गन्ने के खरपतवार से 40% तक उपज बढ़ाएं: मोथा-दूब-कांस पर सीजन-वार प्लान

शरदकालीन बुवाई का मौसम चल रहा है। गोज़ खेत में गया, पानी लगा, और अब किसान इंतजार कर रहा है कि कल्ले फूटें। लेकिन एक हफ्ते बाद खेत में जो सबसे पहले हरा दिखता है, वह गन्ना नहीं होता। मोथा, दूब और बथुआ गन्ने से पहले मैदान में उतर आते हैं।
उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान पिपराइच (गोरखपुर) के सहायक निदेशक डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता कहते हैं कि बुवाई के बाद 120 दिनों तक खरपतवार का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि खरपतवार नियंत्रण से गन्ने का उत्पादन 40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। मतलब यह कि खेत वही, बीज वही, खाद वही, फर्क सिर्फ इतना कि खरपतवार काबू में रहे या न रहे। इस गाइड में वही सीजन-वार प्लान है जिससे मोथा-दूब-कांस जैसे जिद्दी खरपतवार भी काबू में आते हैं।
पहले 120 दिन: गन्ने का सबसे कमजोर समय
गन्ने की असली बढ़वार बुवाई के बाद पहले 3-4 महीनों में तय होती है। इसी दौरान कल्ले निकलते हैं। खरपतवार इस समय तीन तरह से नुकसान पहुंचाते हैं: खाद और पानी वे पहले चूस लेते हैं, उनकी छांव में कल्ले कमजोर रहते हैं, और कई खरपतवारों में कीट-रोग छिपकर बाद में गन्ने पर हमला करते हैं।
इसीलिए 120 दिन की यह खिड़की सबसे अहम है। बुवाई के बाद खेत को बस 120 दिन संभाल लीजिए, उसके बाद गन्ना खुद इतना घना हो जाता है कि खरपतवार दब जाते हैं। पेड़ी गन्ने में भी यही नियम लागू होता है, बस कटाई के बाद रटून में खरपतवार और तेजी से उठते हैं, इसलिए पेड़ी खेत में पहले महीने से ही नजर रखनी चाहिए।
दुश्मन को पहचानिए: मोथा, दूब, कांस और बाकी
दवा डालने से पहले यह जानना जरूरी है कि खेत में है कौन। गन्ने के खेत में आमतौर पर ये खरपतवार मिलते हैं:
मोथा (साइप्रस रोटंडस): सबसे जिद्दी। इसकी जड़ में गांठें होती हैं जो मिट्टी में गहराई तक जाती हैं। ऊपर से काट दो तो नीचे से फिर निकल आता है।
दूब: जमीन पर फैलकर चटाई सी बिछा देती है। नमी वाली जगहों पर तेजी से बढ़ती है।
कांस: यह गन्ने के कुल का ही जंगली रिश्तेदार है, इसलिए शुरू में गन्ने जैसा दिखता है और बाद में अलग पहचानना मुश्किल हो जाता है।
चौड़ी पत्ती वाले: बथुआ, चौलाई, दूधी, मकोय। ये खाद सबसे ज्यादा खाते हैं।
लता वाले: आकाशबेल जैसी बेलें गन्ने पर चढ़कर उसे गिरा देती हैं।
नियम सीधा है: जिस खरपतवार का खेत में राज ज्यादा हो, दवा उसी के हिसाब से चुनिए। सब पर एक ही दवा चलाना पहली गलती है।
सीजन-वार प्लान: 120 दिन की चार खिड़कियां
पहली खिड़की, बुवाई के तुरंत बाद (0 से 3 दिन): खरपतवार उगने से पहले वाला छिड़काव सबसे असरदार होता है। कृषि विज्ञान की सिफारिश के अनुसार एट्राजीन 50 प्रतिशत घुलनशील पाउडर की 1.6 किलोग्राम मात्रा प्रति एकड़, 250 से 300 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के तुरंत बाद छिड़कें। शर्त एक ही है: खेत में नमी होनी चाहिए। सूखी मिट्टी पर दवा छिड़की तो असर आधा रह जाएगा।
दूसरी खिड़की, 7 से 15 दिन: बुवाई के 7 से 10 दिन बाद गुड़ाई करके सुहागा लगाएं; खरपतवार की स्थिति देखकर सीजन में 2-3 बार गोड़ाई करें।
तीसरी खिड़की, 50 से 65 दिन: बुवाई के 60 दिन बाद चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए 2,4-डी (80 प्रतिशत सोडियम नमक) की 1 किलोग्राम मात्रा प्रति एकड़, 250 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
चौथी खिड़की, 90 दिन के आसपास: इस समय गुड़ाई के साथ मिट्टी चढ़ाने का काम करें। मिट्टी चढ़ाने से किल्लों को सहारा मिलता है, गन्ना गिरने से बचता है और खरपतवार दब जाते हैं। आईआईएसआर के अनुसार बुवाई के 30, 60 और 90 दिन पर गुड़ाई सबसे अच्छा खरपतवार नियंत्रण देती है।
मोथा जैसे जिद्दी खरपतवारों के लिए खास इलाज
मोथा और कांस जैसी गहरी जड़ वाली घासों पर आम दवा पूरी तरह काम नहीं करती। इनके लिए दो अतिरिक्त हथियार हैं। पहला, गर्मी की जुताई: गर्मियों में खेत की गहरी जुताई-गुड़ाई करने से मोथे की गांठें धूप में सूख जाती हैं। दूसरा, गन्ने की पताई (ट्रैश) को खेत में बिछा देना। इससे खरपतवार दबते हैं और नमी भी बनी रहती है। शोध में एट्राजीन के बाद 60 दिन की अवस्था पर गुड़ाई या पताई बिछाना केवल रासायनिक नियंत्रण से ज्यादा लाभदायक पाया गया है। मोथा बहुल खेतों में सल्फेंट्राजोन जैसी दवाएं भी कारगर पाई गई हैं। मात्रा हमेशा पैकेट के लेबल या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह के अनुसार ही रखें।
छिड़काव की 4 गलतियां जो गन्ना जला देती हैं
सूखे खेत में छिड़काव: नमी न हो तो दवा काम नहीं करती और फसल पर असर पड़ सकता है। पहले हल्की सिंचाई, फिर दवा।
तेज हवा में छिड़काव: दवा उड़कर गन्ने के नए कल्लों पर पड़ सकती है। सुबह या शाम, शांत हवा में ही छिड़कें।
मात्रा बढ़ा देना: “ज्यादा दवा, ज्यादा असर” यह सोच गलत है। तय मात्रा से ज्यादा डालने पर गन्ना जलने का खतरा बढ़ता है। नापकर ही घोल बनाएं।
बिना सुरक्षा के छिड़काव: मास्क, दस्ताने और लंबी आस्तीन के कपड़े पहनें। छिड़काव के बाद साबुन से हाथ-मुंह धोएं और खाली पैकेट खेत में न फेंकें।
पेड़ी गन्ने में खरपतवार: अलग नजरिया
पेड़ी (रटून) गन्ने में खरपतवार की समस्या पौध गन्ने से ज्यादा होती है, क्योंकि कटाई के बाद खेत खुला रहता है। कटाई के तुरंत बाद खेत की सफाई और पहली गुड़ाई कर दें, फिर वही 120-दिन वाला प्लान अपनाएं।
मुख्य बातें
- बुवाई के बाद पहले 120 दिन खरपतवार से गन्ने को सबसे ज्यादा नुकसान होता है; इसी खिड़की में नियंत्रण से उत्पादन 40% तक बढ़ सकता है।
- मोथा, दूब, कांस जैसे जिद्दी खरपतवारों पर दवा के साथ गर्मी की जुताई और पताई की मल्चिंग भी अपनाएं।
- छिड़काव हमेशा नमी वाले खेत में, शांत हवा में और तय मात्रा में करें; मोथा बहुल खेत में कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह जरूर लें।
स्रोत: भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ (isri.res.in); कृषि जागरण हिंदी (hindi.krishijagran.com); चिनीमंडी (chinimandi.com); किसान इंडिया (kisanindia.in)
