर हावी रहे तो कल्लों की संख्या सीधे घटती है। 55वें दिन के आसपास दूसरी निराई-गुड़ाई करें। जिन खेतों में दवा का सहारा लेना हो, वहां 45वें, 75वें और 105वें दिन 10 प्रतिशत अमोनियम सल्फेट का घोल खरपतवारों पर डायरेक्टेड स्प्रे के रूप में डालने की सिफारिश है। डायरेक्टेड स्प्रे का मतलब है नोजल सिर्फ खरपतवार की तरफ, गन्ने के पौधे पर दवा न पड़े। इसके लिए हुड वाली नोजल सबसे सुरक्षित रहती है।

मोथा जैसे बारहमासी खरपतवार अगर ज्यादा हों तो 2,4-डी सोडियम साल्ट 800 ग्राम प्रति एकड़, 225 लीटर पानी में घोलकर पोस्ट-इमरजेंस छिड़काव की सिफारिश पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज में दी गई है।

दवा छिड़कें तो इन बातों का ध्यान रखें

दवा से फसल जलने की शिकायतें आमतौर पर दवा की गलती नहीं, तरीके की गलती होती हैं। लेबल पर लिखी मात्रा से ज्यादा दवा डालना सबसे बड़ी भूल है। ज्यादा मात्रा खरपतवार तो मारेगी ही, गन्ने को भी झुलसा सकती है। तेज हवा में छिड़काव न करें, वरना दवा उड़कर पड़ोसी के खेत या गन्ने के कोमल पत्तों पर पड़ेगी। छिड़काव सुबह या शाम को करें, धूप तेज होने पर नहीं। स्प्रे करने वाला मुंह पर कपड़ा बांधे और हाथ-पैर ढंके रखें।

एक राहत की खबर भी है। UP सरकार गन्ना समितियों के जरिए 15,000 किसानों को स्प्रेयर पर 50 प्रतिशत अनुदान दे रही है। यानी छिड़काव का खर्च भी अब आधा पड़ सकता है। खरपतवार या फसल सुरक्षा की सलाह के लिए गन्ना विभाग का टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 भी उपलब्ध है।

बिना दवा खरपतवार दबाने के देसी तरीके

जो किसान पूरी तरह दवा से बचना चाहते हैं, उनके पास भी रास्ते हैं। अंकुरण पूरा होने के बाद गन्ने की पंक्तियों के बीच 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से गन्ने की पत्तियां (ट्रैश) या धान की पराली बिछा दें। मल्चिंग से खरपतवारों को धूप नहीं मिलती और वे दबे रह जाते हैं, साथ में मिट्टी की नमी भी बचती है।

खेत की मेड़ें साफ रखें, क्योंकि खरपतवारों के बीज अक्सर मेड़ों से ही खेत में फैलते हैं। गर्मियों में एक बार गहरी जुताई करने से मोथा और कांस जैसे बारहमासी खरपतवारों की जड़ें धूप में सूखकर काफी हद तक खत्म हो जाती हैं। खरपतवारों को बीज बनने से पहले ही उखाड़ फेंकें, एक सीजन के बीज अगले तीन-चार सीजन तक खेत में उगते रहते हैं।

मुख्य बातें

  • बुवाई के 3 दिन के अंदर प्री-इमरजेंस छिड़काव (अट्राज़ीन 2 किलो/हेक्टेयर, 900 लीटर पानी, नमी जरूरी) सबसे असरदार कदम है।
  • 21-25 दिन पर पोस्ट-इमरजेंस दवा या पहली निराई, और 45-55 दिन पर दूसरी निराई या डायरेक्टेड स्प्रे करें।
  • ट्रैश मल्चिंग (20-25 क्विंटल/एकड़) और साफ मेड़ें बिना दवा खरपतवार दबाने के सस्ते तरीके हैं; स्प्रेयर पर 50% अनुदान और टोल-फ्री 1800-121-3203 का लाभ लें।

स्रोत: तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज (http://eagri.org/eagri50/AGRO304/lec15.html); इंडियन शुगर पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज (https://www.indiansugar.com/Package_of_practices.pdf); चिनीमंडी, UP स्प्रेयर अनुदान रिपोर्ट (https://www.chinimandi.com/up-to-provide-subsidized-sprayers-to-sugarcane-farmers-pushes-smart-fertilizer-adoption/)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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