गन्ने में खाद का पूरा कैलेंडर: 300 किलो नाइट्रोजन कब-कब डालें

अक्टूबर का महीना है। पश्चिमी यूपी में ट्रैक्टर खेत में चक्कर लगा रहे हैं और शरदकालीन गन्ने की बुवाई की तैयारी जोरों पर है। हर किसान का एक सवाल दोहराया जा रहा है। खाद कितनी डालनी है, इस पर बहस लंबी है, पर असली सवाल एक और है — खाद कब डालनी है? बुवाई के समय सारी यूरिया एक साथ डालने वाले किसान भी हैं और पेड़ी में बिना हिसाब-किताब के खाद झोंकने वाले भी। फर्क उपज में दिखता है।
अच्छी खबर यह है कि खाद का समय कोई अंदाजा नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिशें साफ हैं। नीचे गन्ने का पूरा खाद कैलेंडर दिया गया है — बुवाई के दिन से लेकर 120 दिन तक कौन सी खाद, कितनी और कब।
पहले हिसाब समझें: एक हेक्टेयर को कितना चाहिए
उन्नत खेती की मानक सिफारिश के अनुसार गन्ने की एक हेक्टेयर फसल को कुल 300 किलो नाइट्रोजन, 85 किलो फास्फोरस और 60 किलो पोटाश चाहिए। बोरी में तौलकर देखें तो यह होता है करीब 650 किलो यूरिया, 500 किलो सिंगल सुपर फास्फेट और 100 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश। यह मात्रा सुनकर डरने की जरूरत नहीं है। पूरा खेल इसे सही समय पर बांटने का है।
एक बात पहले ही साफ कर दें। यह मानक सिफारिश है। आपके खेत की मिट्टी में फास्फोरस पहले से ज्यादा है या जिंक की कमी है, यह मिट्टी परीक्षण बताएगा। मानक मात्रा से शुरुआत करें, रिपोर्ट के हिसाब से समायोजन करें।
बुवाई के समय: फास्फोरस-पोटाश एकमुश्त, नाइट्रोजन का एक तिहाई
बुवाई के दिन नालियों में फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा एक साथ डाल दें। फास्फोरस जड़ों के विकास के लिए जरूरी है और जड़ें बुवाई के शुरू के दिनों में ही बनती हैं। बाद में ऊपर से डाला गया फास्फोरस मिट्टी में फंसकर जड़ों तक पहुंच ही नहीं पाता। यही हाल पोटाश का है — यह गन्ने को गिरने से बचाता है और चीनी की रिकवरी बढ़ाता है।
नाइट्रोजन की कुल मात्रा का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा बुवाई के समय डालें। एक एकड़ में बुवाई से पहले नाली में 150 किलो सुपर फास्फेट, 50 किलो पोटाश और 25 किलो यूरिया डालना मानक सिफारिश है। यूरिया को नीम की खली के चूर्ण में मिलाकर डालें — नाइट्रोजन की उपयोगिता बढ़ती है और दीमक से भी बचाव होता है।
30 से 45 दिन: पहली टॉप ड्रेसिंग, कल्लों का समय
बुवाई के 30 से 45 दिन बाद फसल का सबसे अहम दौर शुरू होता है — कल्ले फूटने का समय। जितने ज्यादा स्वस्थ कल्ले, उतने ज्यादा मिल योग्य गन्ने। इस दौर में नाइट्रोजन की दूसरी किश्त डालें — एक एकड़ में करीब 100 किलो यूरिया को 2-3 बार सिंचाई के समय बांटकर डालें।
यूरिया डालने का सही तरीका यह है कि सिंचाई से ठीक पहले जड़ों के पास डालें और हल्की गुड़ाई कर दें। यूरिया को खेत में बिखेरकर सूखा छोड़ देना सबसे बड़ी बर्बादी है — धूप और हवा में नाइट्रोजन उड़ जाता है।
80 से 90 दिन: दूसरी टॉप ड्रेसिंग, बढ़वार जोरों पर
बुवाई के 80 से 90 दिन बाद गन्ना तेजी से लंबा हो रहा होता है। इस समय नाइट्रोजन की तीसरी किश्त डालें — फिर करीब 100 किलो यूरिया प्रति एकड़, सिंचाई के साथ बांटकर। इस दौर में खरपतवार पर भी नजर रखें, क्योंकि वे खाद खा जाते हैं।
120 दिन: बड़ी मिट्टी चढ़ाते समय आखिरी किश्त
बुवाई के करीब 120 दिन बाद जब बड़ी मिट्टी चढ़ाई जाती है, तब नाइट्रोजन की आखिरी किश्त डालें। इस समय 150 किलो सुपर फास्फेट, 50 किलो पोटाश और 50 किलो यूरिया प्रति एकड़ डालने की सिफारिश है।
120 दिन के बाद नाइट्रोजन देना बंद कर दें। देर से दी गई नाइट्रोजन गन्ने को हरा तो रखती है, लेकिन चीनी की मात्रा घटा देती है। मिल में तौल तो होगी, पर रिकवरी कम होने से भाव पर असर पड़ता है। यह वह गलती है जो सबसे ज्यादा किसान करते हैं — सोचते हैं कि जितनी ज्यादा यूरिया, उतना ज्यादा वजन।
जिंक और सूक्ष्म पोषक: तीन साल में एक बार का निवेश
यूरिया-डीएपी की चर्चा में जिंक अक्सर छूट जाता है। यूपी की कई मिट्टियों में जिंक की कमी है और इसकी कमी में पौधे बौने रह जाते हैं, चाहे जितनी यूरिया डाल लें। बुवाई के समय आधार खाद के रूप में 25 किलो जिंक सल्फेट और 50 किलो फेरस सल्फेट प्रति हेक्टेयर डालें — तीन साल के अंतराल पर। एक एकड़ के हिसाब से 10 किलो जिंक सल्फेट तीन साल में एक बार पर्याप्त है।
पेड़ी गन्ने में नाइट्रोजन ज्यादा चाहिए
पेड़ी (रटून) की फसल को बोए गए गन्ने से ज्यादा नाइट्रोजन चाहिए — 225 से 280 किलो प्रति हेक्टेयर तक, जबकि फास्फोरस-पोटाश की मात्रा लगभग समान रहती है। पेड़ी में खाद पेड़ी प्रबंधन के साथ ही डालें — कटाई के तुरंत बाद खूंटों की सफाई करके नालियों में खाद दें। उत्तर-पूर्वी यूपी के फील्ड प्रयोगों में पेड़ी में 210 किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर तक उपज में सीधा इजाफा दर्ज हुआ।
सबसे आम गलतियां जो पैसा डुबोती हैं
सारी यूरिया बुवाई के समय एक साथ डाल देना सबसे बड़ी गलती है। पौधा छोटा है, जरूरत कम है, और बची हुई नाइट्रोजन पानी के साथ बह जाती है। दूसरी गलती है फास्फोरस को देर से देना — जड़ें बनने के बाद इसका कोई फायदा नहीं। तीसरी गलती है जिंक को पूरी तरह नजरअंदाज करना। चौथी है 120 दिन के बाद भी यूरिया डालते रहना, जिससे चीनी की रिकवरी घटती है।
इन चार गलतियों से बच गए तो आपकी खाद का हर रुपया काम करेगा।
मुख्य बातें
- गन्ने को प्रति हेक्टेयर 300 किलो नाइट्रोजन, 85 किलो फास्फोरस और 60 किलो पोटाश चाहिए — नाइट्रोजन को बुवाई, 30-45 दिन, 80-90 दिन और 120 दिन की किश्तों में बांटें।
- फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय नालियों में डालें; 120 दिन के बाद यूरिया बंद करें वरना चीनी की रिकवरी घटेगी।
- 10 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ तीन साल में एक बार जरूर डालें; यूरिया हमेशा सिंचाई के साथ जड़ों के पास दें, सूखा बिखेरकर नहीं।
स्रोत: ट्रैक्टर जंक्शन (गन्ना उन्नत खेती सिफारिश), कृषि जागरण हिंदी (गन्ना खाद अनुसूची), इंडियन शुगर पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज, उत्तर-पूर्वी यूपी पेड़ी गन्ना फील्ड प्रयोग।
